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वैशाख अमावस्या: जानिए महत्व और पूजा विधि, करे पितरों को प्रसन्न

By RNI Hindi Desk 
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हर माह में एक पूर्णिमा और एक अमावस्या होती है। जब शुक्ल पक्ष होता है तो उस दौरान चंद्रमा बढ़ता जबकि कृष्ण पक्ष में चंद्रमा का आकार धीरे-धीरे घटने लगता है।

जब पूर्णिमा होती है तो चंद्र पूरा चमकदार वहीं अमावस्या में दिखाई नहीं देता है। अमावस्या का चन्द्रमा कमजोर होता है वही पूर्णिमा का चन्द्रमा बलवान होता है।

इस बार इस माह की अमावस्या 22 अप्रैल यानी बुधवार को पड़ रही है। ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में आ जाते है तो उस तिथि को अमावस्या पड़ती है।

वैशाख अमावस्या मुहूर्त- 22 अप्रैल 2020 को 05 बजकर 39 मिनट से सुबह 07 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।

इस दिन चन्द्रमा अपनी मीन राशि को छोड़कर सूर्य के साथ आ जाएगा जो मेष राशि में उच्च के है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी में स्नान करें और भगवान सूर्य को जल अर्पित करे।

इस दिन इस दिन कर्मकांड के साथ अपने पितरों का तर्पण करें। पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें और ऐसा करने से आपको अपने देवताओं और अपने पितरों का आशीर्वाद मिलेगा।

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