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देश के 13 हवाई अड्डों का 31 मार्च तक होगा प्राइवेटाइजेशन, जानें कौन-कौन हैं शामिल

Privatization of 13 airports of the country will be done by March 31 ; सरकार 13 हवाई अड्डों के निजीकरण की प्रक्रिया मार्च तक करेगी। फिलहाल इनका संचालन राज्य के भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा किये जाता है।

By RNI Hindi Desk 
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नई दिल्ली: सरकार की 13 हवाई अड्डों के निजीकरण की प्रक्रिया इस वित्तीय वर्ष के अंत तक की योजना है। फिलहाल इन 13 हवाई अड्डों का संचालन राज्य के स्वामित्व वाले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा संचालित किये जातें हैं। एएआई के अध्यक्ष संजीव कुमार ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में बताया कि, हमने विमानन मंत्रालय को 13 हवाई अड्डों की सूची भेजी है, जिन्हें पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) पर बोली लगाई जानी है। योजना इस वित्तीय वर्ष के अंत तक इन हवाई अड्डों की बोली को पूरा करने की है।

बता दें कि एएआई ने सात छोटे हवाई अड्डों को छह बड़े हवाई अड्डों के साथ मिलाने का फैसला किया गया है जिसमें से कुशीनगर और गया के साथ वाराणसी,  कांगड़ा के साथ अमृतसर,  तिरुपति के साथ भुवनेश्वर, औरंगाबाद के साथ रायपुर, जबलपुर के साथ इंदौर और हुबली के साथ त्रिची शामिल है।

प्रति यात्री राजस्व मॉडल का होगा पालन

एएआई के अध्यक्ष ने कहा, बोली लगाने के लिए जिस मॉडल का पालन किया जाएगा, वह प्रति यात्री राजस्व मॉडल होगा। यह मॉडल पहले इस्तेमाल किया जा चुका है और सफल रहा है और जेवर हवाई अड्डे (ग्रेटर नोएडा में) को भी उसी मॉडल पर बोली लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि कोविड के बावजूद इन परियोजनाओं के लिए खरीदार होंगे, क्योंकि बीमारी का प्रभाव अल्पकालिक है और हवाईअड्डे 50 वर्षों के लिए प्रस्ताव पर हैं।

उन्होंने बताया कि एएआई नए हवाई अड्डों पर ध्यान केंद्रित करेगा। राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना (एनएमपी) के हिस्से के रूप में, सरकार की योजना अगले चार वर्षों में 25 हवाई अड्डों को प्रदान करने की है, जिसमें उपरोक्त 13 भी शामिल हैं। यह 2019 में निजीकरण के दूसरे चरण की शुरुआत में अदानी समूह को दिए गए छह हवाई अड्डों के क्रम में हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद के हवाई अड्डों को निजी ऑपरेटरों को सौंपा जा चुका है।

वहीं, कई विशेषज्ञों का मानना ​​है कि हवाई अड्डों का नियंत्रण और निजीकरण करने के केंद्र के कदम से एएआई को आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत की गारंटी मिलती है, भले ही निजीकृत हवाईअड्डे वित्तीय रूप से कैसा प्रदर्शन करते हैं।

दीपम (डीआईपीएएम) के सचिव तुहिन कांता पांडे ने कहा कि सरकार को इरकॉन और एनएचपीसी समेत चार सीपीएसई से लाभांश के रूप में 533 करोड़ रुपये मिले हैं। दीपम सचिव ने ट्वीट किया, ”इरकॉन, एनएचपीसी, कॉनकॉर और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड ने भारत सरकार को क्रमश: 148 करोड़ रुपये, 294 करोड़ रुपये, 67 करोड़ रुपये और 24 करोड़ रुपये लाभांश के रूप में दिए हैं।”

निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) की वेबसाइट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) में अब तक सरकार को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) से लाभांश के रूप में 8,572 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा, सीपीएसई में अल्पांश हिस्सेदारी के विनिवेश के माध्यम से 9,110 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2024 तक हवाई अड्डों में 3,660 करोड़ रुपये का निजी निवेश लाने का लक्ष्य रखा है।

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