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2 जून को गायत्री जयंती : वेदों का सार है गायत्री मन्त्र

By RNI Hindi Desk 
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हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ शुक्ल दशमी-एकादशी को गायत्री जन्मोत्सव मनाया जाता है। गायत्री मां से ही चारों वेदों की उत्पति मानी जाती हैं इसलिए देखा जाए तो वेदों का जन्म ही गायत्री मन्त्र से हुआ है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार अकेले गायत्री मंत्र में ही चारों वेदों का ज्ञान है और मंत्रों में गायत्री मन्त्र सबसे ताकतवर मन्त्र माना जाता है।

वेदों की उत्पत्ति करने के कारण इन्हे वेदमाता का दर्जा भी प्राप्त है। एक मान्यता के अनुसार ये ब्रह्मा जी की दूसरी पत्नी भी है।

ॐ भूर् भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।

एक यज्ञ में जब ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री को आने में देरी हो रही थी तो माता गायत्री ने उनकी पत्नी बन यज्ञ पूरा किया था।

सृष्टि के आदि में ब्रह्मा जी पर गायत्री मंत्र प्रकट हुआ था और मां गायत्री की कृपा से ब्रह्मा जी ने गायत्री मंत्र की व्याख्या अपने चारों मुखों से चार वेदों के रूप में की।

इस मन्त्र के बारे में एक बात यह भी प्रचलित है कि इस मन्त्र को जन साधारण तक पहुंचाने के श्रेय ऋषि विश्वामित्र को जाता है।

गायत्री मन्त्र के बारे में कहा जाता है कि कोई अगर इस मन्त्र की सिद्धि कर ले तो यह मन्त्र कामधेनु के समान उसकी हर इच्छा पूरी करता है।

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