1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. एअर इंडिया के बाद जल्द ही निजी हाथों में जा सकती हैं LIC और BPCL सहित कई कंपनियां, जानिए कंपनियों के नाम

एअर इंडिया के बाद जल्द ही निजी हाथों में जा सकती हैं LIC और BPCL सहित कई कंपनियां, जानिए कंपनियों के नाम

Many companies including LIC and BPCL may soon go into private hands After Air India, एअर इंडिया के बाद अब भारत सरकार कई और कंपनियों का निजीकरण करने जा रही है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष में निजीकरण से 1.75 लाख करोड़ रुपए हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली: एअर इंडिया को निजी हाथों में सौंपने के बाद इस वित्त वर्ष 2021-22 में मोदी सरकार की आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों के निजीकरण या विनिवेश की योजना है। केंद्र सरकार अपने निजीकरण और विनिवेश लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए तेजी से काम करेगी। एअर इंडिया की बिक्री (Air India sale) के साथ ही पिछले 17 साल में पहली बार किसी सरकारी कंपनी का सफल निजीकरण हुआ है। बता दें कि इसके पहले साल 2003-04 में अटल बिहार वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार निजीकरण में सफल हुई थी।

केंद्र सरकार ने रखा लक्ष्य

केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष में निजीकरण से 1.75 लाख करोड़ रुपए हासिल करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन अभी तक सरकार को एक्सिस बैंक, एनएमडीसी और हुडको आदि में हिस्सेदारी की बिक्री से महज 8,369 करोड़ रुपए और हाल में एअर इंडिया की बिक्री से करीब 18 हजार करोड़ रुपए मिले हैं। इस तरह अभी तक करीब 26,369 हजार करोड़ रुपए ही जुटाया जा सका है। इस वित्त वर्ष 2021-22 में यानी मार्च 2022 तक मोदी सरकार की योजना कई कंपनियों के निजीकरण या विनिवेश की है, जिससे सरकार 1.75 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा कर सके।

पटरी पर लौट आएगी विनिवेश

आपको बता दें कि मोदी सरकार ने शुरू से ही सुधार उन्मुख और निजीकरण की पक्षधर सरकार की छवि बनाई है। सरकार के नीति नियंताओं का मानना है कि कई सेक्टर ऐसे हैं जिनमें सरकारी कंपनी की जरूरत नहीं है। सरकार को बिजनेस में नहीं होना चाहिए। इसी तरह लगातार घाटे में चल रही कंपनियों का निजीकरण या विनिवेश कर देना ही बेहतर है। कुछ महीने पहले निवेश और लोक संपत्तिर प्रबंधन (DIPAM)  सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा था कि सरकार का विनिवेश कार्यक्रम पटरी पर लौट आया है, जो कि कोरोन की दूसरी लहर की वजह से ठप पड़ गया था।

एअर इंडिया की बिक्री से मिले 18 हजार करोड़ रुपए

सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन अभी तक सरकार को Axis Bank, एनएमडीसी, हुडको आदि में हिस्सेदारी की बिक्री से महज 8,369 करोड़ रुपये और हाल में एअर इंडिया की बिक्री से करीब 18 हजार करोड़ रुपये मिले हैं। इस तरह अभी तक करीब 26,369 हजार करोड़ रुपये ही जुटाया जा सका है।

2022 तक किया जाएगा BPCL का निजीकरण

कुछ महीने पहले निवेश और लोक संपत्तिै प्रबंधन (DIPAM) सचिव तुहिन कांत पांडे ने बताया था कि इस वित्त वर्ष में ही यानी मार्च 2022 तक भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन BPCLका निजीकरण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, BEML, पवन हंस और नीलांचल इस्पात निगमके निजीकरण की प्रक्रिया भी इस साल पूरा कर लेना चाहती है। इनमें कई कंपनियां रुचि दिखा रही हैं और इनकी बिक्री के लिए प्रक्रिया चल रही है। इनमें दो पीएसयू बैंकों और एक बीमा कंपनी का भी निजीकरण किया जाना है हालांकि ये बैंक कौन से होंगे अभी इनका खुलासा सरकार ने नहीं किया है।

इन कंपनियों का निजीकरण करेगी सरकार

बीपीसीएल : भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड का सरकार पूरी तरह से निजीकरण करने जा रही है। इसके लिए दिसंबर तक फाइनेंशियल बिड बुलाई जा सकती हैं। भारत पेट्रोलियम में सरकार की 53% हिस्सेदारी है जिसकी कीमत करीब 50 हजार करोड़ रुपए है।

एलआईसी : केंद्र सरकार इस वित्त वर्ष के अंत यानी मार्च 2022 तक विनिवेश कर लेने का लक्ष्य है। भारतीय जीवन बीमा निगम यानी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसे कमाना चाहती है। सरकार एलआईसी का IPO लाकर 1 लाख करोड़ रुपए तक जुटा सकती है।

नीलांचल इस्पात निगम : नीलांचल इस्पात निगम के लिए रकार को कई कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ रिक्वेस्ट (EOI) मिला है। इसका भी मार्च 2022 से पहले निजीकरण किया जाना है। दरअसल में केंद्र सरकार की कई  कंपनियों MMTC, NMDC, BHEL, MECON और ओडिशा सरकार की दो कंपनियों OMC और IPICOL के बीच संयुक्त उद्यम है।

सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड : एअर इंडिया के निजीकरण के बाद अब मोदी सरकार ने एक और सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) की बिक्री की तैयारी तेज कर दी। वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी दी है कि सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) की 100 फीसदी हिस्सेदारी और मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर करने के लिए सरकार को फाइनेंशियल बिड हासिल हो गया है।

आईडीबीआईबैंक : कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक विनिवेश और मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर के लिए मंजूरी दे दी है। इस बैंक में केंद्र सरकार और एलआईसीकी कुल 94% हिस्सेदारी है। जिसमें एलआईसी की 49.24% और सरकार की 45.48% हिस्सेदारी है। इसके अलावा 5.29% हिस्सेदारी अन्य निवेशकों की है। वित्त मंत्री ने बजट के दौरान कहा था कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया मौजूदा वित्त वर्ष में ही पूरी हो जाएगी।

शिपिंग कॉर्प ऑफ इंडिया: शिपिंग कॉर्प ऑफ इंडिया (SCI) का भी मार्च 2022 से पहले निजीकरण किया जाना है। इसमें भी सरकार अपनी पूरी 63.75% हिस्सेदारी बेच रही है। इसके लिए भी कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। जिसमें से तीन कंपनियों का नाम फाइनल किया गया है।

पवन हंस का निजीकरण: सरकार पिछले कई साल से हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनी पवन हंस से बाहर जाना चाहती है, लेकिन इसका निजीकरण कायमाब नहीं हो पा रहा। अब सरकार ने मार्च 2022 से पहले इसकी बिक्री का लक्ष्य रखा है। इसमें फिलहाल सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी है और 49 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी की है। ओएनजीसी ने भी अपना हिस्सा बेचने का फैसला किया है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...