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SC में शिवसेना, एनसीपी औऱ कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई।

By RNI Hindi Desk 
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महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार सुबह-सुबह जो कुछ भी हुआ वह किसी ड्रामें से कम नहीं था। बीजेपी ने महाराष्ट्र में सरकार बनाते हुए सभी को हैरान कर दिया था। जिसके बाद दिनभर महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में काफी उठापटक हुई। शनिवार को हुए ड्रामें के बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने देर रात सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के फैसले को राज्यपाल से रद्द करने का अनुरोध किया था। इसके साथ ही विधायकों की खरीद- फरोख्त को रोकने के लिए तुरंत ही शक्ति परीक्षण कराने का भी अनुरोध किया है।

कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ आज सुनवाई है। तीनों ही पार्टियों ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए उन्हें आमंत्रित करने का राज्यपाल कोश्यारी को निर्देश देने की भी मांग की है। साथ ही कहा गया है कि उनके पास 144 से ज्यादा विधायकों का समर्थन है।

इस पूरे मामले में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल ने भेदभावपूर्ण व्यवहार किया है औऱ बीजेपी द्वारा सत्ता पर कब्जा किए जाने में उन्होंने खुद को मोहरा बनने दिया। तीनों ही दलों ने 24 घंटे के भीतर शक्ति परीक्षण करने का भी अनुरोध किया है। जिससे विधायकों की खरीद- फरोख्त कर किसी भी तरह से सत्ता हासिस करने के अवैध प्रयासों को रोका जा सके।

तीनों दलों की तरफ से वकील सुनीव फर्नांडिस ने दायर याचिका में कहा है कि, राज्यपाल ने जो किया है उससे पद की गरीमा का मजाक बन गया है। इसमें कहा गया है कि 23 नवंबर को शपथ ग्रहण करना केंद्र में सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर राज्यपाल का काम करना सटीक उदाहरण है।

फर्नांडिस के जरिए दायर याचिका में दावा किया गया है कि, बीजेपी ने अल्पमत वाली सरकार बनवाने का राज्यपाल का कार्य अवैध और असंवैधानिक है। इसमे कहा गया है कि शिवसेना, एनसीपी औऱ कांग्रेस गठबंधन के पास 288 सदस्यीय विधानसभा में संयुक्त रूप से स्पष्ट बहुमत है औऱ यह स्पष्ट है कि बीजेपी के पास 144 विधायकों का जरूरी आंकड़ा नहीं है। याचिका में कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने एक अलग याचिका दायर कर राज्यपाल को यह निर्देश देने की मांग की है कि वह विधायकों के शपथ लेने और शक्ति परीक्षण के लिए विशेष सत्र को बुलाए।

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