Home विचार पेज बोरिस जॉनसन की भारी जीत के बाद अब ब्रिटेन का भविष्य क्या है ?

बोरिस जॉनसन की भारी जीत के बाद अब ब्रिटेन का भविष्य क्या है ?

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big victory or a timely exit does not mean that the road ahead is smooth

ब्रिटेन 2016 के बाद से ही एक राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है और उसका कारण है यूरोपियन यूनियन से बाहर निकलने का निर्णय, पिछले 5 साल में ब्रिटेन 3 चुनाव देख चुका है और 12 दिसम्बर को एक बार फिर चुनाव हुए।

13 दिसम्बर को आये चुनाव परिणाम में सत्ताधारी कंज़र्वेटिव पार्टी ने 650 सीटों वाली संसद में बहुमत के लिए ज़रुरी 326 सीटों का आँकड़ा पार कर लिया है. उसके खाते में 364 सीटें आई हैं.

इस चुनाव परिणाम से साफ़ था की देश की जनता ने ब्रेग्ज़िट डील को एजेंडे में रखने वाले बोरिस को ही अपना नेता बनाया है और परिणाम आने के बाद उन्होंने भी यह साफ़ किया की यह जनादेश अब ब्रिटेन को यूरोपियन यूनियन से बाहर निकलने का रास्ता साफ़ करेगा।

लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है की क्या ये सब इतना आसान है ? पिछले 30 साल में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली पार्टी ने 31 जनवरी तक ब्रेग्ज़िट डील खत्म करने का निर्णय लिया है लेकिन उनकी राह अब इतनी आसान भी नहीं है।

दरअसल उनकी ब्रेग्ज़िट डील अपने आप में ही विवादस्पद है, अगर यह अमल में लाया जाएगा तो ब्रिटेन और आयरलैंड के बीच जो समझौता है उस पर इसका असर पड़ेगा, समझौते में मुख्य विवाद ब्रिटेन के नॉर्दर्न आयरलैंड और यूरोपीय संघ के सदस्य आयरलैंड के बीच व्यापार के मुद्दों पर सहमति नहीं होना है।

आपको यह भी बता दे की आयरलैंड के बॉर्डर को लेकर जो डील हुई है उसके तहत ये तय हुआ है कि‍ आयरलैंड और ब्रि‍टेन के बीच कोई हार्ड बॉर्डर नहीं बनाया जाएगा वही अगर ब्रिटेन EU से बाहर होता है तो उनके अन्य देशो के साथ सम्बन्ध कैसे रहेंगे उस पर भी कोई ठोस प्लानिंग बोरिस ने अभी तक नहीं दी है।

बोरिस ने यह वादा किया है की वो इस डील को 11 महीने में पूरा करेंगे लेकिन इसमें सालो लग सकते है, वही एक समस्या स्कॉटलैंड को लेकर भी है क्यूंकि उसकी संसद जो है वो ब्रिटेन के इस निर्णय पर वीटो कर सकती है क्यूंकि इससे पहले भी हुए जनमत संग्रह में स्कॉटलैंड के लोगों ने आज़ादी के ख़िलाफ़ मत दिया था.

उसके पीछे एक कारण यह भी था की स्कॉटलैंड को यह लगता है की अगर ब्रिटेन EU से बाहर जाता है तो आर्थिक रूप से ब्रिटेन दूसरे देशो पर निर्भर हो जाएगा और उसके कारण उनके अधिकारों पर आंच आ सकती है क्यूंकि ब्रिटेन वीजा नियमों को भी आसान बनाने की बात कर रहा है।

अंत में हो सकता है की बोरिस जॉनसन का नाम ब्रिटेन के इतिहास में एक ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में लिखा जाए जो इस ऐतिहासिक निर्णय को इम्प्लीमेंट करवा सके लेकिन इससे ब्रिटेन का भविष्य कैसे बदल सकता है इसका निर्णय तो आने वाले समय में ही हो पायेगा।

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