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शरद पवार के दावों की खुली पोल, 15 फरवरी को चार्टर्ड प्लेन से सफर कर रहे थे देशमुख!

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

मुंबई: एक ओर महाराष्ट्र बढ़ते कोरोना महामारी से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर सियासी उथल-पुथल से जूझ रहा है। कोरोना महामारी दिन पर दिन राज्य को अपनी चपेट में ले रही है, तो वहीं उद्धव सरकार पर दिन पर दिन आरोप भी बढ़ता ही जा रहा है। राज्य के गृह मंत्री पर एक बड़ा आरोप लगा, और इस आरोप को कोई सियासी पार्टी ने नहीं लगाया है, बल्कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और सरकार के सबसे बड़े वजीर परमवीर सिंह ने लगाया है।

दरअसल, एंटीलिया केस की जॉच कर रही केंद्रीय एजेंसी NIA ने मुंबई पुलिस अफसर सचिन वाजे पर अपना शिकंजा कसा, जिसके बाद वाजे को सस्पेंड कर दिया गया। NIA एटीलिया और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में वाजे को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। इसी बीच सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह का तबादला कर दिया। परमवीर सिंह को होमगार्ड विभाग का डीजी बना दिया।

परमवीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया है कि वह हर महीने 100 करोंड़ रुपये इकठ्ठा करने का दबाव बनाते थे। इसके बाद मामला इतना तूल पकड़ लिया है कि, महाराष्ट्र में सरकार का विरोध तो हो ही रहा है, सोमवार को य़ह मामला संसद में भी गूंजा। इतनी ही नहीं संसद में उद्धव सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गई।

सोमवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार गृह मंत्री देशमुख का बचाव करते नजर आये। एनसीपी परमवीर के इस पत्र के जाल से अपने आप को मुक्त करना चाहती है, लेकिन मामला उलझता ही जा रहा है। देशमुख का बचाव करते हुए एनसीपी सुप्रीम शरद पवार ने कहा था कि पत्र में जिस समय की बात की गई है उस वक्त गृह मंत्री अस्पताल और क्वारंटाइन में थे।

सोमवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने दावा किया कि अनिल देशमुख 15 से 27 फरवरी के बीच नागपुर में थे। पवार संकेतो में ये कहने की कोशिश कर रहे थे कि जब देशमुख नागपुर में थे तो उसी दौरान वाजे और देशमुख की मुलाकात मुंबई में कैसे संभव है। जबकि देशमुख ने ही पवार के इस दोवे को खारिज कर दिया। देशमुख ने बताया कि उस वक्त वो एक प्राइवेट प्लेन से नागपुर से मुंबई गए थे।

अनिल देखमुख ने सोशल मीडिया पर विडियो जारी कर कहा कि नागपुर में 15 फरवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। इसके तत्काल बाद आवश्यक अनुमति और सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए होम क्वारंटाइन के लिए वे मुंबई निकल गए। उन्होने दावा किया कि इसके बाद 27 फरवरी तक वह होम क्वारंटाइन में रहे।

देशमुख का दावा सही तब साबित हो गया जब एबीपी न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया ने सोशल मीडिया पर यात्रा दस्तावेज साझा किया। इस दौरान उन्होने कहा कि देशमुख प्राइवेट प्लेन से नागपुर से मुंबई गए थे। 15 फरवरी को अनिल देशमुख के नाम से एक प्राइवेट प्लेन का यात्रा दस्तावेज उन्होंने साझा किया है।

इन सबकके बीच मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं। इन सवालों का भी जवाब शरद पवार को देना चाहिए। पहला सवाल तो यही है कि जिस अवधि में अनिल देशमुख प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, कॉन्ग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिल रहे थे और अपने मृत सुरक्षा गार्ड के परिजनों को सांत्वना देने उसके घर गए थे – तब उनके क्वारंटाइन, आइसोलेशन या फिर में होने के दावों के लिए जो कागजात शेयर किए गए, क्या वो फर्जी थे? खुद शरद पवार और अनिल देशमुख के बयानों में विरोधाभास है। जहाँ पवार ने कहा है कि देशमुख फरवरी में नागपुर में क्वारंटाइन में थे, वहीं देशमुख ने अपने बयान में खुद के मुंबई में क्वारंटाइन होने की बात कही है।

 

 

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