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पंजाब के बाद छत्तीसगढ़ में भी सीएम बदलने के आसार, जा सकती है बघेल की कुर्सी !

पंजाब के बाद छत्तीसगढ़ में भी मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने की संभावना है यानी की अब छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल की कुर्सी छिनी जा सकती है। इसका प्रमुख कारण पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी है। सूत्रों की मानें तो, राज्य के नेतृत्व में परिवर्तन हो सकता है और भूपेश बघेल की जगह किसी और को सीएम बनाया जा सकता है।

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : पंजाब के बाद छत्तीसगढ़ में भी मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने की संभावना है यानी की अब छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल की कुर्सी छिनी जा सकती है। इसका प्रमुख कारण पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी है। सूत्रों की मानें तो, राज्य के नेतृत्व में परिवर्तन हो सकता है और भूपेश बघेल की जगह किसी और को सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि इससे पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का खेमा एक्टिव हो गया है। वृहस्पति सिंह का दावा है कि 35 विधायक जल्द दिल्ली पहुंचेंगे और वे शीर्ष नेतृत्व से मिले बिना वापस नहीं लौटेंगे।

विधायकों का दिल्ली आना जारी

इस बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थक विधायकों का दिल्ली आना जारी है। आज शाम तक बेघेल समर्थक 35 विधायक दिल्ली में होंगे। बताया जा रहा है कि सभी विधायक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मिले बिना वापस नही लौटेंगे। टीएस सिंहदेव खेमे के विधायक के द्वारा रायपुर में दिए गए बयान के बाद भूपेश बघेल गुट के विधायक नाराज है। विधायक वृहस्पति सिंह कहना है कि बार-बार इस तरह के बयानों से जनता के बीच जाना मुश्किल है। जनता सवाल पूछती है।

ढाई-ढाई वर्ष के कार्यकाल की चर्चा

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद से लगातार चर्चा है कि मुख्यमंत्री पद ढाई—ढाई वर्ष तक बघेल और फिर राज्य के वरिष्ठ नेता एवं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को देने की बात हुई थी। ऐसे में ये विधायक बुधवार को दिल्ली पहुंचे हैं। विधायकों के दिल्ली पहुंचने के बारे पूछे जाने पर कांग्रेस के छत्तीसगढ़ मामलों के प्रभारी पीएल पुनिया ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उनसे अब तक किसी भी विधायक ने संपर्क नहीं किया है।

आलाकमान जो चाहेगा, वह सब मानेंगे

इस बारे में बघेल ने बृहस्पतिवार को रायपुर में संवाददाताओं से कहा था कि, ‘‘अब विधायक कहीं जा भी नहीं सकते क्या? हर कदम पर राजनीति नहीं देखनी चाहिए। कोई व्यक्ति अगर कहीं चला गया है तो उसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए।’’ सिंहदेव ने भी इसे तवज्जो नहीं देने की कोशिश करते हुए कहा था, ‘‘अब 70 के 70 जा सकते हैं। इसमें मुद्दा क्या है? अगर विधायक दिल्ली जाते हैं तो इसमें क्या मुद्दा है? उत्तर प्रदेश में कई दिनों तक यह सब चला। छत्तीसगढ़ में नया क्या हो रहा है?’’ उनके मुताबिक, सभी विधायकों की यह भावना है कि आलाकमान जो चाहेगा, वह हम सब मानेंगे।

बघेल और सिंहदेव के बीच रिश्ते सहज नहीं

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही बघेल और सिंहदेव के बीच रिश्ते सहज नहीं हैं। जून 2021 में मुख्यमंत्री पद पर बघेल के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के खेमे ने दावा किया कि आलाकमान ने ढाई—ढाई वर्ष बारी बारी से मुख्यमंत्री पद के लिए सहमति दी थी। राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए विवाद के बाद कांग्रेस आलाकमान ने विवाद को सुलझाने के लिए अगस्त में बघेल और सिंहदेव को दिल्ली बुलाया था। जब बघेल दिल्ली में थे तब कांग्रेस के 70 में से 54 विधायकों ने उनके समर्थन में दिल्ली का दौरा किया था।

राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिश

दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री बघेल ने संवाददाताओं से कहा था कि पार्टी नेता राहुल गांधी उनके निमंत्रण पर राज्य का दौरा करने के लिए सहमत हुए हैं। बघेल ने यह भी कहा था कि जो लोग ढाई—ढाई वर्ष मुख्यमंत्री पद की बात कर रहे हैं वह राज्य में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी में आलाकमान के साथ बैठक के बाद बघेल और सिंहदेव नेतृत्व के मुद्दे पर कुछ भी कहने से परहेज करते रहे हैं लेकिन राज्य में दोनों गुटों के मध्य विवाद कम नहीं हुआ।

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