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UN में कश्मीर मुद्दे पर अकेला पड़ा पाकिस्तान

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नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र में ह्यूमन राइट्स हाई कमिश्नर की जनरल डिबेट के दौरान जब हाई कमिश्नर जेद राद अल हुसैन की लिखी रिपोर्ट को बहस के लिए रखा गया तब एशिया से अफगानिस्तान और भूटान समेत अफ्रीका, यूरेशिया और लैटिन अमेरिकी देशों ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए रिजेक्ट करने का फैसला किया। हालांकि इस रिपोर्ट पर बहस के दौरान पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में पर्मानेंट रिप्रेजेंटेटिव फारुख अमील ने पाकिस्तान की ओर से अपील की कि जम्मू-कश्मीर में ह्यूमन राइट्स के मामलों की जांच करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की समिति को भेजा जाए। हालांकि इस्लामिक देशों की तरफ से बोलते वक्त पाकिस्तान के रिप्रेजेंटेटिव अमील ने सिर्फ अपनी बात दोहराई। अमील ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की कश्मीर रिपोर्ट इशारा करती है कि ह्यूमन राइट्स संस्था को जम्मू-कश्मीर में अगला उपयुक्त कदम उठाने की जरूरत है।

आपको बता दें कि यूएन की इस रिपोर्ट पर पाकिस्तान के रुख के समर्थन में कोई देश सामने नहीं आया। वहीं रिपोर्ट को जहां एशियाई देशों में अफगानिस्तान और भूटान ने रिजेक्ट किया वहीं लैटिन अमेरिकी देशों में क्यूबा और वेनेजुएला ने रिपोर्ट को रिजेक्ट करने का फैसला लिया है। अफ्रीका से मॉरीशस और यूरेशिया से बेलारूस ने कश्मीर रिपोर्ट को रिजेक्ट किया है। इनके अलावा भी कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट को पेश करने के समय और तथ्यों पर सवाल खड़े किए।

ध्यान रहे कि 49 पेज वाली इस विवादित रिपोर्ट में कहा गया है कि लाइन ऑफ कंट्रोल के दोनों तरफ मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर मामले हैं। दरअसल यह मामला भारत के लिए इसलिए गंभीर हो जाता है क्योंकि मौजूदा समय में पाकिस्तान बतौर सदस्य ह्यूमन राइट्स काउंसिल में शरीक है वहीं भारत 2018 से लेकर 2020 तक काउंसिल से बाहर है। लिहाजा, यूएन में भारत के रिप्रेजेंटेटिव अशोक मुखर्जी का मानना है कि ह्यूमन राइट्स काउंसिल में किसी प्रस्ताव को प्रभावित करने में भारत की स्थिति पाकिस्तान से खराब है।

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