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गायब हुई मंदिर की 47,000 एकड़ जमीन, HC से फटकार के बाद हरकत में आई तमिलनाडु सरकार

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : सरकार या आम लोगों द्वारा मंदिरों के लिए भूमि दान करने के बाद कई सालों बाद ये बात सामने आती है की मंदिर की भूमि कमती जा रही है। यानी की मंदिर के लिए जितनी भूमि का आवंटन किया गया था, वो जमीन आंकड़ों के अनुसार कम गई है। इसके बावजूद भी राज्य सरकार या प्रशासन कोई कदम नहीं उठाती। लेकिन मद्रास हाइकोर्ट के फटकार के बाद तमिलनाडु सरकार गायब हुई मंदिर की जमीन को पाने के लिए विवश होना पड़ा।

गौरतलब है कि तमिलनाडु (Tamil Nadu) में साल 1984 और 2019 के बीच मंदिर की 47,000 एकड़ जमीन गायब होने पर मंगलवार को मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार खोई जमीन को वापस पाने के लिए कदम उठा रही है।

5 जुलाई तक हलफनामा दायर करने का निर्देश

मद्रास हाई कोर्ट की एक खंडपीठ जिसमें जस्टिस एन किरुबाकरण और जस्टिस टीवी थमिलसेल्वी शामिल थे, उन्होंने राज्य सरकार को हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर और सीई) विभाग की ओर से कार्रवाई करने और जुलाई 5 तक सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गायब 47000 एकड़ मंदिर भूमि पर एक जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

‘मकान मालिक को बनाया जाएगा किरायेदार’

तमिलनाडु के मानव संसाधन और सीई मंत्री पीके शेखर बाबू ने बताया कि, ‘सीएम एमके स्टालिन (M. K. Stalin) चाहते हैं कि मंदिर की भूमि को बहाल किया जाए और मंदिरों के हितों का ध्यान रखा जाए। हमने पाया है कि मंदिर की जमीन पर कुछ क्षेत्र में घरों का निर्माण किया गया था। हम यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं कि ये मकान मालिक किरायेदार बन जाएं और मंदिर को किराया दें।’

वेबसाइट पर देख सकेंगे जमीन की जानकारी

एचआर एंड सीई विभाग ने पुष्टि की कि सरकार मंदिर की भूमि को बहाल करने की तैयारी में है, और पहले से ही 3,43,647 एकड़ मंदिर भूमि की जानकारी सत्यापित की जा चुकी है। विभाग ने अपने पास उपलब्ध आंकड़ों और राज्य की भूमि रिकॉर्ड रजिस्ट्री में तमिलनाडु सरकार के राजस्व विभाग के साथ तुलना की है। एचआर एंड सीई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, ‘हमने वेबसाइट पर राज्य के हजारों मंदिरों से संबंधित शीर्षक दस्तावेजों, चिट्टों और यहां तक कि उपहार कार्यों की जानकारी पहले ही अपलोड कर दी गई है। अब लोग आसानी से मंदिरों के साथ भूमि की पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं।’

‘राज्यभर में भाजपा शुरू कर सकती है आंदोलन’

भाजपा नेता और पार्टी प्रवक्ता केटी राघवन ने कहा कि, ‘हमें देखना होगा कि तमिलनाडु सरकार (Tamil Nadu Government) इस संबंध में कितनी गंभीर है। मद्रास हाई कोर्ट ने मानव संसाधन और सीई विभाग को पहले ही मंदिर भूमि रिकॉर्ड की असमानता के संबंध में एक जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। राज्य सरकार के नीति नोटों में 1984 में जब यह 5.25 लाख एकड़ थी और 2019-20 में जब इसे 4.78 लाख एकड़ कर दिया गया था, जिसमें 47,000 एकड़ का अंतर देखने को मिला। यदि सरकार अतिक्रमणकारियों से मंदिर की भूमि को दोबारा प्राप्त करने के लिए कदम नहीं उठाती है तो भाजपा राज्य भर में बड़े आंदोलन शुरू करेगी।’

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