Home Breaking News अटल जयंती : जानिये अटल जी के महान व्यक्तित्व के बारे में

अटल जयंती : जानिये अटल जी के महान व्यक्तित्व के बारे में

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आज 25 दिसम्बर को स्वर्गीय भारत रत्न अटल जी की जयंती है जिस अवसर पर देश के PM समेत तमाम बड़े नेताओ में उन्हें याद किया है, देश की राजनीति को अपने जीवन के 40 साल देने वाले अटल बिहार जी उन गिने चुने नेताओ में से एक है जिनके सामने तो विपक्ष के नेता भी सिर झुकाते थे तो आज आइये जानते है अटल जी के महान व्यक्तित्व में।

उनका जन्म 25 दिसम्बर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था, अटल बिहारी वाजपेयी के पिता पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। उनकी मां का नाम कृष्णा बिहारी वाजपेयी था।

अटल जी की बी०ए० की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे.

अटल बिहारी वाजपेयी ने कानपुर से ही एल०एल०बी० की पढ़ाई भी शुरू की थी लेकिन उसे बीच में ही रोककर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गए, डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के सान्निध्य में अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक विचारधारा का विकास हुआ।

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बहुत कम लोगो को ये पता है की अटल जी ने पत्रकारिता भी की है, वो पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के संपादक भी रहे, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अगस्त 1942 में अंग्रेज सरकार ने इन्हे 23 दिन के लिए हिरासत में रखा था।

1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया था। वाजेपयी लखनऊ में चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर वह लोकसभा में पहुंचे।

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इस कार्यकाल में उनकी भाषणशैली से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भविष्यवाणी की थी कि एक दिन अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु के बाद 1968 में अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, 1975 से 1977 के बीच देश में लगे आपातकाल के दौरान अटल बिहारी बिहारी वाजपेयी कई बार जेल गए।

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1977 में कांग्रेस की जगह जनता पार्टी की सरकार बनी जिसके प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई और विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजेपेयी बने, विदेश मंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में संयुक्त राष्ट्र की महासभा को हिंदी में संबोधित किया।

संयुक्त राष्ट्र में पहली बार किसी ने हिंदी में भाषण दिया था। अटल बिहारी वाजपेयी इसे अपने जीवन का सबसे सुखद क्षण बताते हैं, 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी ने लाल कृष्ण आडवाणी, भैरों सिंह शेखावत के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की और वह बीजेपी के पहले अध्यक्ष भी बने।

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अटल बिहारी वाजपेयी जनता पार्टी सरकार के बाद बनी कांग्रेस सरकार के मुखर विरोधी रहे। उन्होंने पजांब में आतंकवाद का विरोध किया लेकिन साथ ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नीतियों को आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया।

अटल बिहारी वाजपेयी लोकसभा के लिए 9 बार चुने गए। 1962 से 1967 और 1986 में वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे, 1996 के आम चुनावों में वाजपेयी की अगुआई में बीजेपी लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।

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वाजपेयी ने देश के 10वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन वह सदन में बहुमत नहीं साबित कर सके और 13 दिनों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, उसके बाद 1999 से 2004 तक उन्होंने सभी गठबंधन के साथियो के साथ अपना कार्यकाल पूरा किया।

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2004 में बीजेपी लोकसभा चुनावो में अच्छा प्रदर्शन नहीं पायी और अटल जी राजनीति से लगभग दुरी बना ली, अटल जी के पूर्ण बहुमत के सपने को आखिरकार 2014 में नरेंद्र मोदी जी ने पूरा किया।

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