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UP : कोरोना लहर के बीच बीजेपी के किन-किन नेताओं ने गंवाई अपनी जान, पढ़े पूरी खबर

By Amit ranjan 
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लखनऊ : राज्य में जारी कोरोना के दूसरी लहर के बीच सीएम योगी ने एक बार फिर लॉकडाउन बढ़ाने का फैसले किया है, जो 31 मई तक रहेगा। हालांकि इसके बाद ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार अन्य राज्यों के भांति अनलॉक पर विचार करेगी। आपको बता दें कि कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर में उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के नेताओं पर कहर बनकर टूट रही है। जिसने अभी तक सीएम योगी के पांच मंत्रियों की जान ले ली है। वहीं पहली लहर में भी बीजेपी के कई दिग्गज मंत्री कोरोना के शिकार हुए। आज हम आपके सामने उन सभी BJP नेताओं का जिक्र करेंगे, जिनकी जान कोरोना ने या कोरोना महामारी के दौरान हुई है।

  • कमल रानी वरूण : कोरोना संक्रमण के कारण उत्तर प्रदेश कैबिनेट मंत्री और कानपुर के घाटमपुर से विधायक कमल रानी वरुण की 2 अगस्त 2020 को मौत हो गई। लखनऊ में 3 मई 1958 को जन्मी कमलरानी वरुण की शादी एलआईसी में प्रशासनिक अधिकारी किशन लाल वरुण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिबद्ध स्वयंसेवक से हुई थी। बहू बनकर कानपुर आईं कमलरानी ने पहली बार 1977 के चुनाव में बूथ पर मतदाता पर्ची काटने के लिए घूंघट में घर की दहलीज पार की। वर्ष 1989 में भाजपा ने उन्हें शहर के द्वारिकापुरी वार्ड से कानपुर पार्षद का टिकट दिया। चुनाव जीत कर नगर निगम पहुंची कमलरानी 1995 में दोबारा उसी वार्ड से पार्षद निर्वाचित हुईं। भाजपा ने 1996 में उन्हें उस घाटमपुर (सुरक्षित) संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतारा। अप्रत्याशित जीत हासिल कर लोकसभा पहुंची कमलरानी ने 1998 में भी उसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की। वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सिर्फ 585 मतों के अंतराल से बसपा प्रत्याशी प्यारेलाल संखवार के हाथों पराजित होना पड़ा था। वर्ष 2012 में पार्टी ने उन्हें रसूलाबाद (कानपुर देहात) से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा लेकिन वह जीत नहीं सकी। 2015 में पति की मृत्यु के बाद 2017 में वह घाटमपुर सीट से भाजपा की पहली विधायक चुनकर विधानसभा में पहुंची थीं। सांसद रहते कमलरानी ने लेबर एंड वेलफेयर, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, राजभाषा व पर्यटन मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समितियों में रहकर काम किया।

  • चेतन चौहान : चेतन 1981 में क्रिकेट से संन्यास के बाद 1985 में राजनीति में आए और बीजेपी जॉइन किया। उसके बाद से वह लगातार राजनीति और क्रिकेट में ऐक्टिव रहे। चौहान अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा सीट से 2017 में विधायक चुने गए थे। क्रिकेट से संन्यास लेकर वह राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। चौहान योगी सरकार में सैनिक कल्याण, होम गार्ड, पीआरडी, नागरिक सुरक्षा विभाग के मंत्री थे। बता दें कि चेतन चौहान भारतीय क्रिकेट टीम के एक अहम बल्लेबाज रह चुके हैं। चेतन चौहान ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 40 टेस्ट मुकाबले खेले हैं। इसके अलावा चेतन चौहान ने सात एकदिवसीय मुकाबलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। टेस्ट मुकाबलों मे चेतन चौहान के नाम 2084 रन दर्ज हैं। टेस्ट मैचों में उनका सर्वोच्च स्कोर 97 रन है। अगर हम इनके परिवार की बात करें तो, इनके अलावा परिवार में बता दें कि इनकी पत्नी संगीता चौहान और बेटा विनायक है। आपको बता दें कि चेतन का जन्म उत्तर प्रदेशी की बरेली में 21 जुलाई 1947 को हुआ था। जिनका निधन कोरोना महामारी के कारण 16 अगस्त 2020 को हुआ था। वे 73 साल के थे।

  • विजय कश्यप : विजय कुमार कश्यप योगी सरकार में राजस्व एवं बाढ़ नियंत्रण राज्यमंत्री थे। जिनके स्थान पर स्वाती सिंह को एनआरआई, कृषि निर्यात, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, महिला कल्याण परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण के साथ बाढ़ नियंत्रण एवं सतीश द्वेदी को बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, वित्त के साथ अतिरिक्त राजस्व विभाग का जिम्मा सौंपा गया। आपको बता दें कि कश्यप मुजफ्फरनगर की चरथावल विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। चरथावल सीट से विजय कश्यप ने बीजेपी के टिकट पर 2007 और 2012 में भी चुनाव लड़ा था, मगर जीत नहीं मिली थी। इसके बाद मोदी लहर में वह पहली बार 2017 के विधानसभा चुनाव में विजयी हुए। विजय कश्यप बीजेपी में पिछड़ा वर्ग का बड़ा चेहरा माने जाते थे। 21 अगस्त 2019 को मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सीएम योगी ने उन पर भरोसा किया था और विजय कश्यप को राजस्व राज्यमंत्री के रूप में शामिल किया था। विजय कश्यप मुख्यमंत्री कार्यालय से संबद्ध राज्यमंत्री भी थे। आपको बता दें कि विजय कश्यप का जन्म 29 फरवरी 1965 को सहारनपुर में हुआ था। वहीं इनकी मौत 18 मई 2021 को कोरोना के कारण हो गई।

  • दल बहादुर कोरी : बीजेपी से तीन बार विधायक और कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में समाज कल्याण राज्य मंत्री रहे दल बहादुर कोरी का लखनऊ के अपोलो अस्पताल में 7 मई को लंबे बीमारी के चलते निधन हो गया। बीमारी के बीच ही वह कोरोना संक्रमित भी हुए थे। आपको बता दें कि दल बहादुर कोरी वर्तमान में रायबरेली के सलोन सीट विधायक थे। बता दें कि कोरी 1990 में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए थे, वह दो बार जेल भी गए थे, इस दौरान 1991 में उन्हें टिकट मिला, लेकिन वह चुनाव हार गए। हालांकि, दल बहादुर कोरी पहली बार 1996 में सलोन विधानसभा से विधायक बने और राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल में मंत्री बनाए गए। इसके बाद 2004 में दल बहादुर कोरी कांग्रेस में शामिल हो गए, लेकिन 2014 में उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया और घर वापसी कीष इसके बाद 2017 में बीजेपी ने दल बहादुर कोरी को सलोन सीट से टिकट दिया। उन्होंने सलोन विधानसभा चुनाव के दौरान जीत हासिल की। बीते दिनों वह पंचायत चुनाव के दौरान काफी सक्रिय थे।

  • सुरेश श्रीवास्तव : राजधानी की लखनऊ पश्चिम सीट से भाजपा विधायक सुरेश श्रीवास्तव (76) का 23 अप्रैल को कोरोना से निधन हो गया। उनका इलाज एसजीपीजीआई के राजधानी हॉस्पिटल में चल रहा था। उनके परिवार में पत्नी मालती श्रीवास्तव, छोटा बेटा सौरभ भी कोविड पॉजिटिव हैं और वह भी अलग-अलग हॉस्पिटल में भर्ती हैं। उनका वाहन चालक भी कोरोना संक्रमित था और उसका कुछ दिन पहले निधन हो चुका है। वहीं संडीला निवासी उनका सेवक भी कोविड पॉजिटिव है। आपको बता दें कि श्रीवास्तव की गिनती राजधानी वरिष्ठतम भाजपा नेताओं में रही। वह महानगर अध्यक्ष समेत कार्यकारिणी में विभिन्न पदों पर रहे। इसके बाद पहली बार वर्ष 1996 में पहली बार मध्य विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद वह लगातार दो बार मध्य विधानसभा से ही पुन: विधायक चुने गए। वर्ष 2012 परिसीमन के बाद वह पश्चिम विधानसभा से चुनाव लड़े और चौथी बार हार गए। हालांकि पिछले वर्ष 2017 के चुनाव में वह फिर पश्चिम विधानसभा से ही विधायक चुने गए। उनका बड़ा बेटा डॉ. शैलेश व उसकी पत्नी गोमती नगर के सेंट जोसेफ हॉस्पिटल में डॉक्टर हैं। बेटी वैज्ञानिक है। पत्नी महिला कॉलेज में शिक्षिका रहीं।

  • रमेश चंद्र दिवाकर : औरैया सदर भाजपा विधायक रमेश चंद्र दिवाकर ने कोरोना के दूसरी लहर में 23 अप्रैल 2021 को आखिरी सांस ली। वे 58 वर्ष के थे। आपको बता दें कि रमेश दिवाकर औरैया शहर के मोहल्ला तिलक नगर निवासी थे। वह चौधरी विशंभर सिंह भारती विद्यालय में बतौर व्यायाम शिक्षक काम करते थे। औरैया में भाजपा के जिला अध्यक्ष रहे रमेश दिवाकर ने वर्ष 2009 और वर्ष 2014 में इटावा सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी से टिकट की मांग की थी। पर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में औरैया सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए। आपको बता दें कि भाजपा विधायक रमेश चंद्र दिवाकर की पत्नी लक्ष्मी देवी और दो बड़ी बेटियां और दो बेटे हैं। वर्ष 2000 से आरएसएस से जुड़े रहे। वर्ष 2004 से सक्रिय राजनीति में आए।

  • केसर सिंह गंगवार : कोरोना के कहर के बीच बरेली जिले के नवाबगंज से भाजपा विधायक केसर सिंह 28 अप्रैल को कोरोना से जंग हार गये। नोएडा के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। आपको बता दें कि भाजपा विधायक केसर सिंह राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे। बसपा सरकार में वह एमएलसी रहे। इसके अलावा उनके भाई की पत्नी उषा गंगवार बरेली की जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। पहली बार भाजपा ज्वाइन करने के बाद उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा। नवाबगंज से भारी मतों से विजयी हुए थे। बता दें कि भाजपा विधायक केसर सिंह के घर में पत्नी, बेटा और दो बेटियां हैं। उनके बड़े बेटे मुनेंद्र सिंह की दो साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। उनका छोटा बेटा विशाल गंगवार साथ में था।

  • जन्‍मेजय सिंह : देवरिया की सदर सीट के भाजपा के विधायक जन्मेजय सिंह का जन्म सात जुलाई, 1945 को गौरीबाजार के देवगांव में हुआ था। उनके पिता त्रिलोकीनाथ सिंह किसान थे। उन्होंने गुजराती देवी के साथ शादी की थी। उनके तीन बेटे और चार बेटियां हैं। वे वर्ष 2000 में हुए उपचुनाव में पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक बने। बाद में 2002 में हुए आम चुनाव में सपा के शाकिर अली से हार गए। 2007 में वह भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश की 16वीं और 17वीं विधान सभा के सदस्य रहे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में देवरिया निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2012 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार प्रमोद सिंह को 23,295 मतों के अंतर से हराया था। वर्ष 2017 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जे.पी.जायसवाल को 46,236 मतों के अंतर से हराया था। आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक (BJP MLA) जन्मेजय सिंह (Janmejai Singh) का 21 अगस्त 2020 को लखनऊ में हार्ट अटैक से निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। इलाज के दौरान उनकी कोरोना वायरस संक्रमण की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी।

  • वीरेन्‍द्र सिंह सिरोही : बुलंदशहर सदर विधायक वीरेन्द्र सिंह सिरोही का लंबी बीमारी के कारण 2 मार्च 2020 को निधन हो गया। उन्होंनें दिल्ली के एक हॉस्पिटल में अन्तिम सांस ली। करीब 74 वर्षीय वीरेन्द्र सिंह सिरोही को लीवर में बीमारी के चलते उनके परिजनों ने 8 फरवरी को दिल्ली के आईएलबीएस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आपको बता दें कि अगौता विधानसभा, उसके विलय होने के बाद बुलंदशहर विधानसभा सीट से कई बार विधायक रहे वीरेन्द्र सिंह सिरोही वर्तमान में विधानसभा में मुख्य सचेतक के पद पर थे। वह पूर्व में प्रदेश सरकार में राजस्व मंत्री के पद पर भी रहे हैं।17 वीं विधानसभा के यह सदस्य हो गए दिवंगत

    कमल रानी घाटमपुर(कानपुर शहर), चेतन चौहान नौगाँव सादात (अमरोहा), जगन प्रसाद गर्ग आगरा,  जन्‍मेजय सिंह देवरिया, पारस नाथ यादव मल्हनी(जौनपुर)मथुरा प्रसाद पाल सिकन्दरा (कानपुर देहात),रमेश चन्‍द्र दिवाकर(औरैया),रामकुमार वर्मा पटेल निघासन(खीरी) लोकेन्‍द्र सिंह नूरपुर(बिजनौर)वीरेन्‍द्र सिंह सिरोही (बुलंदशहर) सुरेश कुमार श्रीवास्तव लखनऊ व केसर सिंह बरेली।

    रिक्त सीट पर उपचुनाव होना मुश्किल

    आपको बता दें कि कोरोना महामारी के कारण यूपी विधानसभा में खाली पड़े सीटों पर उपचुनाव करा पाना मुश्किल होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वर्तमान में कोरोना संक्रमण अभी काफी बढ़ा हुआ है। चूंकि अगले साल फरवरी में 18वीं विधानसभा के लिए आम चुनाव होना है, जिसमें 9 महीने ही बचे हैं। ऐसे में उपचुनाव के आसार काफी कम ही हैं। वैसे नियमानुसार सीट रिक्त होने के छह महीने में ही चुनाव कराने का नियम है। चुनाव कराने या न कराने का निर्णय चुनाव आयोग को ही करना है।

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