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ऑक्सीजन ऑडिट रिपोर्ट पर आमने-सामने आई बीजेपी और आप, केजरीवाल बोले- मेरा गुनाह है कि…

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : ऑक्सीजन ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने-सामने आ चुके है। एक तरफ जहां बीजेपी ने कथित ऑक्सीजन ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर कई आरोप लगाए हैं। वहीं केजरीवाल सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।

बीजेपी का कहना है कि दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की जरूरत से चार गुना अधिक मांग की थी और उनके इस ‘झूठ’ के कारण कम से कम 12 राज्यों में जीवन रक्षक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हुई। वहीं इस हमला पर पलटवार करते हुए सीएम केजरीवाल ने कहा कि, ”मेरा गुनाह है कि-मैं अपने 2 करोड़ लोगों की साँसों के लिए लड़ा। जब आप चुनावी रैली कर रहे थे, मैं रात भर जग कर ऑक्सीजन का इंतज़ाम कर रहा था। लोगों को ऑक्सीजन दिलाने के लिए मैं लड़ा, गिड़गिड़ाया। लोगों ने ऑक्सीजन की कमी से अपनों को खोया है। उन्हें झूठा मत कहिए, उन्हें बहुत बुरा लग रहा है।”

वहीं दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि ऐसी कोई रिपोर्ट है ही नहीं। उन्होंने कहा कि कथित रिपोर्ट बीजेपी मुख्यालय में तैयार की गई है।

सिसोदिया ने कहा कि, ‘‘हमने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ‘ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी’ के सदस्यों से बात की है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी रिपोर्ट पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। बीजेपी झूठी रिपोर्ट पेश कर रही है, जो उसकी पार्टी मुख्यालय में तैयार की गई है। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि ऐसी रिपोर्ट पेश करें, जिस पर ‘ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी’ के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हों।’’

बीजेपी का दावा

बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी लहर के दौरान जब संक्रमण के मामले चरम पर थे तब दिल्ली सरकार ने 1,140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की थी जबकि वह 209 मीट्रिक टन का भी इस्तेमाल नहीं कर पायी थी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के फार्मूले के मुताबिक भी देखा जाए तो उसे 351 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी जबकि केंद्र सरकार के आकलन के मुताबिक जरूरत 209 मीट्रिक टन की थी और केजरीवाल सरकार ने 1,140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता जताई थी।

बता दें कि दिल्ली में अप्रैल और मई में कोविड-19 की दूसरी लहर का बहुत बुरा असर हुआ था। इस दौरान शहर के विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण रोजाना कई लोगों की मौत हुई थी।

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