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देश-दुनिया के इतिहास में आज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, पढ़ें

 इतिहास  से अच्छा शिक्षक कोई दूसरा हो ही नहीं सकता। इतिहास सिर्फ अपने में घटनाओं को नहीं समेटे होता है बल्कि इन घटनाओं से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं।

By RNI Hindi Desk 
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इतिहास  से अच्छा शिक्षक कोई दूसरा हो ही नहीं सकता. इतिहास सिर्फ अपने में घटनाओं को नहीं समेटे होता है बल्कि इन घटनाओं से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। हर गुजरता दिन इतिहास में कुछ घटनाओं को जोड़कर जाता है। 18 अप्रैल 1857 विद्रोह के नेता तात्यां तोपे को 1859 में फांसी दी गयी। आज भी जब इस स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र किया जाता है तो तात्या टोपे का का नाम जरूर लिया जाता है।

तात्या टोपे ने ना सिर्फ अंग्रेजों की नाक में दम करके रखा हुआ था। बल्कि उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई सहित कई राजाओं की मदद भी की थी। अंग्रेजों ने अपने खिलाफ शुरू हुए हर विद्रोह को लगभग खत्म कर दिया था। लेकिन अंग्रेजों के हाथ तात्या टोपे अभी तक नहीं लगे थे। ब्रिटिश इंडिया तात्या को पकड़ने की काफी कोशिशें करती रही, लेकिन तात्या अपना ठिकाना समय-समय पर बदलते रहे। महात्मा गांधी ने 18 अप्रैल 1917 में सत्याग्रह के लिए बिहार के चंपारण का चयन किया था ।

ऐसे माहौल में जब गांधीजी चंपारण पहुंचे, तो लोग उन्हें अपना दुख-दर्द बताने पहुंच गए। महात्‍मा गांधी अपने कुछ जानकार मित्रों और सलाहकारों से गांवों का सर्वेक्षण कराकर किसानों की हालत जानने की कोशिश करते रहे और फिर उन्हें जागरूक करने में जुट गए। गांधीजी ने अपने कई स्वयंसेवकों को किसानों के बीच में भेजा। यहां किसानों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए ग्रामीण विद्यालय खोले गए। लोगों को साफ-सफाई से रहने का तरीका सिखाया गया।

स्वयंसेवकों ने मैला ढोने, धुलाई और सफाई तक का काम किया। उन्‍होंने लोगों को साफ-सफाई से रहने और शिक्षा का महत्व बताया विनोबा भावे ने 18 अप्रैल  1950 में आंध्र प्रदेश के पचमपल्ली गाँव से भूदान आंदोलन की शुरुआत की विनोबा भावे की कोशिश थी कि भूमि का पुनर्वितरण सिर्फ सरकारी कानूनों के जरिए नहीं हो, बल्कि एक आंदोलन के माध्यम से इसकी सफल कोशिश की जाए।

इसके लिए विनोबा पद यात्राएं करते और गांव-गांव जाकर बड़े भूस्वामियों से अपनी जमीन का कम से कम छठा हिस्सा भूदान के रूप में भूमिहीन किसानों के बीच बांटने के लिए देने का अनुरोध करते थे। 18 अप्रॅल को हुए निधन  18 अप्रॅल 1955 में प्रसिद्ध वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन का निधन हुआ था। 18 अप्रॅल के महत्वपूर्ण दिवस  आजाद हिन्‍द फौज दिवस ।

 18 अप्रैल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1955 – बांडुंग में अफ़्रीकी-एशियाई सम्मेलन; प्रसिद्ध वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन का देहावसान।

 

1994 – वेस्टइंडीज के बल्लेबाज़ ब्रायन लारा ने 375 रन बनाकर टेस्ट मैच की एक पारी में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया।

 

1999 – ब्रिटेन की प्रमुख उपन्यासकार, जीवनीकार और सम्पादक मैरी बुलिंस का 90 वर्ष की आयु में निधन।

 

2001 – भारतीय सीमा में घुस आई बांग्लादेश की सेना की गोलीबारी से भारत के 16 जवान शहीद।

 

2002 – 1973 से इटली में निवास कर रहे अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व शासक मोहम्मद जहीर शाह काबुल लौटे।

 

2005 – भारत मुम्बई स्थित जिन्ना हाउस पाकिस्तान को देने पर सहमत।

 

2006 – रॉबिन हुड का शहर नाटिंघम लूटग्रस्त शहर घोषित।

 

2008 – इंफोसिस टैक्नोलाजी ने विकास एवं मरम्मत सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए अमेरिका की कॉनसेको के साथ पाँच वर्ष के लिए क़रार किया। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने जानलेवा इंजेक्शन के ज़रिये सज़ा-ए-मौत को वैध ठहराया। पाकिस्तान ने भारतीय क़ैदी सबरजीत सिंह की फ़ांसी की सज़ा को एक महीने के लिए टाला। भारत और मैक्सिको ने नागरिक उड्डयन व ऊर्जा के क्षेत्र में नये समझौते किए।

18 अप्रैल को जन्मे व्यक्ति

1621 – गुरु तेग़ बहादुर – सिक्खों के नौवें गुरु।

 

1858 – धोंडो केशव कर्वे – आधुनिक भारत का सबसे बड़ा समाज सुधारक और उद्धारक माना जाता है।

 

1928 – दुलारी – भारतीय सिनेमा की जानीमानी अभिनेत्री थीं।

 

1901 – चन्देश्वर प्रसाद नारायण सिंह, भारत के राजनीतिज्ञ थे।

 

1916 – ललिता पवार, हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री

 

1961 – पूनम ढिल्लों – बॉलीवुड अभिनेत्री

18 अप्रैल को हुए निधन

2021 – अनुपमा पंचीमांडा – भारत की पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर थीं।

 

1859 – तात्या टोपे – वीर पुरुष और ‘प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम’ में भाग लेने वाले प्रमुख व्यक्ति।

 

1955 – अलबर्ट आइंस्टाइन प्रसिद्ध वैज्ञानिक

 

1959 – बारीन्द्र कुमार घोष – भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा पत्रकार थे।

 

1972 – पांडुरंग वामन काणे – महान् भारतीय संस्कृतज्ञ और विद्वान् पंडित।

 

2003 – सुधाकर पाण्डेय – हिन्दी साहित्य की प्रमुख विधाओं के उत्कृष्ठ लेखक और सुधारक।

 

1916 – जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर – भारत के जानेमाने पत्रकार तथा प्रमुख बुद्धिजीवी थे।

 

1898 – दामोदर हरी चापेकर – भारत के क्रांतिकारी अमर शहीदों में से एक थे।

 

18 अप्रैल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

 

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