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उत्तराखंड: रानीखेत-अल्मोड़ा का मैदानी इलाकों से कटा संपर्क, यहां सिर्फ इमरजेंसी के लिए बचा ईंधन

उत्तराखंड में पिछले कई दिनो से लगातार बारिश हो रही है, जिस कारण आम लोगों का जीना मुहाल है। बारिश के कारण हुई भूस्खलन ने कई लोगों की जान ले ली। मिली जानकारी के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में 47 लोगों की मौत हुई है।

By RNI Hindi Desk 
Updated Date

रिर्पोट: अनुष्का सिंह

 

नई दिल्ली: उत्तराखंड में पिछले कई दिनो से हो रही लगातार बारिश ने, आम लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इस प्राकृतिक आपदा में 47 लोगों की मौत हो चुकी है। इस आपदा का असर कुमाऊं क्षेत्र पर काफी पड़ा है। उत्तराखंड के नैनीताल, हल्द्वानी, ऊधम सिंह नगर और चंपावत जिले में बारिश और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है। इनमें से 28 लोग नैनीताल और 6-6 लोगों की मौत अल्मोड़ा एवं चंपावत जिलों से हुई है। 1-1 शख्स की मौत पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर जिले में हुई है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में भी भारी बारिश के बीच भूस्खलन में 7 लोगों की मौत हुई है। अल्मोड़ा के रापड़ गांव में एक मकान भूस्खलन की चपेट में आ गया। इसमें चार लोगों की मौत हो गई। जबकि एक महिला को बचा लिया गया। जिसके बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पीएम मोदी ने बात की है। साथ ही वायुसेना को बचाव कार्य में लगाया गया है।

साथ ही आपको बता दे कि खैरना और कैंची में भूस्खलन के कारण आया मलबा अभी तक साफ नहीं हो पाया है।  जिसके चलते रानीखेत, अल्मोड़ा लगातार दूसरे दिन मैदानी इलाकों से पूरी तरह कटा हुआ है। भारी बारिश और भूसख्लन के चलते रानीखेत में ईंधन नहीं बचा है, केवल आपात सेवाओं के लिए आब ईंधन रखा गया है। बता दें कि 24 घंटे बाद लॉ वोल्टेज बिजली बहाल की गई। साथ ही बीएसएनएल फाइबर ऑप्टिक लिंक कई स्थानों पर कट गए हैं। भारी बारिश के कारण नैनीताल का भी संपर्क उत्तराखंड के दूसरे इलाकों से टूट गया था, लेकिन इसे अब बहाल कर दिया गया है। खराब मौसम और लगातार बारिश के बावजूद नैनीताल में बंद सड़कों को खोल दिया गया है, मलबे हटा दिए गए हैं और पर्यटक स्थल का संपर्क बहाल कर दिया गया है। फंसे हुए पर्यटक कालाधुंगी और हलद्वानी के रास्ते अपने घरों की ओर रवाना हो रहे हैं। खबर है कि नैनी झील उफान पर आ गई है, जिसकी वजह से भारी बारिश के बीच झील का पानी आसपास के इलाकों तक पहुंच गया।

गौरतलब है कि रामनगर से गार्जिया-अल्मोड़ा मार्ग धनगढ़ी रामनगर नाले में पानी के उफान के कारण बंद है। साथ ही भवाली से अल्मोड़ा मार्ग खैरना के पास मलवा आने से बंद है। हल्द्वानी से चोरगलिया, सितारगंज मार्ग गौला पुल की एप्रेचिंग साइड का बडा हिस्सा बह जाने से अवरूद्ध है। काठगोदाम से चोरगलिया, सितारगंज मार्ग शेरनाला में पानी के तेज बहाव के कारण अवरूद्ध है। भीमताल से पदमपुरी मार्ग विनायक के पास मलवा आने से अवरुद्ध है। नैनीताल रूसी बाईपास के पास मलवा आने से रूसी बाईपास सुखाताल मार्ग भी बंद है। खैरना से बेतालघाट मार्ग भी अवरुद्ध है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बारिश से बेहाल इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से बातचीत की और जानमाल के नुकसान का आकलन किया। बारिश में मारे गए लोगों के लिए बीजेपी सरकार ने 4-4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है। जिनका घर ध्वस्त हुआ है, उन्हें 1.10 लाख रुपये मिलेंगे। मवेशियों को मारे जाने पर भी क्षतिपूर्ति दी जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फोन पर सीएम धामी से आपदा से उपजे हालातों को लेकर चर्चा की है। केंद्र सरकार ने हरसंभव मदद का भरोसा भी दिया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य में पहले से ही जुटी है।

उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के मुताबिक, नैनीताल के काठगोदाम, लालकुआं और ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में सड़क, पुल और रेल पटरियों को भारी नुकसान पहुंचा है। खराब हुईं रेल पटरियों को ठीक करने में कम से कम 4-5 दिन लगेंगे औऱ तब तक यहां ट्रेनों का परिचालन नहीं हो सकेगा। हल्द्वानी और नैनीताल जिलों के हालातों को लेकर सीएम ने देर रात उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी की थी. धामी ने कहा है कि जानमाल के नुकसान के आकलन के साथ सड़कें, पुल और आवागमन के अन्य रास्तों को बहाल करने का काम तेज कर दिया गया है।

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