Home उत्तराखंड चीन सीमा पर स्थित इस घाटी से हटा 56 साल पुराना प्रतिबंध

चीन सीमा पर स्थित इस घाटी से हटा 56 साल पुराना प्रतिबंध

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देहरादून। चीन सीमा से सटी नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी अब ‘इनर लाइन’ से बाहर होगी। राज्य सरकार की मंशा नेलांग को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की है और इस दिशा में कवायद भी प्रारंभ कर दी है, ताकि देशी-विदेशी सैलानी वहां के प्राकृतिक नजारों का दीदार कर सकें। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार इस सिलसिले में उनकी थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत से दिल्ली में बातचीत हुई और उन्होंने इस पर हामी भरी है। महाराज ने बताया कि इस सिलसिले में जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजा जाएगा। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात के मद्देनजर भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में सैलानियों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी थी। इनमें उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 115 किमी के फासले पर स्थित नेलांग घाटी भी शामिल है।

नेलांग घाटी प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज है। कहा जाता है कि यह घाटी स्विटजरलैंड की तरह खूबसूरत है। हालांकि, सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नेलांग घाटी में वर्ष 2015 में गृह मंत्रालय ने भारतीयों को और 2017 में विदेशी सैलानियों को अनुमति लेकर जाने की इजाजत दे दी, लेकिन वे वहां रात्रि में ठहर नहीं सकते। पर्यटन को आर्थिकी का अहम जरिया बनाने में जुटी प्रदेश सरकार का ध्यान भी अब नेलांग घाटी पर गया है। इसी कड़ी में नेलांग को इनर लाइन की सभी प्रकार की बंदिशों से मुक्त करने की दिशा में कसरत की जा रही है।

वहीं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत से मुलाकात कर उन्होंने गंगा घाटी में स्थित हर्षिल, मुखबा व बगौरी की भांति नेलांग घाटी को भी इनरलाइन से बाहर करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि जनरल रावत ने इस पर सहमति जताई है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि नेलांग घाटी के इनर लाइन से बाहर होने के बाद यह क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से एक बहुत बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा।

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