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एक टेस्ट में 100 रन बनाने और 10 विकेट लेने वाले पहले क्रिकेटर ऐलन का निधन, जानें कैसी रही जर्नी

Allen, the first cricketer to score 100 runs and take 10 wickets in a test, passed away ;  1950 के दशक के ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी ऐलन डेविडसन का 92 साल के उम्र में निधन। 44 टेस्ट मैचों में 20.53 की बेहतरीन औसत से 46 विकेट लिए थे।

By RNI Hindi Desk 
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नई दिल्ली : 1950 के दशक के ऑस्ट्रेलिया के मशहूर हरफ़नमौला खिलाड़ी ऐलन डेविडसन का 92 साल के उम्र में निधन हो गया। उन्होंने वेस्टइंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया के बीच ब्रिस्बेन में हुए टाई टेस्ट मैच की दोनों पारियों में पांच विकेट लिए थे और बल्ले से भी दोनों पारियों में 40 से अधिक का स्कोर खड़ा किया था।

उन्होंने 1953 से 1963 के दौरान 44 टेस्ट मैचों में 20.53 की बेहतरीन औसत से 46 विकेट लिए थे। 150 से अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में यह दूसरा सबसे कम औसत है। टेस्ट मैचों में उनके नाम पांच अर्धशतक है। इसके अलावा उनका प्रथम श्रेणी बल्लेबाज़ी औसत भी 32.96 का है।

वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ टाई हुए टेस्ट में उन्होंने 11 विकेट लिए थे और 124 रन बनाए थे। वह किसी टेस्ट में 10 विकेट और 100 रन का डबल बनाने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी थे। उनके बाद सिर्फ इयन बॉथम, इमरान ख़ान और शाकीब अल हसन ने यह उपलब्धि हासिल की है।

2012 में ईएसपीएन क्रिकइंफ़ो से इंटरव्यू में डेविडसन ने कहा था, “मैं दूसरी पारी में 80 रन बनाकर अच्छा खेल रहा था, लेकिन महत्वपूर्ण मौक़े पर ही रिची बेनो ने मुझे आउट करा दिया। तब मैच में दो ओवर बचे थे और हमें सात रन की ज़रूरत थी। उस ओवर में रिची ने तीन या चार गेंद खेल लिए थे। इसके बाद उन्होंने एक शॉट खेला और मैं रन लेने के लिए दौड़ पड़ा, लेकिन वे नहीं दौड़े और मुझे पवेलियन जाना पड़ा। मेरे आउट होने के बाद बेनो भी वेस हॉल के एक बॉउंसर पर विकेट के पीछे लपके गए और मैच अंततः टाई हुआ। यह मेरे करियर का सबसे दुखदायी मैच था।”

डेविडसन न्यू साउथ वेल्स में पैदा हुए थे और उन्होंने घर में बने पिच पर ही क्रिकेट खेलने की शुरुआत की थी। कुछ समय के बाद उनका परिवार सिडनी में बस गया। 1950 के दशक के अंतिम और 1960 के दशक के शुरुआती वर्षों में वह अपने करियर के चरम पर थे।

भारत के ख़िलाफ़ 1959 के कानपुर टेस्ट मैच में उन्होंने 12 विकेट लिए, जिसमें दूसरी पारी के दौरान 93 रन पर सात विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी प्रदर्शन है।

उन्होंने अपने करियर के अंतिम गेंद पर भी विकेट लिया था, यह मैच 1963 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला गया था। संन्यास लेने के बाद वह क्रिकेट प्रशासन में आए और 33 साल तक न्यू साउथ वेल्स के अध्यक्ष रहे। वह 1979 से 1984 तक ऑस्ट्रेलिया के चयनकर्ता भी रहे थे।

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