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कर्ज के बोझ के तले दबा महाराष्ट्र, कैसे पार लगेगी नैया?

By RNI Hindi Desk 
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महाराष्ट्र में महीनों से चल रहा सियासी उठापठक आखिरकार समाप्त हो गया है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र की सत्ता की कमान संभाल चुके हैं। राज्य को चलाने के लिए शिवसेना- कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाया है। जिसके तहत अगले पांच सालों तक महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार को चलाया जाएगा। महाविकास अघाड़ी ने किसानों के साथ-साथ आम जनता की स्थिति को सुधारने के लिए ढेरों वायदे किए हैं।

अगर विश्लेषकों की मानें तो 4.7 लाख करोड़ रूपये के कर्ज के बोझ के तले दबी महाराष्ट्र की सरकार को इस वायदे को पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। ऐसा हो सकता है कि उद्धव ठाकरे पीएम मोदी से मिलकर आर्थिक पैकेज की मांग कर सकते हैं।

महा विकास अघाड़ी ने सत्ता संभालने से पहले ही साफ कर दिया था कि उनका फोकस आपदा से जूझ रहे किसानों पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा। बाढ़ औऱ बेमौसम की मार से प्रभावित किसानों के कर्ज की माफी की जाएगी। जानकारों की अगर मानें तो किसान कर्जमाफी के लिए महाराष्ट्र की सरकार को करीब 50 हजार करोड़ रूपये का खर्च करना होगा। क्योंकि कर्ज के संकट से जूझ रही महाराष्ट्र सरकार को बिना केंद्रीय मदद के इतना पैसा जुटाना मुश्किल का काम है।

दूसरी तरफ शिवसेना ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि 300 यूनिट से कम बिजली का इस्तेमाल करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर में 30 फीसदी की कमी की जाएगी। हलांकि शिवसेना के इस वादे को सीएमपी में जगह नहीं मिल पाई। क्योंकि महाराष्ट्र स्टेट एनर्जी कंज्यूमर संघ के प्रताप हेगडे ने इस पर नाखुशी जताई है। उन्होंने कहा है कि नलकूप के लिए किसानों को काफी बिल देना पड़ रहा है।

देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने वादा किया था कि वह इसे सही करेगी लेकिन कुछ नहीं हुआ। नई सरकार को इसे तत्काल देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में पड़ोसी राज्यें की अपेक्षा महाराष्ट्र में 25 फीसदी ज्यादा बिजली बिल लिया जाता है। इसी कारण कई उद्योग राज्य से बाहर चले गए हैं।

सीएमपी में एक रूपये में महाराष्ट्र में सभी तालुका के अंदर पैथलॉजी टेस्ट करवाने की सुविधा देने का वादा किया है। इस वादे पर महाराष्ट्र के इंडियन मेडिकल असोसिएशन के पूर्व सचिव डॉक्टर सुहास पिंगले ने कहा कि, बिना बजटीय सहायता के इस तरह का वादा केवल छलावा है।  

हाल ही में आरे के जंगलों के काटने पर विरोध प्रदर्शन करने वाली शिवसेना अपने पार्यावरण के मुद्दे पर चुप है। पर्यावरण कार्यकर्ता सत्यजीत च्वहाण ने कहा कि, हम आशा करते हैं कि जिन मुद्दों को हमने उठाया है, उनके साथ सरकार की नीतियां न्याय करेंगी।

शुक्रवार को शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में लेख लिखा गया है जिसमें पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस पर महाराष्ट्र पर कर्ज लादने का आरोप लगाया गया है। सामना में कहा गया है कि पांच साल में राज्य पर पांच लाख करोड़ का कर्ज लादकर फडणवीस सरकार चली गई है। इसलिए नए मुख्यमंत्री ने जो संकल्प लिया है, उसपर सावधानीपूर्वक कदम रखना होगा। पीएम मोदी ने उद्धव ठाकरे को शुभकामनाएं देने के साथ-साथ कहा कि उद्धव के नेतृत्व में महाराष्ट्र विकास की तीव्र गति से विकास करेगी।

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