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उत्तराखंड में भूस्खलन के कारण विभिन्न इलाकों में 6 लोगों की मौत, टूटा इस मुक्य शहर का सड़क संपर्क

6 people died in different areas due to landslide in Uttarakhand; उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों से भारी बारिश हो रही है। इस बारिश के कारण विभिन्न इलाकों से भूस्खलन की घटना सामने आई है। भूस्खलन की घटनाओं में तीन नेपाली नागरिकों और कानपुर के एक पर्यटक सहित छह लोगों की मौत हो गई।

By RNI Hindi Desk 
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रिर्पोट: अनुष्का सिंह

नई दिल्ली: उत्तराखंड में लगातार पिछले कई घंटों से बारिश हो रही है, जिस कारण आम लोगों का जीना मुहाल है। एक तरफ जहां इस बारिश ने कई लोगों के घरों को अपने चपेट में ले लिया, वहीं बारिश के कारण हुई भूस्खलन ने कई लोगों की जान ले ली। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के अनुसार, सोमवार को बारिश के कारण उत्पन्न हुई भूस्खलन से एक निर्माणाधीन होटल चपेट में आ गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। आपको बता दें कि मृतक की पहचान समुना (50), सपना (40) और अबीसा (4) के रूप में हुई है। जो नेपाली नागरिक थे।

बता दें कि यह हादसा उत्तराखंड के पौड़ी में हुई है। साथ ही रुद्रप्रयाग जिले में एक अन्य घटना में कानपुर के एक 27 वर्षीय व्यक्ति सुधीर अवस्थी की रुद्रप्रयाग में संगम बाजार के पास एक बोल्डर की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं चंपावत जिले में भी दो लोगों की मौत हो गई, जिसमे एक 48 वर्षीय महिला और उसके 17 वर्षीय बेटे भूस्खलन की चपेट में आ गये।

आपको बता दें कि भूस्खलन के कारण सोमवार को गढ़वाल और कुमाऊं भी बंद रहे। साथ ही सभी ट्रेकिंग गतिविधियां और चार धाम यात्रा स्थगित कर दी गईं। वहीं अगले 48 घंटों में भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी के कारण, राज्य सरकार ने रविवार से चार धाम यात्रा मार्ग पर तीर्थयात्रियों को रोक दिया था और लोगों से अपील की थी कि वे जहां हैं वहीं रहें और भूस्खलन की संभावना को देखते हुए यात्रा न करें।

इस बीच, नैनीताल को सोमवार को राज्य के बाकी हिस्सों से काट दिया गया था, जब भूस्खलन से पहाड़ी शहर के तीनों राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया गया था, जिससे कई पर्यटक सड़कों और होटलों में फंसे हुए थे। जिला प्रशासन के अनुसार, नैनीताल से आने-जाने वाले कई लोग मार्गों पर कई घंटों तक फंसे रहे। दशहरे के लंबे सप्ताहांत में पर्यटकों की भीड़ नैनीताल पहुंची थी और कई लोग फंसे रह गए थे। मूसलाधार बारिश के कारण सोमवार को नैनी झील का जलस्तर भी अचानक बढ़ गया।

गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग और कई अन्य सहायक सड़कें से चंपावत में, पुलिस को पूर्णागिरी मंदिर के रास्ते में 200 तीर्थयात्रियों को बचाना पड़ा, जो बारिश और भूस्खलन के बाद फंसे हुए थे। अगले दो-तीन दिनों तक पूर्णागिरी मंदिर की यात्रा नहीं करने की सार्वजनिक सलाह भी जारी की गई है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने नुकसान से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। धामी ने सचिवालय स्थित आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष का भी दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया. रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मनुज गोयल ने सीएम को बताया कि रविवार को केदारनाथ में 6,000 तीर्थयात्री थे, जिनमें से 4,000 वापस आ गए हैं और लगभग 2,000 सुरक्षित स्थानों पर हैं।

मौसम कार्यालय के अनुसार, उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों में 140% की वृद्धि दर्ज करते हुए, औसत 2.4 मिमी की तुलना में 36.7 मिमी बारिश हुई है।

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