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12 मार्च का इतिहास: दांडी मार्च शुरू होने का दिन, पढ़ें पूरा इतिहास

12 मार्च  के दिन कई महान लोगों ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया । वैसे ही कई महान शख्सियत ने जन्म लिया। चलिए  12 मार्च  के सफर पर इतिहास  से अच्छा शिक्षक कोई दूसरा हो ही नहीं सकता। इतिहास सिर्फ अपने में घटनाओं को नहीं समेटे होता है बल्कि इन घटनाओं से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। हर गुजरता दिन इतिहास में कुछ घटनाओं को जोड़कर जाता है।

By RNI Hindi Desk 
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12 मार्च  के दिन कई महान लोगों ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया । वैसे ही कई महान शख्सियत ने जन्म लिया। चलिए  12 मार्च  के सफर पर इतिहास  से अच्छा शिक्षक कोई दूसरा हो ही नहीं सकता। इतिहास सिर्फ अपने में घटनाओं को नहीं समेटे होता है बल्कि इन घटनाओं से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। हर गुजरता दिन इतिहास में कुछ घटनाओं को जोड़कर जाता है।

इतिहास  में 12 मार्च की तारीख में दर्ज प्रमुख घटनाओं में 1930 में शुरू हुआ दांडी मार्च भी शामिल है। इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अहम पड़ाव माना जाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस दिन अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से नमक सत्याग्रह के लिये दांडी यात्रा शुरू की थी। इस मार्च के जरिए बापू ने अंग्रेजों के बनाए नमक कानून को तोड़कर उस सत्ता को चुनौती दी थी जिसके बारे में कहा जाता था कि उसके साम्राज्य में कभी सूरज नहीं डूबता है। दांडी मार्च को नमक मार्च या दांडी सत्याग्रह के रूप में भी इतिहास में जगह मिली है।

साल 1930 में अंग्रेज सरकार ने जब नमक पर कर लगा दिया तो महात्मा गांधी ने इस कानून के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। ये ऐतिहासिक सत्याग्रह गांधी समेत 78 लोगों के द्वारा अहमदाबाद साबरमती आश्रम से समुद्रतटीय गांव दांडी तक पैदल यात्रा की। 12 मार्च को शुरू हुई ये यात्रा 6 अप्रैल 1930 को नमक हाथ में लेकर नमक विरोधी कानून भंग करने का आह्वान किया। भारत में अंग्रेजों के शासन काल के वक्‍त नमक उत्पादन और विक्रय के ऊपर बड़ी मात्रा में कर लगा दिया था। नमक जीवन के लिए जरूरी चीज होने के कारण भारतवासियों को इस कानून से मुक्त करने और अपना अधिकार दिलवाने हेतु ये सविनय अवज्ञा का कार्यक्रम आयोजित किया था।

कानून भंग करने के बाद सत्याग्रहियों ने अंग्रेजों की लाठियां खाई थीं लेकिन पीछे नहीं मुड़े थे। 1930 में गांधी जी ने इस आंदोलन का चालू किया। इस आंदोलन में लोगों ने गांधी के साथ पैदल यात्रा की और जो नमक पर कर लगाया था उसका विरोध किया गया। इस आंदोलन में कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें सी. राजगोपालचारी, पंडित नेहरू जैसे आंदोलनकारी शामिल थे। ये आंदोलन पूरे एक साल तक चला और 1931 को गांधी-इरविन के बीच हुए समझौते से खत्म हो गया। इसी आन्दोलन से सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इस आंदोलन ने संपूर्ण देश में अंग्रेजों के खिलाफ व्यापक जन संघर्ष को जन्म दिया था। गांधीजी के साथ सरोजनी नायडू ने भी नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया। 24 दिन में 340 किलोमीटर चले स्वतंत्रता सेनानी दांडी पहुंचे और सवेरे 6:30 पर नमक कानून तोड़ा. इसमें 8,000 भारतीयों को नमक सत्याग्रह के दौरान जेल में डाल दिया गया था। सत्याग्रह आगे भी जारी रहा और एक साल बाद महात्मा गांधी की रिहाई के साथ खत्म हुआ ।

अटलांटिक महासागर में स्थित बरमुडा द्वीप 12 मार्च 1609 में अंग्रेजों का उपनिवेश बना। बंगाल के अंतिम स्वतंत्र अफगान शासक उस्मान खान की लोहानी के नेकुजयाल के युद्ध में हारने के बाद गंभीर रूप से जख्मी होने के कारण 12 मार्च 1612 में मौत हो गयी थी। महात्‍मा गांधी को यूरोप के बने सामान को खरीदने और ब्रिटिश शासन की मशीनों के साथ काम करने के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन के लिए 12 मार्च 1922 में अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था। भारत सरकार ने 12 मार्च 1954 में साहित्य अकादमी का उद्घाटन किया था। मुंबई में 12 मार्च 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 300 लोग मारे गए और सैकड़ों से अधिक घायल हो गए थे । बंगाल के अंतिम स्वतंत्र अफगान शासक उस्मान खान की लोहानी के नेकुजयाल के युद्ध में हारने के बाद गंभीर रूप से जख्मी होने के कारण 12 मार्च 1612 में मौत हो गयी थी। 12 मार्च को जन्मे व्यक्ति 12 मार्च  1913 में भारतीय राजनीतिज्ञ यशवंतराव चव्हाण का जन्म हुआ था । 12 मार्च 1984 में आज ही के दिन को बॉलीवुड सिंगर श्रेया घोषाल का जन्‍म हुआ था। 12 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की स्थापना दिवस । अब ये केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल क्या  है ? —  केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल  एक अर्धसैनिक बल हैं, जिसका मुख्य कार्य सरकारी कारखानो एवं अन्य सरकारी उपक्रमों को सुरक्षा प्रदान करना है। ये बल देश के विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों की भी सुरक्षा करता है।

इस बल का गठन 1969 में हुआ था। आज इस बल की संख्या लगभग 1.50 लाख है। ये बल सरकारी उपक्रमों की सुरक्षा के आलावा देश के आंतरिक सुरक्षा,विशिष्ट लोगों की सुरक्षा, मेट्रो, परमाणु संस्थान, ऐतिहासिक धरोहरों आदि की भी सुरक्षा करता है।

तिब्बती महिला विकास दिवस क्या होता है जानते हैं   चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में महिला कार्य की प्रगति हमेशा ध्यानाकर्षक है। महिलाएं तिब्बत के आर्थिक व सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं। देश में दूसरे क्षेत्रों की ही तरह तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में महिलाओं के स्थानों को बहुत उन्नत किया गया है ।

12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में महिला विकास योजना जारी की गयी जिस के तहत वैधानिक तौर पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की गयी है। इससे यह जाहिर है कि तिब्बती महिलाओं के स्थान की ऐतिहासिक प्रगतियां प्राप्त हो चुकी हैं। शांतिपूर्ण मुक्ति से पहले तिब्बत में महिलाओं को शिक्षा लेने का अवसर नहीं था। उस समय 90 प्रतिशत महिला निरक्षर रहती थी। शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद में तिब्बत में शिक्षा कार्यों का तेज़ी से विकास किया ।

1872 : लॉर्ड मायो को मौत के घाट उतारने वाले शेर अली को फांसी पर लटकाया गया।

1799: ऑस्ट्रिया ने फ्रांस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।

1930 : गांधी जी ने नमक सत्याग्रह के लिए अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से अपनी डांडी यात्रा शुरू की। उन्होंने इसके साथ ही सविनय अवज्ञा आंदोलन भी शुरू किया और लोगों से ब्रिटिश हुकूमत को कर अदा न करने को कहा।

1938: जर्मनी ने ऑस्ट्रिया पर हमला किया।

1942: दूसरे विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश सैनिकों ने अंडमान द्वीप खाली किया।

1954: भारत सरकार ने साहित्य अकादमी की स्थापना की।

1960: भारतीय मनीषी, लेखक और संस्कृत विद्वान क्षितिमोहन सेन का निधन।

1967 : इंदिरा गांधी दूसरी बार देश की प्रधानमंत्री बनीं।

1993: मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में सैकड़ों लोग हताहत हुये।

1999: बीसवीं सदी के प्रसिद्ध वायलिन वादक यहूदी मैनुहिन का निधन।

2003: सर्बिया के प्रधानमंत्री जोरान दिजिनदिक की बेलग्राद में हत्या।

2004 : दक्षिण कोरिया की संसद ने राष्ट्रपति रोह मू हुन के खिलाफ महाभियोग पारित किया, जिसके बाद उन्हें पद से निलम्बित कर दिया गया।

2006 : इराक में सद्दाम हुसैन के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई शुरू।

2007 : जमैका में विश्वकप क्रिकेट चैंपियनशिप की शुरूआत। यह प्रतियोगिता का नौवां संस्करण था।

2008 : अमेरिकी वायुसेना ने विश्व के पहले स्टील्थ लड़ाकू विमान एफ़-117 को अपने सैन्य बल से हटाया।

 

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