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OBOR को देखते हुए चीन की उदारता पर सवाल- अमेरिकी राजनयिक

By RNI Hindi Desk 
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अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने चीन के ओबीओआऱ पर सवाल उठाया है। अमेरिकी राजनयिक ने कहा है कि पिछले कुछ सालों में वन बेल्ट वन रोड के पहल को देखने के बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की उदारता पर सवाल उठानें की कई वजहें है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजिंग ने कभी भी कर्ज देने के लिए वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त पारदर्शी प्रक्रियाओं का समर्थन नहीं किया है। ओबीओआर चीन सरकार द्वारा अपनाई गई वैश्विक विकास की रणनीति है जिसने 152 देशों एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया तथा अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बुनियादी ढांचा विकास और निवेश करना शामिल है।

दक्षिण और मध्य एशिया के लिए कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने गुरूवार को विल्सन सेंटर थिंक टैंक के एक कार्यक्रम में कहा कि दुनियाभर में निश्चित तौर पर दक्षिण तथा मध्य एशिया में चीन अन्य देशों को ओबीओआर समझौतों पर हस्ताक्षर करने पर जोर दे रहा है।

इसके लिए वह शांति, सहयोग, खुलेपन, समावेशिता जैसी बातों का हवाला दे रहा है। उन्होंने कहा कि, यह सुनने में काफी अच्छा लगता है कि पिछले कुछ सालों में ओबीओआर की प्रक्रिया को देखने के बाद चाइनीज कम्युनिस्त पार्टी की उदारता पर सवाल करने की वजहें हैं। उन्होंने कहा कि चीन कर्ज के तौर पर अच्छे खासे वित्त पोषण की पेशकश करता है लेकिन वह पेरिस क्लब का सदस्य नहीं है औऱ उसने कर्ज देने केलिए कभी भी वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त पारदर्शी प्रक्रियाओं का समर्थन नहीं किया है।

कील इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदाता है लेकिन वह अपने आधिकारिक ऋण पर पूरे आंकड़ों के साथ कभी रिपोर्ट नहीं देता है या फिर प्रकाशित नहीं करता है। जिसके कारण रेटिंग एजेंसियां पेरिस क्लब या आईएमएफ इन वित्तिय लेनदेन पर नजर नहीं रख पाती है। ये भी बातें सामने आई की चीन दुनियाभर में पांच हजार अरब डॉलर का कर्ज दे रखा है। जिसमें श्रीलंका का हंबनटोटा बंदरगाह भी शामिल है जिसे बीजिंग की सरकार ने एख अऱब डॉलर से अधिक का कर्ज दिया है। अब हालात यह है कि श्रीलंका कर्ज चुकाने में असमर्थ है जिसके कारण उसने बीजिंग को 99 सालों के लिए बंदरगाह को पट्टे पर सौंप दिया है।

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