1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. कोरोना महामारी के बीच यूपी के इस गांव में कहर बनकर टूटा ‘रहस्यमयी बुखार’, अब तक 100 लोगों की मौत

कोरोना महामारी के बीच यूपी के इस गांव में कहर बनकर टूटा ‘रहस्यमयी बुखार’, अब तक 100 लोगों की मौत

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : देश में जारी कोरोना महामारी के बीच लगातार ऐसे कई मामले सामने आ रहे है, जिसे सुनकर लोग हैरान है। उन्हें यकीन नहीं हो रहा की आखिर सरकार और स्वास्थ विभाग द्वारा लोगों के जागरूक करने के बाद भी ‘रहस्यमय बुखार’ से मौत के मामले सामने कैसे रहे है। गौरतलब है कि देश के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार फतेहपुर के यमुना तटवर्ती गांव ललौली में बीते एक महीने में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इन्हें गांव के 10 कब्रिस्तानों में इन्हें दफनाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि इन मौतों की वजह तेज बुखार और सांस फूलना था। किसी को कहीं इलाज नहीं मिला। 23 अप्रैल को सबसे ज्यादा 7 लोगों की मौत ने लोगों के दिलों को दहला दिया। आपको बता दें कि फतेहपुर जिले में 26 अप्रैल को पंचायत चुनावों के लिए मतदान होना था। जिले के बाकी क्षेत्रों की तरह यहां भी प्रचार के साथ संक्रमण का ग्राफ बढ़ रहा था। जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर बांदा हाइवे के किनारे बसी ललौली ग्राम सभा में जुकाम, बुखार और सांस फूलने की समस्या के रोगी बढ़े।

गांव के नव निर्वाचित प्रधान शमीम अहमद के मुताबिक, 10 अप्रैल को पहले मरीज की मौत हुई। लोगों ने इसे जुकाम बिगड़ने और तेज बुखार का केस मान नजरअंदाज कर दिया, लेकिन केस बढ़ते रहे। इसके बाद हर दिन 1-2 लोगों की इन लक्षणों के साथ मौत होने लगी। बीमारों को लेकर लोग सबसे पहले फतेहपुर जिला अस्पताल पहुंचते थे, लेकिन वहां इन्हें भर्ती नहीं किया जाता था। कानपुर और बांदा के अस्पतालों में भी इलाज नहीं मिला। कुछ पैरा-मेडिकल स्टाफ की मदद से ऑक्सिजन सिलिंडर जैसी चीजों का इंतजाम किया गया, लेकिन यह नाकाफी था।

शमीम के अनुसार, 23 अप्रैल का दिन गांव के लिए डरावना था। 7 लोगों के जनाजे उठे। 50 हजार की आबादी वाला कस्बेनुमा गांव कांप उठा। मुस्लिम बहुल आबादी में करीब 10 कब्रिस्तान हैं। यहां मृतकों की कब्रों की मिट्टी मामला ज्यादा पुराना नहीं होने की गवाही दे रही है। एक कब्रिस्तान में तो 30 शव दफनाए गए हैं।

परिवार के 4 लोगों की मौत

गांव के सूफियान कहते हैं कि 10 दिनों में उनके परिवार के 4 लोगों ने दम तोड़ दिया। किसी को कोई इलाज नहीं मिल सका। वह खुद भी बीमार हुए। काढ़ा पीकर लंबे संघर्ष के बाद उनकी तबीयत ठीक हुई। फैजान कहते हैं कि उनके चाचा को गले में दर्द और सांस लेने में तकलीफ के बाद मौत हो गई थी। लेकिन टेस्ट न होने से बीमारी के बारे में पता नहीं।

आपको बता दें कि गांव में ‘रहस्यमयी बुखार’ से आखिरी मौत 13 मई को हुई। बुखार और सांस फूलने से गुलाम हुसैन की पत्नी बिस्मिल्लाह ने दम तोड़ दिया। शकील का कहना है कि लोगों में जागरूकता की जबरदस्त कमी है। स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नदारद

बता दें कि गांव के लोगों के इलाज का जिम्मा नजदीकी अतिरिक्त पीएचसी पर है। जहां सिर्फ मोबाइल के जरिए इलाज की सुविधा कभी-कभार उपलब्ध है। केंद्र सुबह 8 से शाम 4 बजे तक खुलता है।

फतेहपुर की डीएम अपूर्वा दुबे ने बताया, ‘ललौली में कुछ दिनों में बीमारी से कई मौतों की सूचना मिली है। एसडीएम को जांच के लिए भेजा है। रिपोर्ट के बाद मौत की वजह पता चलेगी।’ वहीं ललौली के नवनिर्वाचित प्रधान शमीम का कहना है कि गांव में बुखार और सांस फूलने से एक महीने में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि मौत की वजह कोविड है।

अब सवाल यह उठता है कि इस तरह के मामले लगातार सामने आने के बावजूद भी वहां की प्रशासन और स्वास्थ विभाग शांत क्यों रहीं। उन्होंने तुरंत एहतियातन कोई कदम क्यों नहीं उठाया। अगर वे जल्द कोई कदम उठाते तो, शायद कुछ लोगों की जान बच सकती थीं।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...
RNI News Ads