Home विचार पेज बहादुर बेटी को अब मिलेगा इंसाफ : निर्भया कांड की पूरी दास्तान

बहादुर बेटी को अब मिलेगा इंसाफ : निर्भया कांड की पूरी दास्तान

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हमारे शास्त्रों में कहा गया है की कन्या का दान महादान होता है और हर माँ बाप की ख्वाहिश होती है की उनकी बेटी का विवाह हो, उनकी बेटी को डोली में वो विदा करे लेकिन निर्भया के मां बाप का यह सपना अधूरा रहा गया।

किसी मशहूर कवि ने सच ही लिखा है की

“कोई बच्ची मेरे कमरे में जब गुड़ियों से खेलेगी
नज़र में ऐ मेरी बेटी वो तेरा रूप ले लेगी

तू जिन गलियों से गुज़री है गली वो याद आएगी
तेरे हाथों के सींचे फूल की ख़ुशबू रुलाएगी “

16 दिसम्बर 2012 की वो काली रात जब इतिहास के पन्नो में दर्ज इस तारीख ने देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। मामला 2012 से लगभग 2020 तक आ पंहुचा है, वो दिन एक ऐसा दिन था जब इंसानियत को तार तार कर देनी वाली वो घटना घटी थी, देश की आत्मा पर एक ऐसा बदनुमा दाग जो मिटाये नहीं मिटेगा।

16 दिसम्बर 2012 को क्या हुआ था ?

निर्भया उस दिन फिल्म देखने के बाद अब अपने पुरुष मित्र के साथ द्वारका लौट रही थी, उसे क्या पता था जिस बस में सवार थी वहां 6 हैवान उसका मानो इंतज़ार ही कर रहे थे और उन दरिंदो ने निर्भया के शरीर के साथ जो किया उसकी सजा तो शायद गरुड़ पुराण में भी नहीं होगी।

जिस देश में स्त्री को लक्ष्मी स्वरूपा माना जाता है उसी देश में उन हैवानो ने उस बेटी के शरीर को नोंच खाया और जब इससे भी उनका मन नहीं भरा तो एक आरोपी ने जंग लगी लोहे की रॉड निर्भया के प्राइवेट पार्ट में डाल दिया. इस हैवानियत की वजह से निर्भया की आंतें शरीर से बाहर निकल आईं.

उनका दिल अभी भी नहीं पसीजा था, उसके बाद वो उसे चलती बस से फ़ेंक गए, सफदरजंग अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत से वो अकेली लड़ी, 29, दिसम्बर तक भी जब उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उसे सिंगापुर भेजा गया जहां उस गुड़िया ने दम तोड़ दिया।

आरोपी कब गिरफ्तार हुए ?

इस दिल दहला देनी वाली घटना के बाद पुलिस ने 2 दिन बाद एक आरोपी को गिरफ्तार किया, आरोपी बस ड्राइवर का नाम था राम सिंह, पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने बाकी आरोपियों के नाम बताये तो उसके भाई मुकेश, एक जिम इंस्ट्रक्टर विनय गुप्ता और फल बेचने वाले पवन गुप्ता को गिरफ़्तार किया।

एक आरोपी ने की आत्महत्या –

ये घटना है 11 मार्च 2013 की जहां मामला कोर्ट में चल रहा था, पुलिस को मामले में 80 लोगों की गवाही भी मिली थी और सुनवाई भी लगातार जारी थी तभी आरोपी बस चालक ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली, हालांकि उनके परिवार के लोगो का मानना था की उसकी हत्या की गयी है।

कब हुई दोषियों को मौत की सजा –

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 10 सितंबर, 2013 को चारों बालिग आरोपियों को दोषी करार दिया और 13 सितंबर 2013 को उन्हें मौत की सजा सुनाई, इसके बाद उन्होंने इस निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी.

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 जनवरी 2014 को फैसला सुरक्षित रखा और 13 मार्च 2014 को निचली अदालत द्वारा चारों बालिग आरोपियों को सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा गया.

सुप्रीम कोर्ट में भी हुई सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपियों को जब मौत की सजा सुनाई तो उन्होंने बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च 2017 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और इस देश की उम्मीदों को ज़िंदा रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 को दोषियों की सज़ा बरकरार रखी।

वर्तमान में केस की स्थिति –

9 जुलाई 2018 को दोषियों की और से पुनर्विचार याचिका दाखिल की गयी जिसको की माननीय सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। वर्तमान में एक दोषी अक्षय ठाकुर ने कोर्ट में याचिका डाली है की उसे क्षमा किया जाए, उसने अपनी याचिका में लिखा है की वैसे भी दिल्ली में प्रदूषण के कारण जीवन छोटा होता जा रहा है तो ऐसे में उसे फांसी देने की जरूरत क्या ? लेकिन निर्भया की मां ने दया की मांग वाली याचिका का विरोध किया है.

आज कोर्ट अक्षय की दया याचिका पर सुनवाई करेगा लेकिन देश को इंतज़ार है उस पल का का जब निर्भया के गुनेहगार फांसी के फंदे पर झूलेंगे तभी हम देश की बहादुर बेटी निर्भया को इन्साफ दिला पायेगे।

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