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संविधान और किसान दोनों को रौंदा गया: रणदीप सिंह सुरजेवाला, महासचिव, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

आज ही के दिन 26 नवंबर, 1949 को हमने भारत का संविधान पारित किया था और तय किया कि ‘न्याय’ और ‘समानता’ ही सर्वापरि और सर्वव्यापी होगा। आज ही के दिन 26 नवंबर, 2020 को देश के भाग्यविधाता अन्नदाता किसानों ने कृषि विरोधी क्रूर काले कानून, जो संविधान के प्रावधानों को रौंदकर लाए गए थे, का विरोध प्रारंभ किया था।

By RNI Hindi Desk 
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नई दिल्ली: आज ही के दिन 26 नवंबर, 1949 को हमने भारत का संविधान पारित किया था और तय किया कि ‘न्याय’ और ‘समानता’ ही सर्वापरि और सर्वव्यापी होगा। आज ही के दिन 26 नवंबर, 2020 को देश के भाग्यविधाता अन्नदाता किसानों ने कृषि विरोधी क्रूर काले कानून, जो संविधान के प्रावधानों को रौंदकर लाए गए थे, का विरोध प्रारंभ किया था।

आज उचित दिन है जब हम इन दमनकारी कानूनों की संवैधानिक व्याख्या और प्रासंगिकता की बात कर सकते हैं। 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा के गठन से 26 जनवरी, 1950 (संविधान को लागू किए जाने तक), संविधान सभा की कुल 165 बैठकें हुईं। बौद्धिक समृद्धि वाले हमारे संविधान सभा के सदस्यों ने इतने लंबे विचार विमर्श के बाद संविधान के अनुच्छेद 246 की सातवीं अनुसूची में ‘‘राज्यों’’ को 14 वें नंबर पर कृषि के विषय में कानून बनाने का दायित्व दिया। केंद्र के अधिकार वाले विषयों की 97 सूचियों में एक भी जगह केंद्र सरकार को कृषि पर कानून बनाने का अधिकार नहीं दिया। मगर फ़िर भी मोदी सरकार ने किसानों के संवैधानिक अधिकारों को रौंदकर कृषि के क्रूर काले कानून बना दिये।

अर्थात आज ही वो सही दिन है जब पूँजीपतियों के हितों को साधने वाली भाजपा सरकार के इस ‘‘असंवैधानिक कृत्य’’ का सर्वाधिक विरोध किया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने भारत के संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषय 33(B) – ‘व्यापार और वाणिज्य’ में (B) खाद्य पदार्थ, जिसमें खाद्य तिलहन और तेल शामिल हैं, के प्रावधानों के तहत कृषि के असंवैधानिक कानून बना दिए।

मगर जो सरकार चंद ‘धन्नासेठों की, धन्नासेठों के द्वारा, और धन्नासेठों के लिए’ अपना शासन चलाती हो, उससे अपेक्षा भी क्या की जा सकती है। हमारे संविधान निर्माताओं ने कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि आज़ाद भारत में इतनी क्रूरता से किसानों-मजदूरों और संविधान को ऐसे रौंदा जाएगा। आज काले क्रूर कानूनों से संविधान की हत्या का आरोप भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार पर है, तो किसानों की हत्या की साजिश का आरोप संविधान की शपथ लेने वाले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री व उनके परिवार पर है।

आज हर देशवासी के लिए दृढ़ता से लड़ने का संकल्प लेने का दिन है। आज हर देशवासी प्रण ले कि भारत के संविधान की गरिमा, संविधान का गौरव और हमारा गणतंत्र किसी भी सूरत में तानाशाह सरकारों और बेलगाम शासकों की साजिशों के आगे नहीं झुकेंगे और अपनी प्रजातांत्रिक स्वाधीनता को अक्षुण्ण रखेंगे।

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