Home उत्तराखंड प्राइवेट कॉलेजों ने बढ़ाई एससी-एसटी छात्रों की परेशानी

प्राइवेट कॉलेजों ने बढ़ाई एससी-एसटी छात्रों की परेशानी

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प्रदेश के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के अध्ययन के लिए निजी शिक्षण एवं व्यावसायिक संस्थानों में सरकार की ओर से तय की गई फीस की दरों का फैसला पलटने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ऐसा निजी शिक्षण संस्थानों के दबाव में करने जा रही है। सरकारी दरों पर दाखिला व ट्यूशन फीस से निजी शिक्षण संस्थानों को लाभ नहीं हो रहा है।

इसलिए शिक्षण संस्थानों ने सरकार को साफ कर दिया है कि उन्हें अपने हिसाब से शुल्क निर्धारण की इजाजत नहीं दी गई तो वे आगे से प्रवेश नहीं दे पाएंगे। अब समाज कल्याण विभाग के उस शासनादेश में संशोधन पर विचार हो रहा है, जिसमें सरकारी दरों पर शुल्क वसूली का प्रावधान है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो शासनादेश में संशोधन का प्रस्ताव प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में भी लाया जाएगा।

दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में घोटाला उजागर होने के बाद निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने कई संशोधन किए थे। वर्ष 2014 में तत्कालीन सचिव (समाज कल्याण) ने शासनादेश किया था, जिसमें निजी शिक्षण एवं व्यावसायिक संस्थानों में प्रवेश लेने वाले अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों की फीस की सरकारी दर तय की गई थी। प्रवेश के वक्त छात्र-छात्रा सरकार की ओर से तय फीस ही संस्थान में जमा करते हैं।

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