Home विदेश अमेरिका और यूरोप के ये आंकड़े कर रहें भारत के तबाही की ओर इशारा, होगी अधिक जानलेवा…

अमेरिका और यूरोप के ये आंकड़े कर रहें भारत के तबाही की ओर इशारा, होगी अधिक जानलेवा…

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नई दिल्ली : दुनिया में लगातार बढ़ते कोरोना महामारी के आंकड़ें भारत के उस तबाही की ओर इशारा कर रहा है, जिसे अभी आम जनता समझना नहीं चाहती। वहीं सरकार, जनता में किसी तरह का भय ना होने का माहौल बना रही है। लेकिन अमेरिका और यूरोप के आंकड़ें एकबार फिर भारत को आगाह कर रही है, की आप सतर्क हो जाएं, नहीं तो इस बार 2020 से भी अधिक तबाही का शिकार होना होगा।

गौरतलब है कि दुनिया में लगातार बढ़ते कोरोना महामारी को लेकर यूरोप समेत दुनिया भर के 46 देशों में द इकोनॉमिस्ट ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर के अध्ययन का विश्लेषण किया। वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी और यूनिवर्सिटी ऑफ शिन्हुआ ने भी अमेरिका और यूरोप में कोरोना से हुई मौतों का विश्लेषण किया। इसके साथ ही स्पैनिश फ्लू और कोरोना से हुई मौतों का भी विश्लेषण हुआ है। इसके बाद दावा किया गया है कि जिन देशों में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आई, वहां ज्यादा कोहराम मचा।

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आपको बता दें कि भारत में भी कोरोना एक बार फिर से तेजी से सिर उठा रहा है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक कोरोना के केस आ रहे हैं, जिसकी वजह से कई नागपुर और अकोला समेत कई जिलों में लॉकडाउन लगाया गया है, वहीं पुणे से लेकर औरंगाबाद में नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया गया है। इतना ही नहीं, मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में भी नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। कोरोना की रफ्तार को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि भारत में एक बार फिर से पाबंदियों के दिन लौटने लगे हैं। अगर ऐसा होता है तो यह काफी विकराल होगा, क्योंकि अमेरिका से लेकर यूरोप में कोरोना की दूसरी लहर ने सबसे अधिक तबाही मचाई है।

बता दें कि यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी और यूनिवर्सिटी ऑफ शिन्हुआ के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि यूरोप के मुकाबले अमेरिका में दूसरी लहर की रफ्तार थोड़ी धीमी रही। वैसे अमेरिका में भी अक्तूबर से दिसंबर के बीच आई कोरोना की दूसरी लहर ने लाखों लोगों की जान ले ली। अमेरिका में मार्च से अक्टूबर के बीच कोरोना के कुल एक करोड़ मामले सामने आए थे, लेकिन अगले तीन महीने में यानी नवंबर, दिसबंर और जनवरी में बढ़कर दो करोड़ हो गए।

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आपको बता दें कि दुनिया के 46 देशों में हुए अध्ययन में बताया गया है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर से सबसे ज्यादा यूरोपियन देश प्रभावित हुए। ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, इटली, नीदरलैंड्स, स्पेन और स्वीडन में कोरोना की दूसरी लहर ने ज्यादा तबाही मचाई। इन देशों में चिकित्सीय व्यवस्था चरमरा गई। अस्पतालों में संक्रमितों को भर्ती करने के लिए जगह तक नहीं बची थी।

दुनिया के 46 देशों में मार्च से लेकर मई, 2020 तक पहली लहर में 2.20 लाख लोगों की मौत हुई। वहीं, अक्तूबर से दिसंबर के बीच इन्हीं देशों में मरने वालों की संख्या में करीब चार लाख लोगों का इजाफा हुआ। मतलब 6.20 लाख लोगों की मौत कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद हुई।

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गौरतलब है कि भारत में कोरोना वायरस के दूसरी लहर की भी शुरुआत हो गई है। फिलहाल, महाराष्ट्र में ही कोरोना वायरस की दूसरी लहर के संकेत मिले हैं, पर पूरे भारत में कोरोना वायरस के ऐसे ही भयावह हालात रहे, तो देश में बड़ी तबाही मचने की संभावना है। आपको बता दें कि भारत में कोविड-19 के एक दिन में 28 हजार, 903 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,14,38,734 हो गई। इस साल एक दिन में सामने आए यह सर्वाधिक मामले हैं।

स्पैनिश फ्लू ने भी करोड़ों की जान ली 

आपको बता दें कि स्पैनिश फ्लू और कोरोना वायरस ने 100 साल के अंतर पर दुनिया के करोड़ों लोगों की जान ली है। 1918 से 1920 तक स्पैनिश फ्लू की वजह से दुनिया भर में करीब 50 करोड़ संक्रमित हुए थे, जबकि पांच  करो़ड़ लोगों की मौत हुई थी। स्पैनिश फ्लू ने भी अपनी दूसरी लहर में ज्यादा कोहराम मचाया था।

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