1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. शाह-मात के खेल में शरद पवार निकले महाराष्ट्र के ‘चाणक्य’।

शाह-मात के खेल में शरद पवार निकले महाराष्ट्र के ‘चाणक्य’।

By RNI Hindi Desk 
Updated Date

महाराष्ट्र में सत्ता को लेकर शुरू हुए सियासी दंगल में मराठा राजनीति के दिग्गज शरद पवार चाणक्य बन कर उभरे हैं। पिछले एक महीने से महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर कवायदें चल रही है। राज्य में सत्ता के इस सियासी खेल में एनसीपी नेता शरद पवार ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के सर्जिकल स्ट्राइक पर जबरदस्त डिफेंस दिया है। शरद पवार ने ना सिर्फ देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया बल्कि पवार ने यह भी साबित कर दिया की शाह भले ही देश की राजनीति में चाणक्य की हैसियत रखते हों, लेकिन महाराष्ट्र के असली चाणक्य वही हैं।

दरअसल 23 नवंबर को एनसीपी चीफ शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने अपने चाचा से विद्रोह कर बीजेपी से हाथ मिला लिया था। इसके बाद अजित पवार महाराष्ट्र के डेप्युटी सीएम की शपथ भी ले ली थी। इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी क्षमता को साबित किया था, कि भले ही उनके पास पूर्ण बहुमत नहीं हो लेकिन सरकार बनाने को लेकर किसी भी हद तक जा सकते हैं।

बीजेपी के इसी अटैक का शरद पवार ने जोरदार जवाब दिया और सियासी मैदान में बीजेपी को चारो खाने चित कर दिया। अजित पवार मान गए और उन्होंने उप मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि, उनके पास पर्याप्त बहुमत नहीं है यही वजह है कि वो इस्तीफा दे रहे हैं।

दरअसल ये पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ जब महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को उनके उम्मीदों के मुताबिक सीटें नहीं मिली। बस फिर क्या था शिवसेना को मौका मिल गया और उसने महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद ढाई- ढाई साल में बांटने और मंत्रालयों में 50 फीसदी के अनुपात में बांटने पर जोर देना शुरू कर दिया। शिवसेना के इस कदम के बाद अमित शाह ने फैसला किया कि इस पर कोई समझौता नहीं होगा और सरकार बनाने की होड़ में खुद को पीछे कर लिया।

दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव में मात खाने के बाद शरद पवार ने महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में अच्‍छी वापसी की। एनसीपी ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से 10 सीटें ज्‍यादा जीतीं जो उसके लिए संतोषजनक रहा। लेकिन शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे की महत्‍वाकांक्षाओं ने अगर सिर नहीं उठाया होता तो शरद पवार सत्‍ता की दौड़ से बाहर रहते। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी बनी कि एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभानी पड़ी। लेकिन इसके बाद बीजेपी ने शरद पवार के मंसूबों पर पानी फेर दिया और शरद पवार के भतीजे को तोड़ दिया।



उधर, अमित शाह शिवसेना को सबक सिखाने के लिए मन बना चुके थे। इन सबके बीच शाह और शरद पवार के बीच सीटों के लिए सियासी जंग शुरू हो गई है। हालत यह हो गई कि बहुमत के जादुई आंकड़े के लिए दोनों ही खेमों की धड़कनें थमी हुई थीं। शाह के पास सत्‍ता में रहने का फायदा था लेकिन एनसीपी विधायकों को शरद पवार के कद को अनदेखा करना बहुत मुश्किल हो गया। शरद पवार अपने लगभग सभी बागी विधायकों को साथ लाने में कामयाब रहे और अं‍त में उन्‍होंने विद्रोह का बिगुल बजाने वाले अजित पवार को भी मनाने में सफलता हासिल कर ली।

इस पूरे घटनाक्रम को अगर देखा जाए तो अजित पवार के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही उनकी फैमली के तमाम लोग उनसे बातचीत कर रहे थे। परिवार में बिखराव नहीं हो और पार्टी में  अजित को बने रहने के लिए मनाने की लगातार कोशिशें हो रही थी। सुप्रिया सुले के पति ने भी अजित से संपर्क किया था औऱ उनसे मुंबई के एक होटल में मुलाकात की थी। इतना ही नहीं खुद शरद पवार औऱ उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने भी अजीत से बात की और पार्टी तथा परिवार को साथ देने के लिए मनाया गया। अजित को मनाने में शरद पवार की पत्नी का भी अहम योगदान रहा है। 

परिवार के दबाव का ही असर था कि सोमवार को फडणवीस की बैठक में अजित की कुर्सी खाली नजर आई। ऐसी खबरे भी थी की शरद पवार ने अजित से कहा था कि वह माफ करने को तैयार हैं लेकिन पहले इस्तीफा देना होगा औऱ आखिरकार अजित पवार को इस्‍तीफा देना पड़ा।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...