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पुलिस एनकाउंटर में मारे गये इस डकैत का नहीं बन पा रहा डेथ सर्टिफिकेट, पत्नी खा रही दर-दर की ठोकरें

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: चंदन गड़रिया को आतंक का दूसरा नाम कहें तो कोई आश्चर्य़ नहीं होगा। मध्य प्रदेश के शिवपुरी इलाके में गड़रिया गिरोट का आतंक था। इस गिरोह का स्थाई सदस्य चंदन गड़रिया भी इलाके में आतंक मचाने से बाज नहीं आता था। चंदन को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। जिसके बाद इसका मृत्यु प्रमाण पत्र तीन पंचायतों की सीमाओं में उलझा हुआ है। जिससे उसकी पत्नी गीता पाल को विधवा पेंशन जैसी सरकारी योजना लाभ नहीं मिल पा रहा है।

आपको बता दें कि जनवरी साल 2016 में 30 हजार के इनामीं डकैत चंदन गड़रिया को केनवाया के जंगलों में एनकाउंटर कर मार गिराया था। चंदन करैरा तहसील के मामौनी गांव का निवासी था। चंदन की पत्नी गीता पाल मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए वहां पहुंची तो उन्हें कहा गया कि जिस जगह मौत हुई है, प्रमाण पत्र भी वहां से बनेगा। इसके बाद जब उसकी पत्नी केनवाया पंचायत पहुंची तो यहां पर सीमाओं का पेच उलझ गया।

केनवाया में उनसे कहा गया कि एनकाउंटर केनवाया और लोटना ग्रामों के बीच हुआ है। यहां से सुझाव मिलने के बाद चंदन की पत्नी लोटना गई। लोटना से उसको चंदीवनी भेज दिया गया। चारो तरफ चक्कर काटने के बाद चंदन की पत्नी तहसीलदार, एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक के सामने परिवार विधवा पेंशन और अन्य योजनाओं के लिए गुहार लगा चुकी है। लेकिन 5 साल बीतने के बाद कोई सुनवाई नहीं हुई।

चारो तरफ से थक हार के बाद चंदन की पत्नी गीता का कहना है कि चंदन के साथ पुलिस ने जो किया सो किया, लेकिन अब मेरे पांच बच्चे हैं, कच्चा मकान है। कम से कम गुजारे के लिए विधवा पेंशन और राशन के लिए बीपीएल कार्ड तो बनवा दे। आपको बता दें कि चंदन के नाम से पूरा मामौनी गांव कांपता था अब उसकी पत्नी वहां दूसरों के खेतों में मजदूरी कर जैसे तैसे अपने बच्चों को पाल रही है।

 

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