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ज्योतिष के नजरिये से जानिये देश को कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति ?

By RNI Hindi Desk 
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चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस ने लगभग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। अब तक इस वायरस से दुनिया के 205 देश प्रभावित हो चुके है वही 4 लाख से ज्यादा की आबादी इस वायरस की चपेट में है। लगभग 18 हज़ार लोग जान गवा चुके है और आज से भारत में भी दुनिया का सबसे बड़ा लॉकडाउन जो की अगले 21 दिनों तक रहेगा शुरू हो गया है।

अब तक दुनिया के किसी भी डॉक्टर के पास इस बीमारी का कोई इलाज़ नहीं है और ऐसे में यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि ज्योतिष का गणित क्या कहता है ! क्या यह वायरस कभी खत्म होगा ? क्या मौत का तांडव रुकेगा ? क्या भारत तीसरी स्टेज को पार करेगा ? आज इस लेख में हम इन्ही सवालों का जवाब ज्योतिष के नज़रिये से समझने की कोशिश करेंगे।

ज्योतिष में वायरस का कारक राहु केतु को माना गया है, शनि का अधिकार स्नायु तंत्र पर है वही मंगल को रक्त का कारक माना गया है। यानी की शरीर पर त्वचा सम्बन्धी बीमारी में केतु का, नसों में शनि का वही ब्लड सर्कुलेशन पर मंगल का अधिकार है।

राहु केतु सूक्ष्म जीवों के कारक माने गए है वही शनि धीमा है। शनि से सम्बंधित कोई भी बीमारी का पता बहुत देर से चलता है वही जीव को गुरु दर्शाता है। जब जब कई सैकड़ो वर्षो में इन सभी ग्रहों का आपस में संबंध बनता है तब तब दुनिया पर बड़ा संकट आता है।

राहु मिथुन राशि में जब आद्रा नक्षत्र पर थे और धनु में केतु मूल नक्षत्र में गुरु के साथ थे तब इस बीमारी का पता चला था। यह स्थिति आज से ठीक 19 साल पहले भी बनी थी जब अमेरिका पर सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ और उसके बाद इस्लामिक आतंकवाद जैसे शब्द पनपे। गुरु का स्वभाव है किसी भी चीज़ को बहुत बड़ा बना देना।

इसी साल 9 नवम्बर को जैसे ही गुरु ने धनु में प्रवेश किया उनकी युति शनि और केतु से हुई। उस वक्त क्रूर ग्रह मंगल वृश्चिक में उनसे 12वा था। जब गुरु धनु में आये उस वक़्त शनि का गोचर अपने अंतिम चरण में था। धनु राशि एक अग्नि तत्व राशि है जिसमे शनि केतु गुरु की युति 57 साल बाद बनी वही 14 दिसम्बर को सूर्य के धनु में आने के साथ ही वो पूर्णतया पीड़ित हो गए और इन चार ग्रहों की युति के चलते दिसम्बर में इस बीमारी के फैलाव का पता चलने लगा।

इसके बाद 8 फरवरी को जैसे ही मंगल ने धनु में प्रवेश किया यह बीमारी महामारी बन गयी। इस तारीख से पहले दुनिया के अधिकतर देश इस बीमारी से बचे हुए थे। मेदिनी ज्योतिष में मंगल और केतु की युति अंगारक योग का निर्माण करती है।

24 जनवरी तक शनि, गुरु और केतु के साथ था जिसके कारण भारत की प्रजा में असंतोष हुआ और नागरिकता कानून को लेकर व्यापक हिंसा हुई। शनि के मकर में आ जाने के बाद नागरिकता कानून पर हो रहा प्रदर्शन बंद हुआ लेकिन कोरोना का संकट प्रवेश कर गया। मंगल धमनियों में बह रहे रक्त का कारक है वही गुरु लीवर का कारक है। मंगल के आते ही इस वायरस का असर दुनिया में फैला और देखते ही देखते 205 देश इसकी चपेट में आ गए।

राहु मंगल केतु से गुरु अति पीड़ित थे जिसके कारण यह आपदा बन गयी। 2009 में फैले स्वाइन फ्लू के समय राहु और गुरु की युति थी वही 2020 में गुरु केतु मंगल की। अगर भारत की बात करे तो भारत की कुंडली वृष लग्न की है जिसके अष्टम भाव में इन 3 ग्रहों के गोचर ने संकट को बड़ा कर दिया और मार्च के पहले हफ्ते से लेकर 15 मार्च आते आते देश के 25 राज्य इसकी चपेट में आ गए।

अब अगर हम ग्रहों के गोचर को देखे तो इस वक़्त मंगल एक दिन पहले ही धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में आ गए है। धनु में इस वक़्त केतु और गुरु की युति है। मकर में शनि स्वराशि के वही मंगल उच्च के होते है। इनकी युति से देश में उद्दंडी लोगों का प्रकोप बढ़ना, और आंतकवादी हमले की स्थिति बनती है।

मंगल का केतु से अलग हो जाना कोरोना के कारण हो रही मौत में कमी लाएगा लेकिन देश में असंतोष बढ़ेगा जैसा की हमने देखा की मंगल की मकर में शनि के साथ युति के अगले ही दिन देश बंदी की गयी। इस कोरोना वायरस से राहत इस देश को 30 मार्च के बाद से दिखाई देगी क्यूंकि 30 मार्च को बृहस्पति धनु को छोड़कर मकर में आ रहे है जहां उनकी युति शनि और मंगल से होगी।

केतु धनु में अकेला होगा और जीव कारक गुरु का केतु से मुक्त हो जाना इस कोरोना के संकट को कम करेगा। अगर इलाज़ की बात की जाए तो आत्मा के कारक और ग्रहो के राजा सूर्य मीन में बलहीन है और 14 अप्रैल को जब वो अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे उसके बाद ही इसका कोई इलाज होगा।

हालांकि यह आपको बता दे की गुरु का मकर में आना इस वायरस के प्रकोप को खत्म जरुर करेगा लेकिन नीच का गुरु देश की अर्थव्यवस्था के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं होगा। इस दौरान धन की कमी और बाज़ार में नगदी का संकट भी होगा लेकिन इतना तय है कि कोरोना वायरस से देश को 3 अप्रैल के बाद राहत मिलना शुरू हो जाएगी।

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