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Diwali 2021: दीपावली पर कैसे करें लक्ष्मी-गणेश का पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Diwali 2021: How to worship Lakshmi-Ganesh on Diwali, know the auspicious time; कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के पूजन का विधान है। इस शुभ मुहूर्त में करें पूजन...

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : हिंदू पंचाग के अनुसार दीपावली का पर्व इस साल 4 नवंबर को कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाएगा। इस दिन ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के पूजन का विधान है। इसके साथ ही इस दिन धन के देवता कुबेर, मां सरस्वती और मां काली का भी पूजन किया जाता है। वहीं 6 नवंबर को भाई दूज से इस पर्व का समापन होगा।

दिवाली 2021: शुभ मुहूर्त

दिवाली पूजा या लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 4 नवंबर को शाम 6 बजकर 9 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक है। यह समय दिल्ली-एनसीआर का है। अलग-अलग शहर के पूजा समय में मामूली अंतर भी हो सकता है।

दिवाली 2021: पूजा विधि

लक्ष्मी-गणेश की पूजन विधि

दीपावली के दिन गणेश-लक्ष्मी के पूजन के लिए सबसे पहले एक चौकी पर लाल रंग का आसन बिछा कर गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। इनके साथ भगवान कुबेर, मां सरस्वती और कलश की स्थापना करें। इसके बाद –

ऊं अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।

मंत्र का जाप करते हुए तीन बार गंगा जल से छिड़क कर सभी स्थान को शुद्ध करना चाहिए। पूजन का संकल्प लेते हुए भगवान गणेश और कलश की पूजा करना चाहिए। हाथ में फूल लेकर गणेश जी का ध्यान करें और उनके बीज मंत्र – ऊं गं गणपतये नम:। और

जाननम्भूतगभू गणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्।

ओम् उमासुतं सु शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।

मंत्र का 3 बार जाप करते हुए उन्हें सिंदूर का तिलक करें और दूर्वा चढ़ाए। इसके बाद कलश पूजन के लिए कलश पर मौली बांधे, उसमें गंगा जल भर आम के पत्ते और नारियल रखें। कलश को जनेऊ, फल-फूल, रोली, अक्षत चढां कर, गोबर से गौरा का बनाकर उन्हें सिंदूर चढ़ाएं। इसके बाद मां लक्ष्मी को रोली से तिलक करते हुए, उन्हें धूप-दीप और वस्त्र चढ़ाएं। मां लक्ष्मी की पूजन उनके बीज मंत्र और इन मंत्रों का जाप करते हुए करें –

ॐ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नम:।।

ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।

ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

इसके साथ ही दीपावली के दिन मां लक्ष्मी के श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए। इनके साथ ही धन कुबेर और मां सरस्वती का पूजन भी इसी विधि से करें। मां काली का पूजन अद्धरात्रि में करने का विधान है। सभी देवी-देवताओं के पूजन के बाद हवन करना चाहिए। गणेश लक्ष्मी को खील-बताशे, नैवेद्य, पान-सुपारी,फल, पंचामृत का भोग लगाएं। पूजन का अतं लक्ष्मी-गणेशी की आरती गा कर करना चाहिए। पूजा से उठकर पूरे घर में दिये जलाए जाते हैं और पूजन का प्रसाद सब में बांटना चाहिए।

महत्व

भगवान राम जब लंका के राजा राक्षस रावण पर विजय पाकर 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटे तो उनके सकुशल आगमन की खुशी में नगरवासियों ने दीपों की कतारें सजाकर उत्सव मनाया था। तब से ही दिवाली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीति और अंधकार पर प्रकाश की विजय रूप में मनाया जाता है।

नोटिस : ”इस लेख से हमारा किसी तरह का कोई संबंध नहीं हैय़ यह हिंदू पंचाग और अन्य पतरों को देखकर तैयार किया गया है।”

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