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जब देवानंद साहब अपने ही हमशक्ल से फिल्मों की मांगने लगे थे भीख!

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: गीतांजली लोहनी  

नई दिल्ली: जिस तरह से आज बॉलीवुड में तीनों खान्स की तीगड़ी बोलती है, ठीक वैसे ही 50 और 60 के दशक में भी ऐसी ही तिगड़ी थी दिलीप कुमार, राज कपूर और देवानंद की। वो एक वक्त था जब एक तरफ इन तीनों की फिल्में धमाल मचा रही थी वहीं ये तीनों  काफी अच्छे दोस्त भी थे। ये तीनों जब भी मिलते थे दिल खोलकर मिलते थे । लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे है हिंदी सिनेमा के सदाबहार हीरो देवानंद साहब की। देव साहब को गुजरे लगभग 10 साल हो जाते है लेकिन ऐसा कभी नई लगता की देवानंद हमारे बीच नहीं है।

वैसे बता दें कि देव साहब का फिल्मी सफर ‘जिद्दी’ फिल्म से शुरू हुआ था। और ज़िंदगी के आखिरी लम्हों तक देवानंद साहब ने फिल्मों के बारे में ही सोचा था ।  लेकिन आज हम आपको यहां उनकी ना ते किसी फिल्म के बारे में बताने वाले है ना ही किसी विवाद या अफेयर आज आप यहां पढ़ेंगे देवानंद की लाइफ के एक फनी किस्से को।

 दरअसल, इन सितारों के कई हमशक्ल भी होते है और उन्हें फिल्मों में सिर्फ वही किरदार प्ले करने का मौका मिलता है जिनके वो हमशक्ल होते है। ऐसे ही है देव साहब के हमशक्ल  किशोर भानुशाली भी। बता दें कि जैसे ही किशोर भानूशाली को मालूम हुआ कि वह देवानंद जैसे दिखते हैं तब किशोर भानूशाली ने देवानंद साहब की एक्टिंग करनी शुरू कर दी पहले तो कामयाबी नहीं मिली लेकिन जब ‘दिल’, ‘करन-अर्जुन’ और ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ जैसी कामयाब फिल्में रिलीज हुई तो किशोर भानूशाली भी सुर्खियों में आ गये।

किशोर भानूशाली के मुताबिक एक दिन जब उन्हें देवानंद से मिलने का मौका मिला तो वो बहुत खुश हुए। किशोर भानूशाली जैसे ही देव साहब के ऑफिस में पहुंचे तो देव साहब पहले से ही ऑफिस में बैठे हुए  थे ।

किशोर भानुशाली को देखते ही देवानंद अपने ही अंदाज में बोले, क्यों किशोर नाम ही हैं ना, मैंने आपकी दिल फिल्म  देखी, और  लगता है अब मुझे आपकी ही कॉपी करनी पड़ेगी। अब भला एक हमशक्ल को इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या हो सकता था। बातों ही बातों में देव साहब ने पूछा कितनी फिल्में कर रहे हो किशोर ने कहा सर 8 से 10 फिल्में है अभी मेरे पास फिर देव साहब ने मजाक में कहा कि मेरे पास तो सिर्फ 2 ही फिल्में है यार मुझे भी कुछ फिल्मों में काम दिलवा दो। वैसे किशोर भानूशाली देवानंद को याद करते है उनकी आंखे भर आती है। खैर आज भले ही देवानंद साहब हमारे बीच न हो पर उनकी यादें आज भी सभी के जेहन में जिंदा है।

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