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भागने के डर से मेहुल चोकसी को डोमिनिका HC ने बेल देने से किया मना, भारत को भी है तलाश

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: मेहुल चोकसी नाम तो जाना पहचाना लग रहा होगा आप लोगो को, जी हां ये वही शख्स है जिसकी तलाश भारत सरकार को भी है। पंजाब नेशनल बैंक से लगभग 13,500 करोड़ रुपये का घोटाला करके भागा हुआ है। मेहुल के एक दूसरे मामले में कैरेबियन आइसलैंड देश डोमिनिका की हाईकोर्ट ने मेहुल को जमानत देने से मना कर दिया।

आपको बता दें कि मेहुल के वकील ने उसके खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मांगी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने फ्लाइट रिस्क(कभी भी देश छोड़कर भाग सकता है) का हवाला देकर जमानत नहीं दी। इस मामले में सरकारी वकील लेनोक्स लॉरेंस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि मेहुल भाग सकता है। यह सुनवाई मेहुल के अवैध तरीके से डोमिनिका में घुसने के मामले में चल रही है। 23 मई को मेहुल चोकसी एंटीगुआ से गायब हो गया था। 2 दिन बाद उसे डोमिनिका में पकड़ा गया था। भारत लगातार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।

साल 2013 में मेहुल चोकसी ने शेयर बाजार में हेराफेरी करके यह फ्रॉड किया था। उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकला हुआ है, लेकिन इस बीच वो एंटीगुआ भाग निकला। जांच एजेंसियों ने उसे भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी अब तक 2,500 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है। मेहुल ने एंटीगुआ और बारबुडा में काफी बड़ा निवेश कर रखा है।

इसके अलावा उसने वहां की नागरिकता ले ली है। उसे नवंबर, 2017 में कैरेबियाई राष्ट्र द्वारा निवेश कार्यक्रम के तहत नागरिकता दी थी। मार्च में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया था कि भगोड़े विजया माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को जल्द भारत लाया जाएगा। वे राज्यसभा में बीमा संशोधन विधेयक पर एक बहस का जवाब दे रही थीं।

जून, 2017 में मेहुल चोकसी के वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट में सफाई दी थी कि हीरा कारोबारी इलाज के लिए एंटीगुआ गया है, न कि भागा है। चोकसी ने अपने वकील विजय अग्रवाल के माध्यम से कोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा था कि उसने मेडिकल जांच और उपचार के लिए जनवरी 2018 में देश छोड़ा था। इसक बाद मेहुल लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर भारत लौटने में असमर्थता जताता रहा। चोकसी के अलावा उसका भतीजा नीरव मोदी भी पीएनबी घोटाले का आरोपी हैं। ईडी और और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) दोनों इनकी तलाश कर रही हैं।

मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मेहुल की एंटीगुआ और बारबूडा ने नागरिकता रद्द कर दी है। इस पर मार्च में उसके वकील विजय अग्रवाल ने सफाई दी थी कि यह मामला सिविल कोर्ट में चल रहा है। अभी उसकी नागरिकता रद्द नहीं की गई है। वहां के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने भी तब कहा था कि मेहुल ने कानूनी रास्ता अपनाया है। इसलिए इस मामले को सुलझने में 7 साल लग जाएंगे।

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