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ऐसा क्या हुआ कि फ्रांस ने अपने नागरिकों को तुरंत दी पाकिस्तान छोड़ने की सलाह, बोला- मंडरा रहा है गंभीर खतरा

By Amit ranjan 
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इस्लामाबाद : पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहें इस विरोध को लेकर अब फ्रांस ने अपने नागरिकों को तुरंत पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी है। फ्रांस ने कहा है कि अगर कोई भी फ्रांसीसी नागरिक पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में है, तो वह तुरंत किसी अन्य देश में या वापस अपने देश को आ जाएं। जिसे लेकर फ्रांस ने इस्लामाबाद में स्थित अपने दूतावास को एक ईमेल किया है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के कई शहरों में इन दिनों कट्टरपंथी संगठन फ्रांस से राजनयिक संबंध तोड़ने को लेकर उग्र विरोध कर रहे हैं। जिसकी अगुवाई कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के मुखिया साद रिजवी कर रहे है, जिन्हें पहले ही पाकिस्तानी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं उसके संगठन को भी हिंसा फैलाने के आरोप में आतंकवाद अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया जा चुका है। फिर भी पाकिस्तान के कई शहरों में हजारों लोग साद रिजवी की रिहाई को लेकर सड़कों पर हैं।

आपको बता दें कि पाकिस्तान में हिंसा और झड़पों के दौरान अबतक सात लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। बता दें कि पार्टी समर्थकों ने फ्रांस के राजदूत को निष्कासित करने के लिये इमरान खान सरकार को 20 अप्रैल तक का समय दिया था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने सोमवार को पार्टी के प्रमुख साद हुसैन रिजवी को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद टीएलपी ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कौन है साद हुसैन रिजवी?

खादिम हुसैन रिजवी के आकस्मिक निधन के बाद साद हुसैन रिजवी तहरीक ए लबैक पाकिस्तान पार्टी का नेता बन गया था। जिसके बाद लगातार रिजवी के समर्थक, देश के ईशनिंदा कानून को रद्द नहीं करने के लिए सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं। पार्टी चाहती है कि सरकार फ्रांस के सामान का बहिष्कार करें और फरवरी में रिजवी की पार्टी के साथ हस्ताक्षरित करारनामे के तहत फ्रांस के राजदूत को देश से बाहर निकाले।

आखिरकार फ्रांस से क्यों चिढ़े हुए हैं पाकिस्तानी कट्टरपंथी

दरअसल पाकिस्तान के कट्टरपंथी फ्रांस की मैगजीन चार्ली हेब्दो में प्रकाशित किए गए मोहम्मद साहब के विवादित कार्टून से चिढ़े हुए हैं। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्लामिक आतंकवाद पर दिए गए बयान को लेकर भी पाकिस्तानी संसद में निंदा प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इतना ही नहीं, पिछले साल अक्टूबर में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने फ्रांसीसी राजदूत को तलब कर इस बाबत विरोध भी जताया था।

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