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भारत की मुश्किल घड़ी में अमेरिका ने खड़े किये हाथ, मदद के सवाल पर दो टूक

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : ट्रंप सरकार में जो अमेरिका भारत के साथ-साथ कदम से कदम मिलाता नजर आ रहा था, वो अब जो बाइडेन सरकार में भारत को छोड़ खुद आगे बढ़ता नजर आ रहा है। भले ही ट्रंप सरकार ने भारत को लेकर वीजा संबंधित कुछ कठोर कदम उठाये थे, लेकिन वो भारत की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहें। लेकिन अब जब पूरी दुनिया कोरोना के विशालकाय जाल में फंसता नजर आ रहा है, उस जाल से निकलने में अमेरिका भारत की मदद नहीं कर रहा।

दरअसल भारत में पिछले दो दिनों से तीन लाख से ज्यादा कोरोना के मामले आ रहे हैं। एक तरफ, जहां अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और दवाइयों के लिए मारामारी है तो दूसरी तरफ वैक्सीन उत्पादक कंपनियों को कच्चे माल की कमी की वजह से दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इस मुश्किल वक्त में जब भारत ने अमेरिका का रुख किया तो उसने भी मदद करने से साफ इनकार कर दिया।

आपको बता दें कि अमेरिका दवाओं के निर्माण में लगने वाले कुछ जरूरी कच्चे माल के निर्यातों पर पाबंदी लगा रखा है। जिसे लेकर भारत ने कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए आवश्यक इन सामग्रियों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की थी। लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया है कि बाइडन प्रशासन का पहला दायित्व अमेरिकी लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना है।

बता दें कि इससे पहले भारत ने अमेरिका के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर लगी रोक हटा ली थी। पिछले साल ट्रंप के कार्यकाल के दौरान भारत ने हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के निर्यात पर पाबंदी को हटाकर अमेरिका को निर्यात किया था। लेकिन अब भारत को कोरोना वैक्सीन के लिए कच्चे माल की भारत को जरूरत पड़ी है तो अमेरिका ने सबसे पहले अपने नागरिकों के वैक्सीनेशन का हवाला दिया है।

आपको बता दें कि अमेरिका ने 4 जुलाई 2021 तक अपनी पूरी आबादी का टीकाकरण करने के मकसद को पूरा करने के लिए Pfizer और Moderna द्वारा COVID-19 टीकों का उत्पादन शुरू कर दिया है। वैक्सीन के लिए कच्चे माल की पूरी दुनिया में भारी मांग है। भारत में भी वैक्सीन के निर्माता इस कच्चे माल की मांग कर रहे हैं लेकिन अमेरिका सिर्फ अपनी घरेलू मांग को पूरी करने के लिए ये मुहैया करा रहा है। जिससे भारत में वैक्सीनेशन के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने अमेरिका से कच्चे माल की मांग की है।

गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर से पहले भारत ने दुनिया भर में वैक्सीन भेजी। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने दुनियाभर के गरीब और विकासशील देशों को करीब 2 बिलियन वैक्सीन भेजी है। वैक्सीन बेचने और बांटने के बाद स्थिति यह हो गई कि भारत में ही टीके की कमी सामने आ गई। इसे देखते हुए भारत ने अपने नियमों में बदलाव किए और Pfizer, Sputnik V वैक्सीन के निर्यात को मंजूरी दी।

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