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देश-दुनिया के इतिहास में आज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, पढ़ें

इतिहास से अच्छा शिक्षक कोई दूसरा हो ही नहीं सकता. इतिहास सिर्फ अपने में घटनाओं को नहीं समेटे होता है बल्कि इन घटनाओं से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। हर गुजरता दिन इतिहास में कुछ घटनाओं को जोड़कर जाता है। ब्रिटिश सेना के साथ युद्ध करने के बाद 1858 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई झांसी से निकलकर काल्पी पहुंची और बाद में ग्वालियर की ओर चली गई।

By RNI Hindi Desk 
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इतिहास से अच्छा शिक्षक कोई दूसरा हो ही नहीं सकता. इतिहास सिर्फ अपने में घटनाओं को नहीं समेटे होता है बल्कि इन घटनाओं से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। हर गुजरता दिन इतिहास में कुछ घटनाओं को जोड़कर जाता है। ब्रिटिश सेना के साथ युद्ध करने के बाद 1858 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई झांसी से निकलकर काल्पी पहुंची और बाद में ग्वालियर की ओर चली गई।

1857 की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 18 नवम्बर 1828 को तथा निधन 18 जून 1858 को हुआ था– सती होने से अच्छा है नारी शस्त्रु से युद्ध भूमि में प्राण दे रानी लक्ष्मीबाई भारतीय इतिहास वर्तमान और भविष्य के लिए सदा प्रेरणापुंज रहेगी। उत्तरी अटलांटिक सैन्य संगठन नाटो  की 4 अप्रैल1949 में स्थापना हुई जो शीतयुद्ध के शुरुआती दौर का नतीजा थी। वर्तमान में इसके 29 सदस्य देश हैं।

नाटो से सबसे बाद में जुड़ने वाले देश हैं; अल्बानिया और क्रोएशिया हैं. इन दोनों ने वर्ष 2009 में नाटो की सदस्यता ग्रहण की थी। नाटो का मुख्यालय ब्रसेल्स, बेल्जियम में है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूर्व के सोवियत संघ ने पूर्वी यूरोप से अपनी सेनाएँ हटाने से इंकार कर दिया और अंतर्राष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन कर 1948 में बर्लिन की नाकेबंदी कर दी।

सोवियत संघ के इस कदम से अमेरिका सहित यूरोप के देशों को लगा कि सोवियत संघ वहाँ साम्यवादी शासन की स्थापना करना चाहता है। इसलिए अमेरिका ने एक ऐसा संगठन बनाने की पहल की जो कि सोवियत संघ के अतिक्रमण से पश्चिमी देशों की रक्षा कर सके आज भी नाटो के सदस्य देशों के अधिकारी, आम नागरिक और सैन्य विशेषज्ञ रोजाना सैन्य और राजनीतिक मुद्दों पर जानकारी देने और सलाह मशविरा और आवश्यकतानुसार निर्णय तैयार करने में मदद मांगने के लिए के लिए रोजाना नाटो के हेड ऑफिस में जाते हैं।

4 अप्रैल को जन्मे व्यक्ति मशहूर हिन्दी कवि, लेखक, नाटककार और पत्रकार माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल  1889 को मध्य प्रदेश में हुआ था । पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की ख्याति एक लेखक,कवि और वरिष्ठ साहित्यकार के रूप में हैं  लेकिन वो एक स्वतन्त्रता सेनानी भी थे.इसके अलावा उनकी पहचान एक जागरूक और कर्तव्यनिष्ठ पत्रकार की भी थी। इस वजह से ही उनके नाम पर पत्रकारिता को समर्पित एशिया की पहली यूनिवर्सिटी माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन का नाम रखा गया।

माखनलाल पंडितजी के नाम से भी विख्यात है। माखनलाल चतुर्वेदी को ब्रिटिश राज के दौरान स्वतंत्रता के लिए चलने वाले विभिन्न आंदोलनों में दिए योगदान के कारण भी याद किया जाता हैं। इसके अलावा उनकी रचनाए “पुष्प की अभिलाषा: और  हीम-तरंगिनी आज भी उतनी ही प्रसिद्द हैं जितनी उस समय थी, जब इसकी रचना हुई थी। वो भारत के स्वतन्त्रता के लिए कई बार जेल भी गए थे,लेकिन स्वतन्त्रता के बाद उन्होंने सरकार में कोई पद लेने से मना कर दिया।

वो स्वतंत्रता से पहले और बाद में भी लगातार कई समय तक सामाजिक अन्याय के विरुद्ध लिखते रहे,और महात्मा गाँधी के दिखाए सत्य अहिंसा और मार्ग पर चलते रहे. उनकी कविताओं में भी देश के प्रति समर्पण और प्रेम को देखा जा सकता है 4 अप्रैल को हुए निधन हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय का 4 अप्रैल 1987 में निधन हुआ था । अज्ञेय ने छह वर्ष जेल और नज़रबंदी भोगने के बाद 1936 में कुछ दिनों तक आगरा के समाचार पत्र सैनिक के संपादन मंडल में रहे, और बाद में 1937-39 में विशाल भारत के संपादकीय विभाग में रहे। कुछ दिन ऑल इंडिया रेडियो में रहने के बाद अज्ञेय 1943 में सैन्य सेवा में प्रविष्ट हुए। 1946 में सैन्य सेवा से मुक्त होकर वह शुद्ध रुप से साहित्य में लगे।

मेरठ और उसके बाद इलाहाबाद और अंत में दिल्ली को उन्होंने अपना केंद्र बनाया भारत की प्रसिद्ध समाजसेवी, स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद हंसा मेहता का 4 अप्रैल 1995 में निधन हुआ था ।

4 अप्रैल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1905 – कांगड़ा घाटी में आए भूकंप में 20,000 लोगों की जाने गईं थी।

 

1949 – उत्तरी अटलांटिक सैन्य संगठन (NATO) की स्थापना हुई जो शीतयुद्ध के शुरुआती दौर का नतीजा थी।

 

1979 – पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फ़ाँसी।

 

1994 – तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा द्वारा तिब्बती बालक उग्येन थिनली दोरजी को नये कर्मापा के रूप में घोषणा।

 

1997 – क्रयशक्ति की क्षमता की दृष्टि से विश्व बैंक ने भारत को विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश घोषित किया।

 

2001 – चीन का अमेरिका विमान व चालक दल लौटाने से इन्कार, फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति एरुत्रादा के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाखिल।

 

2004 – भारत-नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर माओवादियों ने 18 भारतीय तेल टैंकरों में आग लगाई।

 

2006 – ईराक के अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर नये आरोप लगे।

 

2008 – दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने भाजपा सदस्यता स्वीकार किया। पाकिस्तान की नई सरकार ने सेना के ख़ुफिया प्रमुख के पद से मेजर जनरल नदीम को हटाया।

 

2010 – माओवादियों द्वारा किए गए उड़ीसा, भारत के कोरापुट ज़िले में बारुदी सुरंग विस्फोट में दस सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गयी।

 

4 अप्रैल को जन्मे व्यक्ति

1889 – माखन लाल चतुर्वेदी – हिन्दी जगत् के कवि, लेखक, पत्रकार।

 

1905 – नृपेन चक्रबर्ती – मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिज्ञ थे।

 

1908 – बेगम ऐज़ाज़ रसूल – भारतीय संविधान सभा की एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य थीं।

 

1933 – बापू नादकर्णी – पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी थे।

 

1949 – परवीन बॉबी – भारतीय अभिनेत्री

 

1969 – पल्लवी जोशी – भारतीय फिल्म तथा टेलीविजन अभिनेत्री हैं।

 

1972 – लीसा रे – भारतीय अभिनेत्री एवं फैशन मॉडल

 

1976 – सिमरन – भारतीय अभिनेत्री

 

4 अप्रैल को हुए निधन

2021 – शशिकला – भारतीय हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध खलनायिकाओं में से एक थीं।

 

2019 – वेदवती वैदिक – प्रमुख उपनिषदों के आख्यानों, अवधारणाओं, पदों, और शब्दों की युक्तियुक्त व्याख्याकार।

 

1995 – हंसा मेहता – भारत की प्रसिद्ध समाजसेवी, स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद।

 

1987 – अज्ञेय, सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन – हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार।

 

1924 – गंगाधर मेहरे – उड़िया भाषा के प्रसिद्ध कवि थे

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