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नागरिकता संशोधन बिल का विरोध क्यों कर रहा है विपक्ष !

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आज मोदी सरकार की कैबिनेट मीटिंग हुई जिसमे NRC अमेंडमेंट बिल को पास कर दिया गया है जिसे अगले हफ्ते सदन में पेश किया जाएगा तो आइये जानते है की सरकार की इसके पक्ष में क्या दलील है और विपक्ष का कॉमन मुद्दों पर विरोध है !

क्या है सरकार की योजना –

1 – अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना।

2 – किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य है। इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल करना है।

3 – भारत के तीन पड़ोसी मुस्लिम बहुसंख्यक पकिस्तांन, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बनाना है।

दरअसल नागरिकता कानून, 1955 कहता है की अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिलेगी, अवैध प्रवासी वो है जो पासपोर्ट और वीजा के बगैर घुस आए  या फिर वैध दस्तावेज के साथ तो भारत में आए हों लेकिन तय समय से ज्यादा रुक जाए।

क्या कहता है नया कानून –

विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट अधिनियम 1920 के तहत उन्हें उनके देश भेजा जा सकता है , लेकिन केंद्र सरकार ने साल 2015 और 2016 में उपरोक्त 1946 और 1920 के कानूनों में संशोधन करके अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई को छूट दे दी।

विपक्ष का विरोध किस बात पर है –

दरअसल विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध इस बात पर है की इसमें मुस्लिमो को शामिल क्यों नहीं किया गया है ? विपक्ष का कहना है की खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है। उनका तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो समानता के अधिकार की बात करता है।

दूसरा विरोध आ रहा है पूर्वोत्तर के राज्यों से जिसमे यह बोला जा रहा है की अगर नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू किया गया तो पहचान का संकट खड़ा हो जायेगा और एक सामजिक असंतुलन खड़ा हो जाएगा।

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