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घरवालों के सामने ही मासूमों के पेट पर जगह-जगह सरियों से दागा, तड़पते रहे बच्चे, लेकिन कोई बचा न सका; वजह जान चौंक जाएंगे…

घरवालों के सामने ही उनके बच्चों को गरम-गरम लोहे के सरियों से पेट पर दागा गया, जिससे उनके बच्चे तड़प उठे। लेकिन वो अपने बच्चे यानी कलेजे के टुकड़े को बचा भी न सके और उन्हें छटपटाता हुआ देखते रह गये। आपको बता दें कि ये पूरी घटना मध्य प्रदेश के राजगढ़स जिले की है।

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : घरवालों के सामने ही उनके बच्चों को गरम-गरम लोहे के सरियों से पेट पर दागा गया, जिससे उनके बच्चे तड़प उठे। लेकिन वो अपने बच्चे यानी कलेजे के टुकड़े को बचा भी न सके और उन्हें छटपटाता हुआ देखते रह गये। आपको बता दें कि ये पूरी घटना मध्य प्रदेश के राजगढ़स जिले की है। जहां पिछले 10 दिनों में 3 ऐसे मासूम बच्चे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती होने पहुंचे, जिनके शरीर पर गर्म सरिये से दागने के निशान हैं।

खबरों की मानें तो ये सभी दाग अंधविश्वास के कारण है। दरअसल आज भी कई लोग अपने बच्चे की तबियत बिगड़ने पर उसे बाबा-ओझा के पास ले जाते है, जहां ये बच्चे के माता-पिता के विश्वास का फायदा उठाकर छोटे मासूम बच्चों को प्रताड़ित करते है। और इलाज के नाम पर बच्चों के शरीर को जगह-जगह दाग देते है। बाद में परिजन उन्हें लेकर राजगढ़ जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर्स का कहना है कि निमोनिया, वायरल से बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हुए हैं।

डॉक्टर्स के अनुसार, जिले में इन दिनों बड़ी संख्या में बच्चों को निमोनिया और वायरल हो रहा है। इसके कारण बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में अभी 65 बच्चे भर्ती हैं, इनमें 5 बच्चे ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। कई को निमोनिया है।

बच्चे को सांस लेने में दिक्कत थी, ओझा ने दाग दिया

जिला अस्पताल में मोयाखेड़ा गांव की रहने वाली सुनीता ने बताया कि उसका 6 महीने का बेटा नयन बीमार हो गया था। उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। बच्चे के दादा उसे गांव के ही ओझा के पास लेकए गए। उसने बच्चे के शरीर पर गर्म सरिए से निशान बनाए और कहा कि अब वह ठीक हो जाएगा। बेटे को निमोनिया हो गया था। उसकी पसलियां चल रही थीं। चार दिन बाद भी बच्चे की तबीयत नहीं सुधरी और दर्द बढ़ गया। हालत बिगड़ती देख अस्पताल आ गई। डॉक्टर कहते हैं कि पिछले 10 दिनों में तीन बच्चे ऐसे आए हैं, जिनके शरीर पर सरिए से दागे जाने के निशान मिले हैं।

शिशु रोग विशेषज्ञ ने बताया ये कारण

आरएस माथुर (शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल) ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी भ्रांतियां हैं कि दागे जाने से निमोनिया ठीक हो जाता है। उन्हें समझना चाहिए कि बच्चा पहले से ही निमोनिया से परेशान है, ऐसे में उसे दाग कर उसकी तकलीफ को और बढ़ाया जा रहा है। दागने से निमोनिया ठीक नहीं होगा। बल्कि दूसरी बीमारी होने का भी खतरा बढ़ जाता है। जागरूकता के अभाव में भी लोग ऐसा कर रहे हैं।

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