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Sharad Purnima 2021: जानिए कब है शरद पूर्णिमा और क्या है शुभ मुहूर्त, करें इस मंत्र का उच्चारण

Know when is Sharad Purnima and what is the auspicious time; शरद पूर्णिमा हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि मनाई जाती है।इस तिथि से शरद ऋतु प्रारंभ होती है, इसलिए इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। उदया तिथि के अनुसार शरद पूर्णिमा का व्रत कल यानी 20 अक्टूबर, बुधवार के दिन रखा जाएगा।

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का एक अलग ही महत्व है, जो हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि मनाई जाती है। इस तिथि से शरद ऋतु प्रारंभ होती है, इसलिए इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसी मान्यताएं हैं कि प्रेम और कलाओं से परिपूर्ण भगवान कृष्ण ने इसी दिन महारास रचाया था। ज्योतिषविदों के मुताबिक, इस दिन चंद्रमा संपूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है और चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। ये अमृतवर्षा जीवन में धन, प्रेम और स्वास्थ्य तीनों का सुख लेकर आती है।

शरद पूर्णिमा तिथि एवं पूजा मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि आज यानी 19 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 3 मिनट पर शुरू होगी और 20 अक्टूबर रात 8 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार शरद पूर्णिमा का व्रत कल यानी 20 अक्टूबर, बुधवार के दिन रखा जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चन्द्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है और इस दिन से शरद ऋतु का आगमन होता है। इस दिन चंद्रमा की दूधिया रोशनी में दूध की खीर बनाकर रखी जाती है और बाद में इस खीर को प्रसाद की तरह खाया जाता है। मान्यता है कि इस खीर को खाने से शरीर को रोगों से मुक्ति मिलती है।

शरद पूर्णिमा की पूजा विधि

शरद पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। समस्त देवी-देवताओं का आवाह्न करें और वस्त्र, अक्षत, आसन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, सुपारी व दक्षिणा आदि अर्पित करने के बाद पूजा करनी चाहिए। संध्याकाल में दूध की खीर में घी मिलाकर अर्धरात्रि के समय भगवान को भोग लगाना चाहिए। रात्रि के समय चंद्रमा के उदय होने के बाग चंद्र देव की पूजा करें और खीर का नेवैद्य अर्पित करें। रात में खीर से भरे बर्तन को चन्द्रमा की अमृत समान चांदनी में रखना चाहिए और अगले दिन सुबह प्रसाद रूप में सबको बांटना चाहिए। इस दिन भगवान शिव-माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की पूजा करनी चाहिए।

शरद पूर्णिमा का महत्व

शरद पूर्णिमा के दिन व्रत करना फलदायी सिद्ध होता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण सभी चंद्रमा की सभी सोलह कलाओं से युक्त थे। इस पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा से निकलने वाली किरणें चमत्कारिक गुणों से परिपूर्ण होती है। नवविवाहिता महिलाओं द्वारा किये जाने वाले पूर्णिमा व्रत की शुरुआत शरद पूर्णिमा के त्यौहार से होती हैं तो यह शुभ माना जाता है। इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती हैं। मान्यताओं अनुसार, शरद पूर्णिमा का व्रत रखने के बाद पूर्ण रात्रि देवी लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से धन समस्याओं का अंत होता है और धन तथा वैभव की प्राप्ति होती है।

खीर कैसे तैयार करें?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने के लिए गाय के दूध, घी और चीनी का इस्तेमाल करें। मां लक्ष्मी को इस खीर से भोग लगाएं। इसके बाद भोग लगे प्रसाद को चंद्रमा की रोशनी में रखें और दूसरे दिन इसका सेवन करें। खीर को कांच, मिट्टी या चांदी के पात्र में ही रखें। इस खीर का सेवन सूर्योदय से पहले कर लेना बेहतर होता है। आप इसे प्रसाद के रूप में भी बांट सकते हैं।

धन प्राप्ति के लिए करें ये दिव्य उपाय

शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाएं। उन्हें गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें। सफेद मिठाई और गुलाब का इत्र भी अर्पित करें। इसके बाद “ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महलक्ष्मये नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें। ऐसा करने से आपके पास कभी धन की कमी नहीं होगी।

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