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जम्मू-कश्मीर को लेकर करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक, जानिए किन मुद्दों पर हुआ चर्चा, क्या है पीएम मोदी का प्लान

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में गुरुवार को करीब साढ़े तीन घंटे पीएम आवास पर जम्मू-कश्मीर मसले को लेकर चली बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुए। शाम 6:30 बजे के करीब यह बैठक खत्म हुई। बता दें कि इस बैठक में जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा, धारा-370, लोकतंत्र स्थापित करने के लिए विधानसभा चुनाव,कश्मीरी पंडितों का जम्मू कश्मीर में पुनर्वास, सभी राजनैतिक कैदियों की रिहाई और डोमिसाइल जमीन की गारंटी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुए। इस बैठक में पीएम मोदी समेत कई अहम नेता इस बैठक में शामिल हुए।

बैठक की 10 बड़ी बातें

‘दिल की दूरी’ और ‘दिल्ली की दूरी’ को खत्म करना चाहते हैं पीएम मोदी

इस बैठक में पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा कि वो ‘दिल की दूरी’ और ‘दिल्ली की दूरी’ को खत्म करना चाहते हैं। बैठक के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत एक मेज पर बैठने और विचारों का आदान-प्रदान करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि मैंने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा है कि लोगों को, खासकर युवाओं को जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक नेतृत्व देना है और यह सुनिश्चित करना है कि उनकी आकांक्षाएं पूरी हों। जम्मू-कश्मीर के नेताओं संग बैठक के बाद पीएम मोदी ने कई तस्वीरें भी ट्वीट की।

कांग्रेस ने रखी पांच मांगें

कांग्रेस नेता व पूर्व  मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने बताया कि हमने बैठक में केंद्र के सामने पांच मांगें रखी हैं। जिनमें  कश्मीर को राज्य का दर्जा, फिर से लोकतंत्र स्थापित करने के लिए विधानसभा चुनाव,कश्मीरी पंडितों का जम्मू कश्मीर में पुनर्वास, सभी राजनैतिक कैदियों की रिहाई,डोमिसाइल जमीन की गारंटी शामिल है।

महबूबा मुफ़्ती ने उठाया धारा 370 का मुद्दा

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि मैंने बैठक में पीएम से कहा कि अगर आपको धारा 370 को हटाना था तो आपको जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को बुलाकर इसे हटाना चाहिए था। इसे गैरकानूनी तरीके से हटाने का कोई हक नहीं था। हम धारा 370 को संवैधानिक और क़ानूनी तरीके से बहाल करना चाहते हैं।

गृह मंत्री ने दिया पूर्ण राज्य बहाली का भरोसा

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि ‘आज की मीटिंग में हमने कहा कि  पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म नहीं किया जाना चाहिए था। हमने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की। इससे पहले हमें आश्वासन मिला था। गृह मंत्री अमित शाह ने भरोसा दिया कि पूर्ण राज्य का दर्जा जरूर बहाल होगा लेकिन पहले परिसीमन हो जाए।

महबूबा मुफ्ती के बयान से फारूक ने बनाई दूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग से पहले फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कोई एजेंडा नहीं है, हम अपनी बात रखेंगे और पीएम-गृह मंत्री से बात करेंगे, ताकि रियासत में शांति आए। फारूक ने कहा कि हमारे चाहने का सवाल नहीं है, चाहते तो हम आसमान हैं। पहले हम पीएम मोदी से बात करेंगे, बाद में मीडिया से बात करेंगे।

विधानसभा चुनाव कराने पर जोर

इस बैठक का मुख्य केंद्र जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना था। बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि हम जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सफलतापूर्वक संपन्न हुए डीडीसी चुनाव की तरह ही विधानसभा चुनाव कराना हमारी प्राथमिकता है।

कश्मीर के मसले पर किसी अन्य देश से बातचीत नहीं

बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में जिला पंचायत को आधुनिक बनाने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर आंकड़े पेश किए। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि कश्मीर में जिन कैदियां पर गंभीर और आपराधिक मामले दर्ज नहीं हैं, सरकार उन्हें जल्द रिहा करेगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी मुल्क के साथ कश्मीर मसले पर बातचीत शुरू नहीं की जाएगी।

बैठक में की गई पांच मांगें

सर्वदलीय बैठक में पांच अहम मांगें की गईं। इनमें जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा, विधानसभा चुनाव, डोमिसाइल पर गारंटी, कश्मीरी पंडितों को वापस बसाया जाए। राजनीतिक कैदियों की रिहाई हो।

कई बड़े नेता बैठक में हुए शामिल

आपको बता दें कि धारा 370 को हटाए जाने के करीब दो साल के बाद केंद्र सरकार की ओर से राज्य के नेताओं के साथ ये बातचीत की गई है। नई दिल्ली में PM आवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई इस बैठक में फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद, रविन्द्र रैना, कवींद्र गुप्ता, निर्मल सिंह, सज्जाद लोन, भीम सिंह समेत अन्य कई नेता शामिल रहे। इस मीटिंग में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, NSA अजीत डोभाल, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अलावा केंद्र के अन्य कई अफसर भी मौजूद थे।

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