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खूबसूरत लड़के को देखते ही लड़खड़ा कर गिर जाती हैं क्रिस्टी, नजरें झुकाकर चलने को मजबूर

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट- पल्लवी त्रिपाठी

नई दिल्ली : आपने हो सकता है लोगों में अजीबोगरीब बीमारी के बारे में सुना हो, लेकिन क्या कोई बीमारी इतनी अजीब हो सकती हैं कि कोई सामने वाली की खूबसूरती को बर्दाश्त न कर पाए और बेहोश हो जाए । आपको यह पढ़कर अजीब तो लग रहा होगा, लेकिन ऐसा ही एक मामला सामने आया है । जहां एक महिला ऐसी ही एक बीमारी से जूझ रही है । जो सामने खड़े किसी भी हैंडसम लड़के को देखकर बेहोश हो जाती है ।

नॅार्थविच की रहने वाली हैं 32 वर्षीय क्रिस्टी, जिसे ब्राउन कैटैप्लेक्सी नामक मस्तिष्क बीमारी है । जिस तरह से किसी इंसान को मिर्गी का अटैक आता है । उसी तरह अगर इस महिला को क्रोध, हंसी या डर जैसे कोई भी इमोशन अचानक आता है । तो क्रिस्टी के पैर लड़खड़ाने लगते हैं और वह बेहोश होकर गिर पड़ती है । महिला खुद को अटैक से बचाने के लिए बाहर जाने पर सिर झुका कर चलती है ।

बता दें कि क्रिस्टी दो बच्चों की मां है । क्रिस्टी बताती हैं, “यह बहुत मुश्किल है । मैं एक बार खरीदारी कर रही थी और मैंने किसी को देखा, जो अच्छा लग रहा था और मेरे पैर अचानक ही लड़खड़ा गए । इस बीच मुझे खड़े रहने के लिए अपने चचेरे भाई का सपोर्ट लेना पड़ा ।”

उनका कहना है, “अगर मैं किसी आकर्षक व्यक्ति को देखती हूं, तो मेरे पैर लड़खड़ा जाते हैं इसलिए मैं खुद को ऐसी परिस्थिति से बचाने की कोशिश में रहती हूं । जहां ऐसा कुछ होने की संभावना होती है, वहां मैं अपनी सुरक्षा के लिए अपनी आंखों को नीचे रखने की कोशिश करती हूं ।”

क्रिस्टी के मुताबिक, उन्हें आमतौर पर दिन में 5 बार कैटेप्लेक्सी के अटैक होते हैं । लेकिन किसी दिन तो यह इस हद तक बढ़ जाते हैं कि एक दिन में यह संख्या 50 तक बढ़ जाती है । क्रिस्टी का कहना है कि “यह एक नींद से जुड़ा डिसऑडर है, विचार करते हुए जब हम ज्यादा सो भी नहीं पाते हैं और जब हम ऐसा करते हैं, तो बुरी तरह थक जाते हैं। फिर ऐसी स्थिति में सामान्य से भी अधिक अटैक आते हैं।”

आपको बताते चलें कि कैटेप्लेक्सी डिसऑडर नार्कोलेप्सी नामक एक नींद की बीमारी से जुड़ी होती है । इसके अटैक आमतौर पर 2 मिनट के लिए आते हैं, लेकिन अगर पिछले अटैक के बाद कुछ ही सेकेंड में दोबारा अटैक आता हैं तो इस अटैक की अवधि 30 मिनट तक बढ़ जाती है । इस बीमारी से पीड़ित लोग अटैक के दौरान भी पूरी तरह से सचेत रहते हैं । इस बीमारी को दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल स्थिति माना जाता है।

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