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कोरोना वायरस पहचानने का नया दावा, ट्रेन्ड कुत्ते आपका पेशाब सूंघकर बताएंगे कोरोना है या नहीं

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: देश में कोरोना का कहर इस दौर में पहुंच गया है कि संक्रमण की चेन रोकना मुश्किल हो गया है। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों भी बेबस नजर आ रही है। कोरोना के इस दूसरे लहर में संक्रमण की गति काफी तेज है, इसके साथ संक्रमण से इस लहर में जान गंवाने वालों का ऑकड़ा भी काफी तेजी के साथ बढ़ रहा है। हाताल तो ये हो गये हैं कि श्यमशान घाटों पर अंतिम संस्कार करने के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। वायरस की पहचान अभी तक एंटीजन और RTPCR टेस्ट के माध्यम से ज्यादा की जा रही है। लेकिन अब एक और नया दावा किया गया है। आइये जानते हैं…

आपको बता दें कि इसी बीच वैज्ञानिकों वायरस की पहचान करने का एक नये तरीके के इजाद का दावा किया है। वैज्ञानिकों के इस दावा में कहा गया है कि कुछ कुत्तों को ट्रेनिंग देकर लोगो के पेशाब को सूंघकर पता लगाया जा सकता है कि आपको कोरोना संक्रमण है या नहीं। इसकी सटीकता को लेकर वैज्ञानिकों की ओर से कहा गया है कि इसकी सटीकता 96 फीसदी तक होगी। वैज्ञानिकों के नये दावे के बाद अब आपको अपने नाक और मुंह में स्वैब टेस्ट किट की स्टिक नहीं डलवानी पड़ेगी।

आपको बता दें कि यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया स्कूल ऑफ वेटरीनरी मेडिसिन वर्किंग डॉग सेंटर की निदेशक सिंथिया ओट्टो ने बताया कि अभी कुत्तों के जरिए टेस्ट कराने की विधि का प्रैक्टिकली लागू करना मुश्किल है। क्योंकि इस पर जीवों के लिए काम करने वाले संस्थान आवाज उठाने लगेंगे। लेकिन कुत्तों की खासियत ये होती है कि वो पेशाब सूंघकर बता देगा कि पॉजिटिव है या निगेटिव है।

उन्होने आगे कहा कि कुत्ते अलग-अलग तरह की खुशबू पहचानते हैं। ये अलग-अलग बीमारियों से संबंधित गंध पहचानते हैं। कोरोनावायरस की गंध तो थूक और पसीने के सैंपल में भी आती है। जिसे कुत्ते आसानी से पहचान लेते हैं। दुबई एयरपोर्ट पर तो कोरोना संक्रमित लोगों की पहचान के लिए स्निफिंग डॉग्स तैनात किए गए हैं।

उन्होने तर्क देते हुए कहा कि अभी तक किसी इंसान के पेशाब को सूंघ कर कुत्ता उसके संक्रमण की जानकारी दे, ऐसा हुआ नहीं था। इसलिए हमारी टीम ने पहले आठ लेब्राडोर रिट्रीवर और एक बेल्जियन मैलिनॉय को प्रशिक्षित किया।  इसमें उन्हें यूनिवर्सल डिटेक्शन कंपाउंड  सुंघाया गया। इसकी गंध प्राकृतिक तौर पर कहीं नहीं मिलती। इसकी गंध 12 अलग-अलग गंधों से मिलकर बनती हैय़ इसलिए जब भी कहीं से UDC या उससे संबंधित कोई भी वस्तु गुजरती है तो कुत्ते तुरंत पहचान लेते हैं।

उन्होने शोध को लेकर दावा किया कि कुत्ते UDC की गंध को पहचानने लगे तब हमने कुत्तों को इंसान के पेशाब की अलग-अलग गंध को पहचानने के लिए ट्रेन्ड करने लगे। सात अलग-अलग कोरोना संक्रमित इंसानों के पेशाब के सेंपल से इन्हें प्रशिक्षित किया गया। इन सात लोगों में दो वयस्क और पांच बच्चे शामिल थे। इसके अलावा छह निगेटिव बच्चों को भी शामिल किया गया था।

इसके बाद उन्होने अपने शोध के अंतिम चरणों के बारे में बताया कि दो अलग-अलग जगहों पर एक तरफ संक्रमित पेशाब का नमूना रखा गया। दूसरी तरफ निगेटिव का नमूना। पहला उन्हें अपनी तरफ खींचता है तो दूसरा सैंपल उनका ध्यान भटकाता है। इस पेशाब के सैंपल्स को वायरस मुक्त करने के लिए गर्म किया जाता है। या फिर डिटरजेंट मिलाकर निष्क्रिय किया जा सकता है। ताकि कुत्तों को कोई संक्रमण न हो।

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