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जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस पर मंडराया संकट, गुलाम नबी आजाद खेमे के 7 बड़े नेताओं ने दिया इस्तीफा; बताई ये बड़ी वजह

The crisis hovered over the Congress in Jammu and Kashmir; पंजाब के बाद अब जम्मू-कश्मीर में भी कांग्रेस पर सियासी संकट मंडरा रहा है। जो कांग्रेस के लिए बहुत बुरी खबर है। क्योंकि अगले ही साल देश के पांच राज्यों में चुनाव होने है जिनमें प्रमुख गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश है।

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : देश के पांच प्रमुख राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं, इसे लेकर तमाम पार्टियां अपना कमर कस रही है। वहीं एक बार फिर पंजाब के बाद कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में भी अंतर्कलह का शिकार हो रही है। जिससे एक के बाद एक दिग्गज नेता उसका साथ छोड़ते नजर आ रहे है। आपको बता दें कि कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई (Jammu Kashmir Congress) के सात प्रमुख नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को अपना इस्तीफा भेजा है और दावा किया है कि उन्हें इस केंद्रशासित प्रदेश में पार्टी से संबंधित मामलों को लेकर अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि ये पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) के करीबी हैं। कांग्रेस के इन नेताओं के इस्तीफे से कुछ दिनों पहले ही आजाद ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था। इन नेताओं ने सोनिया गांधी के अलावा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल को भी अपने इस्तीफे की प्रतियां भेजी हैं।

इन नेताओं के इस्तीफे की खबरें

सूत्रों के मुताबिक त्यागपत्र भेजने वालों में चार पूर्व मंत्री और तीन विधायक हैं। इस्तीफा देने वाले नेताओं में पूर्व मंत्री जीएम सरूरी, जुगल किशोर, विकार रसूल और डॉ. मनोहल लाल के नाम शामिल हैं। इसके अलावा जिन पूर्व विधायकों ने इस्तीफा दिया है उनके नाम हैं- गुलाब नबी मोंगा, नरेश गुप्ता और अमीन भट्ट।

‘शत्रुतापूर्ण रवैये के चलते उठाना पड़ा यह कदम’

त्यागपत्र में इन नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के ‘शत्रुतापूर्ण रवैये’ के चलते यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर पर निशाना साधा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि पूर्व उप मुख्यमंत्री तारा चंद समेत आजाद के करीब कुछ अन्य नेताओं ने इस्तीफा देने वाले नेताओं से दूरी बना ली है।

इन नेताओं ने त्यागपत्र में कहा कि उन्होंने अपने मुद्दों की तरफ पार्टी आलाकमान का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया। इन नेताओं का कहना है कि वे पिछले करीब एक साल से पार्टी नेतृत्व से मिलने का समय मांग रहे थे, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया।

मीर पर साधा निशाना

मीर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मीर के अध्यक्ष रहते पार्टी ही बहुत दयनीय स्थिति की तरफ बढ़ रही है और पार्टी के बहुत सारे नेता इस्तीफा देकर दूसरे दलों में शामिल हो गए, लेकिन कुछ ने खामोश रहने का फैसला किया है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के कामकाज पर कुछ नेताओं पे कब्जा जमा रखा है।

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस आलाकमान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी चिंता का निदान पार्टी की व्यवस्था के तहत किया जाएगा और मीडिया के जरिये कुछ नहीं होगा। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इन नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, क्योंकि उन्होंने पार्टी आलाकमान पर निशाना साधा है।

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