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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, डिजिटल मीडिया पर कंट्रोल करना होगा, पढ़िए पूरा विवाद

By RNI Hindi Desk 
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सुदर्शन टीवी के एक विवादित प्रोग्राम के मामले में अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि टीवी से पहले डिजिटल मीडिया के लिए नियम और कानून बनाने होंगे।

रकार ने बताया है कि डिजिटल मीडिया जहरीली नफरत फैलाते हुए जानबूझकर न केवल हिंसा, बल्कि आतंकवाद को भी बढ़ावा दे रहा है. वेब आधारित डिजिटल मीडिया कई संस्थानों की छवि को को गंदा कर रहा है और और यह बेहद खतरनाक है।

इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा है कि वह मुख्यधारा के इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के नियमन के लिए कोई दिशा निर्देश तय नहीं करे।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को सुदर्शन TV के शो ‘UPSC जिहाद’ के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने इस पुरे मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि ऐसे किसी भी प्रोग्राम का प्रसारण करने की छूट नहीं दी जा सकती है।

टीवी डिबेट की तरीके पर भी कोर्ट ने आपत्ति जताई थी। इसके अलावा सुदर्शन न्यूज ने कहा है कि जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया आतंकी संगठनों और उससे जुड़े व्यक्तियों से आर्थिक मदद लेकर उससे संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षाओं के लिए एक समुदाय विशेष के युवकों की तैयारी कराता है।

सुदर्शन टीवी ने कहा है कि जकात फाउंडेशन को ब्रिटेन के मदीना ट्रस्ट, मुस्लिम एड जैसे संगठनों से 2009 से 2017 के बीच करोड़ों रुपये की आर्थिक मिली।

जाकिर नाइक से जुड़े संगठनों ने भी फाउंडेशन की मदद की। ये सभी संगठन और व्यक्ति किसी न किसी तरह से तालिबान, अल कायदा और तमाम आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। मदीना ट्रस्ट के दो ट्रस्टी के नाम संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल हैं।

उन्होंने यह भी बताया है कि जकात फाउंडेशन की वेबसाइट के मुताबिक साल 2009 से 2017 के बीच उसके यहां कोचिंग करने वाले 119 अभ्यर्थी आइएएस, आइपीएस और यूपीएसकी की अन्य सेवाओं के लिए चुने गए।

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