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इस देश में पहली बार बनी महिला प्रधानमंत्री ने सिर्फ 12 घंटे में दिया इस्तीफा, जानें क्या है कारण

First woman Prime Minister in this country resigned in just 12 hours; स्वीडन में बनी पहली महिला प्रधानमंत्री। पद संभालने के सिर्फ 12 घंटे में घंटे बाद इस्तीफा देना पड़ा।

By RNI Hindi Desk 
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नई दिल्ली : स्वीडन की पहली महिला प्रधानमंत्री मेगडालेना एंडरसन को पद संभालने के सिर्फ 12 घंटे में घंटे बाद इस्तीफा देना पड़ा। ऐसे अचानक पद से इस्तीफा देने से सभी हैरान है। बता दें कि देश की प्रधानमंत्री चुने जाने के कुछ घंटों बाद ही संसद में बजट प्रस्ताव गिरने पर, मेगदालेना एंडरसन ने बुधवार को पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद दो दलों की उनकी अल्पसंख्यक सरकार से एक दल अलग हो गया। इससे पहले एंडरसन प्रधानमंत्री बनाए जाने से पहले देश के वित्त मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

संसद में बिल गिरने के साथ ही सरकार में शामिल हुए सहयोगी घटक दल ग्रीन पार्टी ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। शपथ लेने के 12 घंटों के भीतर सामने आए इस घटनाक्रम के बारे में जिसने भी सुना उसे यकीन नहीं हुआ। देश की अधिकारिक न्यूज़ एजेंसी के इस खबर की पुष्टि के बाद लोग हैरान नजर आए। उनका कहना है कि जिसके नेतृत्व में हम आगे बढ़ने की सोच रहे थे। ऐसे में इस इस्तीफे से हमें झटका लगा है।

द गार्जियन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इस्तीफा देने के बाद बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एंडरसन ने कहा, ‘ये फैसला लेना आसान नहीं था। यह मेरी गरिमा से जुड़ा मामला है। मैं ऐसी सरकार का नेतृत्व नहीं करना चाहती जिसकी वैधानिकता पर एक भी सख्स सवाल खड़ा कर सके।’ हालांकि एंडरसन ने देश की संसद के स्पीकर एंड्रियास नोरलेन से कहा है कि वह अब भी ‘सोशल डेमोक्रेटिक’ की एक पार्टी की सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।

विपक्षी दलों में भी सुगबुगाहट शुरू

एंडरसन ने ये भी कहा कि अगर एक पार्टी सरकार से समर्थन वापस लेती है तो गठबंधन की पूरी सरकार को इस्तीफा देना चाहिए। आपको बताते चलें कि स्वीडन की 349 सीटों वाली संसद के स्पीकर नोरलेन ने कहा कि उन्हें एंडरसन का इस्तीफा मिल गया है। इसके बाद देश में संवैधानिक संकट टालने के लिए वो हर संभवाना की तलाश में बाकी दलों के नेताओं से बात कर रहे हैं। वहीं सरकार बनाने के लिए विपक्षी दलों में भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

संसद में मौजूद 117 सदस्यों ने एंडरसन के पक्ष में अपना वोट किया वहीं 174 सांसदों ने उनके विरोध में मतदान किया था। इस स्थिति के बाद देश के संविधान के मुताबिक फैसला लिया गया। दरअसल स्वीडन में अगर 175 सांसद किसी उम्मीदवार के खिलाफ नहीं हैं तो उसे प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा सकता है। इस नियम के हिसाब से एंडरसन को देश का भावी प्रधानमंत्री बनाया गया था।

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