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काला धन के मुद्दे पर मोदी सरकार का बड़ा यू-टर्न

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नई दिल्ली। स्विस नेशनल बैंक की रिपोर्ट सामने आने के बाद जहां विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर हो गया है। तो वही मोदी सरकार ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष को जवाब देने की ठान ली है। सरकार की तरफ से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोर्चा सभालते हुए अपने एक ब्लॉग के जरिए विपक्ष को जवाब दिया है। जेटली ने लिखा कि, ‘खबर आई है कि स्विस बैंक में भारतीयों के धन में बढ़त हो रही है और इसके बाद गलत प्रतिक्रियाएं फैल रही हैं जिनके आधार पर ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि सरकार के काले धन को रोकने की कोशिशों का कोई नतीजा निकल रहा है या नहीं। इसका जवाब मैं देना चाहूंगा।

उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड ने अपने घरेलू नियमों में संशोधन लाना शुरू किया है जिसके आधार पर उसने भारत के साथ भी संधि की है। इसके तहत भारतीयों द्वारा जमा किए गए पैसे के वास्तविक आंकड़े की सूचना वो हमारे साथ साझा करेगा। काले धन को जमा करने वाले को ये जान लेना चाहिए कि ये केवल कुछ महीनों की बात है जब काले धन वालों के नाम सामने आएंगे और उन्हें भारत में काले धन के निवारण के लिए बने कानूनों के तहत कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि स्व‍िस बैंकों में रखे पैसे की डिटेल साझा करने के लिए पहले तैयार नहीं था लेकिन बाद में वैश्विक दबाव की वजह से वह इसके लिए तैयार हुआ है। अब उसने उससे जानकारी मांगने वाले देशों को डिटेल देने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। 2019 से भारत को भी इसकी जानकारी मिलनी शुरू हो जाएगी।’

इसके बाद साफ हो जाता है कि केवल उन लोगों पर कार्रवाई करने की जरूरत है जो भारत में रहकर अपना पैसा विदेश में भेज रहे हैं। पैसा रखने वाले पहली दो श्रेणी के लोगों की जांच का अधिकार क्षेत्र उन देशों के पास है जिस देश के वो नागरिक हैं। तीसरी श्रेणी के नागरिकों की जांच भारत में आसानी से हो सकती है। अगर स्विस खातों में जमा पैसा इन श्रेणी में से किसी श्रेणी में नहीं आता है तो ये गैरकानूनी होगा और तब इनके खिलाफ जांच की जाएगी, गिरफ्तारियां होंगी और आपराधिक मुकदमों की शुरुआत की जाएगी।

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