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देश-दुनिया के इतिहास में आज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, पढ़ें

हर गुजरता दिन इतिहास में कुछ घटनाओं को जोड़कर जाता है। जोधपुर की स्थापना 12 मई 1459 मे हुई थी। इसका श्रेय राव जोधा को जाता है। जोधपुर ऐतिहासिक रजवाड़े की राजधानी भी हुआ करता था। थार के रेगिस्तान के बीच में शानदार महलों, दुर्गों और अन्य पर्यटन स्थलों के लिए जोधपुर पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

By RNI Hindi Desk 
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इतिहास से अच्छा शिक्षक कोई दूसरा हो ही नहीं सकता. इतिहास सिर्फ अपने में घटनाओं को नहीं समेटे होता है बल्कि इन घटनाओं से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। हर गुजरता दिन इतिहास में कुछ घटनाओं को जोड़कर जाता है। जोधपुर की स्थापना 12 मई 1459 मे हुई थी। इसका श्रेय राव जोधा को जाता है। जोधपुर ऐतिहासिक रजवाड़े की राजधानी भी हुआ करता था। थार के रेगिस्तान के बीच में शानदार महलों, दुर्गों और अन्य पर्यटन स्थलों के लिए जोधपुर पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

इसके अलावा जोधपुर की पहचान महलों और पुराने घरों में लगे छितर के पत्थरों से होती है। जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। राजस्थान का हाईकोर्ट जोधपुर में है और इंटरनैशनल एयरपोर्ट भी यहीं पर स्थिति है। इसके अलावा यहां पर कई सरकारी कार्यालय हैं। जोधपुर को सूर्य नगरी के नाम से भी जाना जाता है। जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग के चारों तरफ बने हजारों नीले मकानों के कारण जोधपुर को नीली नगरी भी कहा जाता है।

जोधपुर की उत्कृष्ट हस्तकलाएं, लोक नृत्य, संगीत, पहनावा देखकर आपका मन खुश हो जाएगा राजस्थान जाने के बाद आपको जोधपुर जरूर देखना चाहिए। यहां पर बने महल, दुर्ग और झीलें आपकी यात्रा को और भी ज्यादा यादगार बना देंगे। जोधपुर की बात हो और मेहरानगढ़ दुर्ग की बात न हो ऐसा संभव ही नहीं है। मेहरानगढ़ दुर्ग राजस्‍थान के सबसे खूबसूरत किलों में से एक है।

125 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित मेहारानगढ़ पांच किलोमीटर लंबा और भव्य किला है। इसके अलावा आप जोधपुर में जसवंत थड़ा, उम्मैद भवन पैलेस को भी देखें। वहीं, झीलों की बात करें तो बालसंमद झील, कायलाना झील जाकर शानदार अनुभव कर सकते हैं। जोधपुर का पहनावा अपनी अलग ही पहचान रखता है। बाहर से आने पर्यटकों को यहां लोगों की पोशाकें अपनी तरफ आकर्षित करती हैं।

यहां पर महिलाओं घेरदार लहंगा और आगे से पीछे तक ढकने वाली लंबी बांह वाली जैकेट पहनती हैं। वहीं, पुरुष ढीली और कसी पैंट और जोधपुर कोट पहनते हैं। इस सूट के ऊपर रंगीन पगड़ी चार चांद लगा देती है। जोधपुरी सूट पूरे भारत में प्रसिद्ध है। जोधपुर के बाजारों में आपको उत्कृष्ट हस्तशिल्प देखने को मिल जाएंगे। बंधेज का कपड़ा, कशीदाकारी चमड़ा, ऊंट की खाल, मखमल की जूतियां, आकर्षक रेशम की दरियां, मकराना के संगमरमर से बने स्मृतिचिन्ह आदि आपको अपनी तरफ आकर्षित करेंगे।

12 मई को जन्मे व्यक्ति भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी शिखा पांडे का जन्म 12 मई 1989 में हैं। 12 मई को हुए निधन हिन्दी कवि शमशेर बहादुर सिंह का निधन 12 मई  1993 में हुआ था। 12 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस क्या होता है। हर साल 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन फेलोरिंस नाइटिंगेल का जन्म हुआ था।

उन्हें मार्डन नर्सिंग का संस्थापक माना जाता है और उनके जन्मदिन को इंटरनेशनल नर्सेस डे के रूप में मनाया जाने लगा। साल 1974 इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स द्वारा अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाने की घोषणा कर दी गई। इस दिन इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स नर्सेस को किट बांटती है जिमसें उनके काम से संबंधित कई चीजें शामिल होती है। यह दिन नर्सों के प्रति अपना आभार जताने का है। इनके सहयोग और सेवा के बिना स्वास्थ्य सेवाएं अधूरी हैं।

12 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1999 – रूस के उपप्रधानमंत्री सर्गेई स्तेपनिश कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त, अमेरिकी वित्तमंत्री रोबर्ट रूबिन का अपने पद से इस्तीफ़ा।

2002 – मिस्र, सीरिया व सऊदी अरब ने पश्चिम एशिया मामले में शांति समझौते की इच्छा जताई।

2007 – पाकिस्तान के कराची शहर में हिंसा।

2008 – जजों की बहाली के मुद्दे को लेकर कोई समझौता न होने के कारण पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ ने साझा सरकार से हटने का निर्णय लिया। चीन में आये भीषण भूकम्प से हज़ारों लोग मारे गये।

2010 – बिहार के चर्चित बथानी टोला नरसंहार मामले में भोजपुर के प्रथम अपर ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने तीन दोषियों को फाँसी तथा 20 को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।

 

12 मई को जन्मे व्यक्ति

2002 – सौरभ चौधरी – भारतीय निशानेबाज़ हैं।

1989 – शिखा पांडे – भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी हैं।

1945 – के. जी. बालकृष्णन – भारत के 37वें मुख्य न्यायाधीश थे।

1944 – घनश्याम नायक – भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेता थे।

1933 – नंदू नाटेकर – पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी थे, जिन्होंने इंटरनेशनल खिताब जीता था।

1875 – कृष्णचन्द्र भट्टाचार्य – प्रसिद्ध दार्शनिक, जिन्होंने हिन्दू दर्शन पर अध्ययन किया।

1895 – जे. कृष्णमूर्ति, एक दार्शनिक तथा आध्यात्मिक विषयों के बड़े ही कुशल एवं परिपक्व लेखक थे।

1820 – फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल – ‘आधुनिक नर्सिग आन्दोलन की जन्मदाता’ एक नर्स थीं।

1954 – के. पलानीस्वामी- राजनीतिज्ञ एवं तमिल नाडु के 13वें मुख्यमंत्री।

1917 – सीता देवी (महारानी) – बड़ौदा की महारानी थीं।

12 मई को हुए निधन

2015 – सुचित्रा भट्टाचार्य – बांग्ला भाषा की प्रसिद्ध महिला उपन्यासकार थीं।

1993 – शमशेर बहादुर सिंह, हिन्दी कवि।

1984 – धनंजय कीर – बाबा साहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जीवनी लिखने वाले साहित्यकार थे।

1984 – अलकनन्दा (नृत्यांगना) – भारत की कत्थक नृत्यांगना थीं।

12 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (मॉर्डन नर्सिंग की जनक फ़्लोरेंस नाइटेंगिल का जन्म दिवस)

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