Home जरूर पढ़े 26/11 बरसी: 10 आतंकी, 174 मौतें, तीन दिन चला ऑपरेशन, जानें पूरी कहानी

26/11 बरसी: 10 आतंकी, 174 मौतें, तीन दिन चला ऑपरेशन, जानें पूरी कहानी

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26 नवंबर 2008, इस तारीख को कोई कैसे भूल सकता है, यह वही दिन है जब शाम होते ही मुंबई की सड़कों पर चीख-पुकार तेज होती चली गई, हर तरफ हहाकार मचा हुआ था, किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वो करें तो करें क्या, समंदर के रास्ते मुंबई पहुंचे जैश-ए-मोहम्मद के दस आतंकी, उनके रास्ते में जो आया उन्हें वो अपनी गोलियों से छलनी करते गए। जैसे- जैसे मुंबई में रात होती गई वैसे- वैसे हथियारों से लैस ये आतंकी दहशत फैलाते गए।

कराची से नाव के रास्ते मुंबई पहुंचे आतंकी

आतंक नाम आते ही सबकी जुबान पर पाकिस्तान का नाम आता है, और पाक से आए इन आतंकियों की शुरुआत तीन दिन पहले ही शुरु हो गई थी, 23 नवंबर को ये सारे आतंकी कराची से एक बोट के जरिए रवाना हुए थे। सबसे पहले इन आतंकियों ने भारतीय समुद्र में प्रवेश करते ही एक भारतीय नाव को अपने कब्जे में लिया और नाव पर सवार मछुआरे को मौत के घाट उतार दिया। मुंबई पहुंचते ही उन्होंने नाव पर मौजूद आखिरी भारतीय को भी मार दिया।

मुंबई पहुंचते ही छह अलग-अलग टुकड़ों में बंटे थे आतंकी

मुंबई पहुंचते ही ये आतंकी छह अलग-अलग टुकड़ों में बंट गए, इनका मकसद था ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान लेना। रात करीब 9.21 बजे छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में मौजूद लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू की। इस हमले को अजमल कसाब और स्माइल खान नाम के आतंकी ने अंजाम दिया था। यहां पर पहली बार CCTV में कसाब की तस्वीर कैद हुई थी। जिसमें उसके हाथों में AK-47 नजर आ रही थी और वो लगातार लोगों को अपना निशाना बना रहा था। उसके सामने जो भी आ रहा थी उसे वो गोलियों से भूनते जा रहा था। हर तरफ सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थी।

नरीमन हाउस पर हमला

छत्रपति शिवाजी टर्मिनल के दस मिनट बाद ही आतंकियों के दूसरे ग्रुप ने नरीमन हाउस बिजनेस एंड रेसीडेंशियल कॉम्प्लेक्स पर हमला कर दिया। यहां पर उन्होंने लोगों को बेहद ही करीब से गोली मारी थी। आतंकियों ने यहां की लिफ्ट को बम से उड़ा दिया और कई जगहों पर बम के धमाके किए। एक आतंकी ने इसके नजदीक एक गैस स्टेशन को बम से उड़ा दिया। इस धमाके की आवाज सुनकर जैसे ही लोग बाहर आए वैसे ही आतंकियों ने उनपर गोलियां चलानी शुरू कर दी।

आतंकियों पर मछुआरों को था शक

उन दिनों यह भी खबर आई थी कि, इन लोगों की हुलिया और गतिविधियों को देखकर कुछ मछुआरों को शक भी हुआ था और उन्होंने पुलिस को जानकारी भी दी। लेकिन इलाके की पुलिस ने इस पर कोई खास रिएक्शन नहीं दी और न ही आगे किसी बड़े अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

इन जगहों पर हुई थी गोलीबारी

शिवाजी टर्मिनल और नरिमन हाउस तक ही आतंक नहीं फैला था, इसके अलावा आतंकियों ने दक्षिणी मुंबई का लियोपोल्ड कैफे भी उन चंद जगहों में से एक था जो तीन दिन तक चले इस हमले के शुरुआती निशाने थे। यह मुंबई के नामचीन रेस्त्रांओं में से एक है, इसलिए वहां गोलीबारी में 10 विदेशी भी शामिल थे। इसके अलावां कई लोग घायल भी हुए।

तीन वो जगह जहां सबसे ज्यादा गईं जानें

26/11 का नाम जब भी आता है तो सबसे पहले लोगों के जेहन में ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस आता है। सबसे ज्यादा लोगों की जाने यहीं पर गई थी। हमले के वक्त ताज में 450 और ओबेरॉय में 380 मेहमान मौजूद थे। खासतौर से ताज होटल की इमारत से निकलता धुंआ तो बाद में हमलों की पहचान बन गया।

3 दिन तक जूझते रहे आतंकियों से सुरक्षा बल

लगातार तीन दिन तक आतंकवादियों से सुरक्षा बल जूझते रहे, इस दौरान, धमाके हुए, आग लगी, गोलियां चली और बंधकों को लेकर उम्मीद टूटती जुड़ती रही और ना सिर्फ भारत के लोगों की बल्कि दुनिया भर की नज़रें ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर टिकी रहीं। हमले के वक्त ताज में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर यूरोपीय संघ की संसदीय समिति के कई सदस्य भी शामिल थे, हालांकि इनमें से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

29 नवंबर की सुबह तक नौ हमलावरों को मार गिराया गया था और अजमल कसाब को गिरफ्तार कर लिया गया था। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ चुकी थी लेकिन लगभग 160 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी थी।

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