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केदारनाथ आपदा के हुए पांच साल पूरे

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देहरादून। केदारनाथ आपदा को आज पांच साल पूरे हो गए। उस भीषण त्रासदी को याद करके आज भी लोग सिहर जाते हैं। सोलह व सत्रह जून को बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिलों में भारी तबाही मचाई। आपदा से उत्तराखंड को जान-माल की भारी क्षति हुई। इसके अलावा पर्यटन कारोबार की कमर टूट गई।

जानकारों का मानना है कि आपदा के जख्मों को पूरी तरह से भरने में अब भी कई साल लग जाएंगे। राहत और पुनर्निर्माण के मरहम से हालात सुधारने के प्रयास जारी हैं। मगर पर्यावरण सरोकारों से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकारों ने जख्म तो भरे हैं पर आपदा से सबक नहीं सीखा है। 16 जून 2013 की वह आपदा बेहद भीषण थी।

इस आपदा में 4,400 से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए। 4,200 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूट गया। इनमें 991 स्थानीय लोग अलग-अलग जगह पर मारे गए। 11,091 से ज्यादा मवेशी बाढ़ में बह गए या मलबे में दबकर मर गए। ग्रामीणों की 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई। 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया। 100 से ज्यादा बड़े व छोटे होटल ध्वस्त हो गए। यात्रा मार्ग में फंसे 90 हजार यात्रियों को सेना ने और 30 हजार लोगों को पुलिस ने बाहर निकाला। आपदा में नौ नेशनल हाई-वे, 35 स्टेट हाई-वे और 2385 सड़कें 86 मोटर पुल, 172 बड़े और छोटे पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए।

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