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पढ़िए एक बाहुबली कैसे आया ‘अर्श से फर्श’ पर

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उन्नाव रेप केस मामले में पूर्व बीजेपी विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर को तीस हजारी कोर्ट द्वारा सोमवार को दोषी करार दिया गया। सेंगर ने जून 2017 में पीड़िता का अपहरण करके उसके साथ बलात्कार किया था। वारदात के वक्त पीड़िता नाबालिग थी। चार बार विधायक रहे सेंगर ने अपने करियर की शुरुआत ग्राम प्रधान से की थी।

ग्राम प्रधान से शुरु हुआ सेंगर का राजनीति करियर

कुलदीप सिंह सेंगर का राजनीतिक दौर ग्राम पंचायत से शुरू हुआ था। 1996 में उन्नाव के ‘माखी गांव’ के पहली बार ग्राम प्रधान बने सेंगर ने वर्ष 2002 की शुरुआत में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कुलदीप ने कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए मायावती की पार्टी बीएसपी का दामन थाम लिया। बीएसपी की टिकट पर सदर सीट से वो पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।

2002 में सेंगर ने थामा बीएसपी का दमान

चुनाव जितने के बाद कुलदीप सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र के साथ साथ दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी पहुंच बनानी शुरु कर दी। इसी के साथ कुलदीप लोगों में अपनी लोकप्रियता बढ़ाते गया और कुलदीप की लोकप्रियता बीएसी नेताओं में खटकने लगी और फिर मायावती ने सेंगर को पार्टी से निकाल दिया।

2007 में सेंगर का राजनीतिक सफर शुरु हुआ समाजवादी पार्टी के साथ

बीएसपी से अलग होने के बाद सेंगर का राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी के साथ शुरु हुआ, एसपी ने 2007 में बांगरमाऊ से टिकट दिया और सेंगर दूसरी बार चुनाव जीत गए। बांगरमऊ के बाद सेंगर को एसपी ने साल 2012 में भगवंत नगर से टिकट दिया और इस बार भी सेंगर चुनाव जीत गए। 2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत कर जिला पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी संगीता सेंगर को मैदान में उतार दिया। सपा में रहते हुए उन्होंने पार्टी के घोषित प्रत्याशी के खिलाफ पत्नी को न सिर्फ चुनाव लड़ाया बल्कि जीत भी हासिल कराई। और साल 2017 में ठीक विधानसभा चुनाव से पहले कुलदीप सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया।

बीजेपी को पहली बार बांगरमऊ से दिलाई जीत

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बांगरमऊ सीट से उम्मीदवार बनाया और सेंगर लगातार चौथी बार विधायक चुने गए। इससे पहले भाजपा कभी बांगरमऊ विधानसभा नहीं जीती। लेकिन सेंगर ने बीजेपी को यहां से जीत दिलाई।

2017 में युवती का अपहरण करने के बाद किया रेप

सेंगर ने 2017 में एक युवती का अपहरण करने के बाद उससे बलात्कार किया, उस वक्त युवती नाबालिग थी। अदालत ने सह आरोपी शशि सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए हैं। इस मामले के बाद अगस्त 2019 में बीजेपी से सेंगर को निष्कासित कर दिया गया था। अदालत ने नौ अगस्त को विधायक और सिंह के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, बलात्कार और पॉक्सो कानून से संबंधित घारोओं के तहत आरोप तय किए थे।

साक्षी महाराज को बताया गया सेंगर का करीबी

इसी साल (2019) में कुलदीप सिंह सेंगर के छोटे भाई मनोज सिंह सेंगर का दिल्ला का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। भाई के अंतिम संस्कार करने पहुंचे सेंगर के साथ बीजेपी सांसद साक्षी महाराज को देखा गया। जिसके बाद साक्षी महाराज पर सवाल खड़े होने लगे। अभी यह मामला थमा नहीं था कि साक्षी महाराज ने सेंगर के जन्मदिन पर बधाई देकर विवाद और खड़ा कर दिया। हालांकि, बाद में साक्षी महाराज ने जन्मदिन की बधाई वाला ट्वीट डिलीट कर दिया।

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