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ये जनता की असली ताकत, मोदी सरकार के सामने हाथ फैलाने पर मजबूर हुआ चीन

This is the real power of the people, China was forced to spread its hands in front of the Modi government; इस दिवाली चीन को हुआ बड़ा नुकसान। चीन को कुल 50 हजार करोड़ रूपये का नुकसान हुआ।

By RNI Hindi Desk 
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नई दिल्ली : अगर किसी देश को तोड़ना हो तो उसके अर्थव्यवस्था पर चोट मारों, वह खुद-बखुद ही टुट जाएगा। ऐसा इसलिए कह रहा हुं क्योंकि इन दिनों चीन की स्थिति कुछ ऐसी ही हो गयी। दरअसल भारतीय त्योहार में चीन की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो जाती थी, लेकिन हाल के वर्षों में ये जनता की ताकत जिससे चीन को हाथ फैलाने पर मजबूर कर दिया है।

एक अकेला इंसान कुछ कर नही सकता है लेकिन अगर सब लोग एक हो जाये तो फिर चीजें अपने आप में बहुत ही सरल हो जाती है और उनका प्रभाव भी देखने को मिलने लगता है। हर कोई जानता है कि भारत की जनता की ताकत भी इसी कारण से है और यही ताकत का एहसास इन दिनों में जिनपिंग की सरकार देखने को मिल रहा है। अभी बात दीवाली के अवसर पर देखने को मिला।

अभी हाल ही में भारत में जो दिवाली मनी है उसमे चीन को बड़ा नुकसान हुआ है। अनुमानित तौर पर इस बार चीन को कुल 50 हजार करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है और अभी तो फेस्टिवल सीजन जनवरी तक चलने वाला है तो ये 80 हजार करोड़ तक जा सकता है क्योंकि उसके सामान भारत में पहले की तरह बिक नही पा रहे है। बता दें कि 2020 में भी चीन को सीधे तौर पर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का व्यापार घाटा हुआ था।

अभी हाल ही में चीन के सरकारी अखबारो में एक खबर प्रकाशित की गयी है जिसमे ये कहा गया है कि मोदी सरकार को चीन विरोधी नीतियों से कोई ख़ास फायदा नही हो रहा है इसलिए अब उन्हें भूल जाना चाहिए और चीन के साथ में फ्री ट्रेड अग्रीमेंट भी करना चाहिए ताकि दोनों देश आगे बढ़ सके। एक तरह से वहां की सरकार भारत सरकार से चीन से दोस्ती बढाने के लिए हाथ फैलाते हुए ही नजर आ रही है।

ये अभी चल रहे मेक इन इंडिया केम्पेन का प्रभाव नजर आता है जिसके कारण से पहली बार भारत ने इस हद तक जाकर के आत्मनिर्भर दिवाली मनाई है। गोबर के दीये मिट्टी के दीपकों से भी दस रुपये प्रति सैकड़ा सस्ते थे। इस दीवाली गाय के गोबर से बने दीपकों से गंगा के आंचल को सजाया गया। सिर्फ घाटों को ही नहीं, इस बार घर-आंगन में इन्हीं दीयों से रोशनी जगमग उठी। बाजार में भी गोबर के दीपकों की मांग बढ़ गई है। इसका कारण सस्ते होने के साथ ही पर्यावरण के लिहाज से इनका उपयुक्त होना है। इसके जरिए महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।’धीरे धीरे करके चीनी समान को अपने दिवाली की सजावट आदि से बाहर कर दिया है जो अपने आप में एक उभरते हुए भारत का चिन्ह है।

फ़िलहाल भारत दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट बनने की तरफ उभर रहा है और चीन इन दिनों में अपने इस बाजार को लगातार खोने को लेकर के काफी अधिक हताश नजर आ रहा है।

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